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Shankar Singh Raghuvanshi: जयकिशन के साथ रही शंकर की जोड़ी, ऐसा रहा हैदराबाद से मुंबई तक का सफर

Sat, 26 Apr 2025 09:42 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Shankar Singh Raghuvanshi Death Anniversary: सिनेमा की दुनिया के दिग्गज संगीतकार शंकर सिंह रघुवंशी की आज 26 अप्रैल को पुण्यतिथि है। जयकिशन के साथ उनकी जुगलबंदी रही। जानते हैं उनके बारे में
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शंकर सिंह रघुवंशी - फोटो : साभार-@imdb.com/
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विस्तार
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दिग्गज म्यूजिक कंपोजर शंकर सिंह रघुवंशी की आज शनिवार 26 अप्रैल को पुण्यतिथि है। शंकर सिंह रघुवंशी के नाम से शायद आप इन्हें न जान पाएं, लेकिन अगर कहा जाए शंकर-जयकिशन, तो शायद तुरंत पहचान लेंगे। शंकर सिंह रघुवंशी, जयकिशन दयाभाई पांचाल के साथ 'शंकर-जयकिशन' की जोड़ी का आधा हिस्सा थे। शंकर-जयकिशन ने 1950 और 60 के दशक में लोकप्रिय संगीत निर्देशक जोड़ी के रूप में काम किया। 

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तबला वादक के रूप में की शुरुआत
15 अक्तूबर 1922 को जन्मे शंकर सिंह रघुवंशी अपने करियर के शुरुआती दिनों में वे तबला वादक रहे। उन्होंने बाबा नासिर खान साहिब से इसकी तालीम ली। कई वर्षों तक शंकर ने महान संगीतकार ख्वाजा खुर्शीद अनवर के शिष्य के रूप में अध्ययन किया। शंकर ने उनके ऑर्केस्ट्रा में भी परफॉर्म किया। शंकर ने हैदराबाद में कृष्ण कुट्टी से कथक भी सीखा। फिर वे मुंबई चले आए।

शंकर ने थिएटर में भी किया काम
शंकर ने मुंबई आकर एक थिएटर ग्रुप में काम किया। फिर उन्होंने पृथ्वी थिएटर में काम शुरू किया। यहां वे हुस्नलाल भगतराम के सहायक के तौर पर काम करते। इसी के साथ-साथ संगीत भी कंपोज करने लगे। इसके साथ ही स्टेज पर अभिनय का हुनर भी दिखाना शुरू किया। जयकिशन यानी जयकिशन दयाभाई पांचाल के साथ उनकी मुलाकात काफी दिलचस्प है। जयकिशन गुजरात से ताल्लुक रखते थे और संगीतकार परिवार से होने की वजह से जयकिशन ने हारमोनियम बजाना सीखा। संगीत के प्रति जुनून के चलते वे भी मुंबई आ गए।

शंकर ने जयकिशन को दिलाई पृथ्वी थिएटर में नौकरी
जयकिशन ने शुरुआत में मुंबई आकर एक फैक्ट्री में काम किया। साथ ही फिल्मी दुनिया में संगीत का हुनर दिखाने के लिए संघर्ष भी जारी रहा। एक दिन शंकर और जयकिशन की मुलाकात हुई। दोनों की पहली मुलाकात गुजराती निर्देशक चंद्रवदन भट्ट के ऑफिस में हुई। शंकर यहां अक्सर यहां जाया करते थे। इसी दफ्तर के बाहर शंकर ने जयकिशन को देखा। एक दिन दोनों के बीच बातचीत हुई तो तुरंत दोस्त बन गए। शंकर को मालूम हुआ कि जयकिशन हारमोनियम वादक हैं। उन्होंने जयकिशन को पृथ्वी थिएटर में नौकरी दिलाने का वादा किया और पूरा भी किया। इस तरह जयकिशन को पृथ्वी थिएटर में हारमोनियम वादक की नौकरी मिली। यहीं काम करते हुए दोनों की दोस्ती और गहरी होती गई। 
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राज कपूर ने दिया पहला मौका

पृथ्वी थिएटर में काम करते समय शंकर और जयकिशन धुनें बनाते थे। राज कपूर का ध्यान इस जोड़ी पर गया। इस तरह उन्होंने शंकर-जयकिशन को पहली बार मौका दिया। दोनों ने फिल्म आग (1948) में संगीत निर्देशक राम गांगुली के सहायक के तौर पर काम किया। शंकर के संगीत के हुनर से राज कपूर इतने खुश हुए कि उन्होंने तुरंत ही अपनी फिल्म, बरसात (1949) के लिए शंकर को बतौर संगीत निर्देशक ले लिया। शंकर के कहने पर जयकिशन को भी फिल्म में शामिल किया गया और इस तरह यह मशहूर जोड़ी बनी। यह नए ट्रेंड शुरू करने वाली संगीत जोड़ी बन गई। दोनों ने साथ मिलकर कई खूबसूरत गानों की रचना की। बॉलीवुड गानों में पहली बार ऑर्केस्ट्रा का इस्तेमाल इसी जोड़ी ने किया था। 
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