बॉलीवुड के अभिनेता सतीश शाह का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्हें फिल्म 'जाने भी दो यारों (1983)', 'मैं हूं ना (2004)', 'कल हो ना हो (2003)' और 'फना (2006)' जैसी फिल्मों में बेहतरीन किरदार निभाने के लिए जाना जाता था। उनके निधन की खबर से उनके फैंस गमगीन हैं। ऐसे में वह उनके बारे में जानना चाहते हैं। आइए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ मशहूर किस्सों के बारे में जानते हैं।
फिल्मों में इस तरह आए सतीश
एक बार सतीश के स्कूल में सालाना फेस्टिवल में नाटक किया जाना था। इसमें एक्टर की कमी थी। ऐसे में सतीश के अध्यापक ने उनका नाम दे दिया। सतीश अपने अध्यापक को इसके लिए मना नहीं कर पाए। उन्होंने नाटक के लिए डायलॉग याद कर लिया लेकिन जब वह किसी के सामने इसे बोलते तो वह भूल जाते थे। इसके बाद अध्यापक ने उन्हें बताया कि किसी को देखो मत बस एक्टिंग करो। इसके बाद सतीश ने बेहतरीन अदाकारी की। बाद में उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया।
सतीश शाह
- फोटो : यूट्यूब
पहले शो में निभाए 56 तरह के किरदार
कई फिल्मों में काम करने के बाद सतीश शाह ने साल 1984 में धारावाहिक 'ये जो जिंदगी है' से टेलीविजन में डेब्यू किया था। इस शो में उन्होंने 56 तरह के किरदार निभाए थे। अपने हर किरदार से उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था। उनके यह किरदार आज भी याद किए जाते हैं।
लाश की अदाकारी करके हुए मशहूर
सतीश शाह ने साल 1983 में फिल्म 'जाने भी दो यारों' में अभिनय किया। इसमें उनके साथ नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, पंकज कपूर और नीना गुप्ता जैसे कलाकार थे। इस फिल्म में सतीश को कुछ सीन करने थे, इसके बाद उन्हें पूरी फिल्म में लाश बने रहना था। फिल्म में उन्होंने लाश बनकर इतनी अच्छी अदाकारी की कि वह लोगों के दिलों पर छा गए। इसी फिल्म के बाद सतीश की कामयाबी के रास्ते खुले।
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असल जिंदगी में लोगों को हंसाते थे सतीश
सतीश शाह ने अक्सर फिल्मों में हंसाने वाले रोल किए थे। उनके करीबी बताते हैं कि वह असल जिंदगी में भी बहुत ही सरल इंसान थे। वह अक्सर लोगों को हंसाते रहते थे और जिंदादिल इंसान थे। उन्होंने फिल्म निर्माता मधु शाह से शादी की थी। वह उनके साथ कई शो में जाते थे।
सतीश शाह
- फोटो : एक्स
जा सकती थी आंखों की रोशनी
बचपन में सतीश शाह पार्क में खेल रहे थे। एक बच्चे ने खेल-खेल में उनकी आंखों में धूल झोंक दी। सतीश को कुछ समझ नहीं आया। उन्होंने अपनी आंखों को हथेलियों से रगड़ दिया। इसकी वजह से उनकी आंखों की पुतलियों में खरोंच आ गई। सतीश के पिता को जब इस बात का पता चला, तो वह उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि अगर आप थोड़ी देर और कर देते तो उनकी आंखों की रोशनी चली जाती।