हाथों से कार्ड बनाकर शुरू किया सफर
तान्या मित्तल ने अपने सफर को लेकर कहा, 'मैं बहुत छोटी थी जब मैंने अपना सफर शुरू किया। मेरे पास सिर्फ पांच सौ रूपये थे। मैं 12वीं पास थी। एक 12वीं पास लड़की के लिए अपनी खुद की फैक्टरी लगाना। खुद का बिजनेस अकेले सबकुछ घर बैठकर करना, क्योंकि हमें शाम को छह बजे के बाद घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। आसान नहीं था। मैं हाथों से कार्ड बना-बनाकर यहां तक पहुंची हूं। मैंने बिना कोई छुट्टी लिए एक-एक ईंट जोड़कर पिछले आठ सालों में खुद को बनाया है'।
500 रुपये की लागत से की शुरुआत
संवाद में जब तान्या से पूछा गया कि उन्होंने 500 रुपये से काम की शुरुआत की और आज इस मुकाम पर हैं, यह कैसे संभव हुआ। इस पर उन्होंने बताया, 'मैंने आज करीब 200 से ज्यादा लड़कियों को गोद लिया है। नौ शेल्टर होम चला रही हूं। यहां करीब 150 स्ट्रीट डॉग गोद लिए हैं। इसके अलावा अपनी फैक्टरियों के जरिए हम ढाई सौ से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं। चार फैक्टरी, दो रिटेल स्टोर, इन सबके जरिए मेरी कोशिश रहती है कि जरूरतमंद बच्चों को अपने पास रखूं। आपको सच बताऊं तो मैं एक बनिया परिवार से हूं। मैं जिस परिवार से हूं, वहां लड़कियों पर बहुत बंदिश होती हैं। छह बजे के बाद घर से बाहर जाना नहीं होता है। 23 साल की उम्र में शादी हो जाती हैं। हमारे ऊपर जो अधिकतम खर्चा हमारी शादियों पर होता है। ऐसे में मेरे लिए बहुत मुश्किल था यह सफर। मेरे कभी फ्रेंड नहीं रहे। मैं हाथों से कार्ड बनाती थी और ऑटो से ग्वालियर डिलीवर करने जाती थी। छोटे-छोटे ऑर्डर लेती थी'।
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'बच्चों की दुआ का असर है'
तान्या ने बताया, 'मैंने इंस्टाग्राम आईडी भी इसलिए बनाई, क्योंकि मेरे पापा को इंस्टाग्राम चलाना नहीं आता था'। आगे बताया,' मैं अपनी मम्मी से बोलती की फ्रेंड के यहां पढ़ने जा रही हूं। फिर ग्वालियर से सुबह श्रीधाम एक्सप्रेस लेती थी। दिल्ली जाती थी। सदर बाजार उतरती थी, वहां छोटे-छोटे गिफ्ट्स और सामान खरीदती थी। 6.40 की जीटी एक्सप्रेस चलती थी। उसके फर्स्ट एसी में आती थी, जिससे माल लेकर आ सकूं अपने साथ। मैं रात साढ़े दस वापस ग्वालियर लौटती थी। फिर वहां से घर। मैं सामानों की फोटो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती थी। मेरे पास कोई इनवेस्टर नहीं था। आज भी मेरे पास कोई पार्टनर और इनवेस्टर नहीं है। मुझे लगता है कि यह बच्चों की दुआ है। एक लड़की के लिए ग्वालियर से यहां अमर उजाला के मंच तक आना मेरे लिए चमत्कार से कम नहीं।