‘मैं सही-गलत की पहचान खो चुकी थी’
वकील ब्रायन स्टील ने मिया से सवाल किए कि उन्होंने एक बार सपने में डिडी को खुद को रेस्क्यू करते देखा, जबकि वो वही व्यक्ति हैं जिन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इस पर मिया का जवाब था कि उनका मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिति उस समय इतनी उलझी हुई थी कि वो सही-गलत की पहचान खो चुकी थीं। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने डिडी को बेमतलब अच्छा इंसान क्यों कहा और उसे जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया, तो मिया ने साफ कहा, ‘क्योंकि मैं अब भी मानसिक रूप से उसके प्रभाव में थी।’
मानसिक रूप से टूट चुकी थी- मिया
मिया ने कहा कि डिडी की चमकदार दुनिया के पीछे गहरे अंधेरे थे। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें डिडी के साथ काम करने में गर्व महसूस होता था, लेकिन समय के साथ उनकी निजी सीमाओं का उल्लंघन शुरू हुआ। वो मानसिक रूप से इस कदर टूट चुकी थीं कि उन्हें अपने फैसलों पर भरोसा नहीं रहा। मिया ने कोर्ट में ये भी कहा कि वो अब थेरेपी ले रही हैं और धीरे-धीरे खुद को उस ट्रॉमा से बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने ये भी जोड़ा कि उन्होंने ये मामला इसलिए उठाया क्योंकि जब दूसरी महिलाओं ने भी डिडी के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें लगा कि अब खामोश रहना अपराध होगा।
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प्रोसिक्यूशन की सख्त प्रतिक्रिया
सरकारी वकील मोरीन कोमी ने डिफेंस वकील की आक्रामक पूछताछ की शैली पर आपत्ति जताई और कहा कि ये गवाह के सम्मान और मानसिक स्थिति पर हमला है। उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि अगर इस तरह से पीड़ितों को कोर्ट में डराया जाएगा, तो आने वाले मामलों में लोग गवाही देने से हिचकेंगे। हालांकि जज अरुण सुब्रमण्यम ने कहा कि उन्होंने डिफेंस वकील को चिल्लाते हुए नहीं सुना, लेकिन ये जरूर कहा कि गवाह की सोशल मीडिया पोस्ट पर बार-बार सवाल उठाना उचित नहीं है और इससे ट्रायल का संतुलन बिगड़ सकता है।