बोले- 'भाषा हमें आकार देती हैं'
शिखर पहाड़िया ने शेयर किए गए पोस्ट में लिखा है, 'हमारी मराठी अस्मिता समावेश के जरिए चमके, न कि डराने-धमकाने के जरिए। आइए मराठी को हथियार बनाकर नहीं, बल्कि उसका जश्न मनाकर उसकी हिफाजत करें। अस्मिता, आत्म-सम्मान और पहचान की भावना बढ़नी चाहिए, लेकिन इसे विभाजनकारी नहीं होना चाहिए। इससे हमें गर्व होना चाहिए, न कि इसे लेकर पूर्वाग्रह होने चाहिए, फिर चाहे हम भारत में कहीं से भी हों या कोई भी भाषा बोलते हों'। शिखर ने लिखा है, 'मराठी अस्मिता वास्तविक है। हमारी जीवनशैली में निहित है। सोलापुर से होने के नाते, मैं इसे गहराई से समझता हूं। भाषा हमें आकार देती है, इसने हमारे राज्यों, हमारी कहानियों को आकार दिया है, हमें कवि, गीत और क्रांतियां दी हैं। मराठी कोई अपवाद नहीं है। इसे हमारी सभी भाषाओं की तरह ही संरक्षित करना और आगे बढ़ाया जाना चाहिए'।
बोले- 'भाषा को थोपना ठीक नहीं'
शिखर ने लिखा है, 'लेकिन यह गौरव दूसरों की गरिमा की कीमत पर नहीं आ सकता। खासकर उन लोगों के लिए जो ईमानदारी से, कड़ी मेहनत से जीवन यापन कर रहे हैं। सोलापुर से बहुत से लोग कड़ी मेहनत करने और आजीविका के लिए दिल्ली, चेन्नई या कोलकाता जाते हैं। कल्पना कीजिए कि अगर उन्हें वहां पर अवांछित महसूस कराया जाए, उनकी भाषा के लिए अपमानित किया जाए। तब हम क्या कहेंगे? जब लोग अपने परिवारों से दूर संघर्ष कर रहे हों तो हिंसक कार्रवाई के जरिए भाषा को थोपना अस्वीकार्य है'।
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जान्हवी कपूर ने शेयर किया शिखर का पोस्ट
शिखर ने आगे लिखा है, 'यह कोई त्रासदी नहीं है कि मुंबई में लोग हिंदी, तमिल या गुजराती बोलते हैं। असली त्रासदी यह है कि हम मानते हैं कि यह मराठी के लिए खतरा है। हम डर के जरिए किसी भाषा को जिंदा नहीं रख सकते। मुंबई, महाराष्ट्र और भारत उन सभी लोगों का है, जो सम्मान के साथ रहते हैं, ईमानदारी से काम करते हैं और दया का भाव रखते हैं। फिर चाहे उनकी भाषा कोई भी हो। हमारी मराठी अस्मिता को समावेश के जरिए दमकने दें, डरा-धमकाकर नहीं। आइए मराठी का जश्न मनाकर उसकी रक्षा करें, उसे हथियार बनाकर नहीं'। शिखर का यह पोस्ट जान्हवी कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है।