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Satyajit Ray: निर्देशन में कभी न मिटने वाली लकीर खींच गए सत्यजीत रे, यह हॉलीवुड निर्देशक भी रहा उनका कायल

Thu, 02 May 2024 07:25 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

सत्यजीत रे के मन में पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' बनाने का ख्याल कैसे आया इसके पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। उस समय वे एक विज्ञापन कंपनी में काम कर रहे थे। यह बात है वर्ष 1950 की। 
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सत्यजीत रे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए मजबूत कहानी, बढ़िया स्टारकास्ट, शानदार लोकेशन और सेट चाहिए होते हैं! यह एक आम धारणा है। इन सबसे अलग किसी फिल्म को देखने लायक बनाने के पीछे निर्देशक का कमाल होता है, यह एक तथ्य है। हिंदी सिनेमा के ऐसे ही निर्देशक रहे सत्यजीत रे। उनकी बनाई पहली फिल्म 'पाथेर पाांचाली' का ओहदा आज भी भारतीय सिनेमा में शीर्ष पर है। आज उन्हीं सत्यजीत रे की बर्थ एनिवर्सरी है। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ रोचक बातें...

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हॉलीवुड फिल्मों से सीखीं निर्देशन की बारीकियां
2 मई 1921 को कोलकाता में जन्मे सत्यजीत रे मशहूर निर्देशक होने के साथ-साथ महान लेखक, कलाकार, चित्रकार, फिल्म निर्माता, गीतकार और बुक कवर डिजाइनर और कॉस्ट्यूम डिजाइनर भी थे। उन्होंने फिल्मों का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया था। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने फिल्म और सिनेमा के बारे में जो कुछ भी सीखा वह हॉलीवुड फिल्में देखकर ही सीखा। यह उनकी काबिलियत थी कि वे हॉलीवुड फिल्में देखते हुए इस बात का सटीक आंकलन कर लिया करते थे कि ये फिल्म किस स्टूडियो ने बनाई है।

ऐसे लिया पहली फिल्म बनाने का निर्णय
सत्यजीत रे के मन में पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' बनाने का ख्याल कैसे आया इसके पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। उस समय वे एक विज्ञापन कंपनी में काम कर रहे थे। यह बात है वर्ष 1950 की। उन्हें उनकी विज्ञापन कंपनी ने छह महीने के लिए हैड ऑफिस इंग्लैंड भेजा था, जहां वे अपनी पत्नी के साथ गए। मैनेजमैंट के मन में ये ख्याल था कि सत्यजीत अब फुल टाइम एडमैन बनकर लौटेंगे और उनके चाय और बिस्किट वाले विज्ञापन और रचनात्मक अंदाज से बनाएंगे। लेकिन, इस रे की इस यात्रा ने उनका पूरा जीवन ही बदल दिया। यहीं से 'पाथेर पांचाली' के विचार का जन्म हुआ।

इस फिल्म ने छोड़ी गहरी छाप
दरअसल, लंदन पहुंचने के तीन दिन के अंदर सत्यजीत रे ने विट्टोरियो डी सीका की महान फिल्म 'बाइसिकिल थीव्ज'  देखी। यूं तो विज्ञापन एजेंसी में काम करते हुए 'पाथेर पांचाली' बनाने का विचार रे के दिमाग में काफी वक्त से चल रहा था। लेकिन, विट्टोरियो की फिल्म देखने के बाद उन्होंने स्टारकास्ट और लोकेशन को लेकर कुछ निर्णय किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक लंदन प्रवास के दौरान सत्यजीत रे ने 99 फिल्में देखीं। इसके बाद इस सिनेमा से सीखे सबक उनके दिमाग में घूमते रहे। कहा जाता है कि भारत वापस लौटते हुए उन्होंने 'पाथेर पांचाली' का पहला ट्रीटमेंट लिख लिया था।

हॉलीवुड निर्देशक ने की थी तारीफ
सत्यजीत रे के निर्देशन के कायल सिर्फ देश में ही नहीं थे, बल्कि विदेशों तक उनकी काबिलियत की धूम थी। 'द गॉडफादर' सीरीज और 'अपोकलिप्स नाओ' जैसी फिल्मों के निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कोपोला भी सत्यजीत रे के बड़े प्रशंसक थे। उनकी फिल्मों पर कोपोला ने गहरा अध्ययन किया था। रे को लेकर उनका कहना था, 'हम भारतीय सिनेमा को सत्यजीत रे की फिल्मों के जरिए ही जानते हैं। उनकी बेस्ट फिल्म 'देवी' थी'। इस फिल्म को उन्होंने सिनेमैटिक माइलस्टोन बताया था।
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कोलकाता से अमेरिका लगाया था फोन
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोपोला की फिल्म 'द गॉडफादर' (1972 ) जब रिलीज हुई थी तो कोलकाता से सत्यजीत रे ने उन्हें अमेरिका फोन लगाया था और तारीफ करते हुए कोपोला से कहा था कि अल पचिनो इस फिल्म में उनकी खोज हैं और इसमें मार्लन ब्रांडो के काम को तो कोई कभी छू नहीं सकता।
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सत्यजीत रे के पसंदीदा कलाकार
सबके पसंदीदा रहे सत्यजीत रे के पसंदीदा एक्टर्स कौन रहे? इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहेगा। एक बार उनसे हिंदी फिल्मों में उनके पसंदीदा स्टार के बारे में सवाल किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके जवाब में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और नाना पाटेकर का नाम लिया था। सत्यजीत रे कमाल के बुक कवर डिजाइनर थे। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' किताब का कवर डिजाइन किया था।
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