हर बार मुझे मिले अलग-अलग किरदार
प्रतीक गांधी को सफलता ‘स्कैम 1992’ से मिली थी। हालांकि, प्रतीक को ‘स्कैम 1992’ के बाद भी एक जैसे ही रोल ऑफर नहीं हुए। उन्होंने कहा कि मुझे हर बार नया किरदार मिला है। लोग मुझे अलग-अलग किरदारों के लिए सोचते हैं और मुझे लगता है कि मैं अपने किरदारों में कुछ नया लेकर आता हूं। स्टीरियोटाइप से बचना मुश्किल है, लेकिन मेरे लिए यह अहम है कि मैं खुद को उससे दूर रखूं।
‘फुले’ न चलने पर दुखी हो गए थे प्रतीक
किसी भी एक्टर के लिए करियर एक जैसा नहीं रहता। प्रतीक के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी कुछ फिल्मों को सफलता मिली, लेकिन कुछ को मिला-जुला रिस्पॉन्स ही मिला। इसको लेकर प्रतीक का कहना है कि जब अच्छी फिल्में नहीं चलती हैं, तो दुख जरूर होता है। खासकर 'फुले' जैसी फिल्म के साथ जिसमें मेरी बहुत सारी उम्मीदें थीं। मैं चाहता था कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और सही तरीके से सराही जाए। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि वह उतनी बड़ी ऑडियंस तक नहीं पहुंच पाई जितनी हम उम्मीद करते थे। फिर भी मैं जब भी किसी स्क्रिप्ट को पढ़ता हूं तो ये सोच कर कि यह प्रोजेक्ट मेरे लिए सही है, पूरी मेहनत से अपने किरदार को निभाता हूं। इसलिए मेरा सैटिस्फैक्शन खुद से आता है, न कि बाहरी रिस्पॉन्स से। मुझे लगता है कि इंडस्ट्री में काफी इनोवेशन की जरूरत है। टेक्नोलॉजी तो है, बस उस ऑडियंस तक पहुंचने का रास्ता ढूंढना होगा।
महंगे टिकट एक बड़ी समस्या
थिएटर्स के महंगे टिकट और मल्टीप्लेक्स की बढ़ती संख्या पर प्रतीक गांधी ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है। टिकट के दाम बहुत बढ़ गए हैं, मल्टीप्लेक्स ज्यादा हो रहे हैं और सिंगल स्क्रीन धीरे-धीरे खत्म हो रही है। खासकर छोटे शहरों के लोगों के लिए फिल्म देखना मुश्किल हो गया है। कई बार उन्हें 50-60 किलोमीटर दूर जाकर ही थिएटर मिल पाता है। हमने सिनेमा हॉलों में ऑडियंस को अच्छा अनुभव देने की कोशिश की है, जैसे आरामदायक सीटें, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। बहुत लोग बस सस्ती आसान जगह पर फिल्म देखना चाहते हैं। अगर हम हर सिंगल स्क्रीन तोड़कर मल्टीप्लेक्स बना देंगे, तो छोटे शहरों के लोग फिल्मों से दूर हो जाएंगे। इसलिए हमें ऐसा संतुलन बनाना होगा जिससे फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
जब सीन के दौरान चलना बंद हो गई गाड़ी
इस इंटरव्यू के दौरान सीरीज के निर्माता गौरव शुक्ला ने शूटिंग से जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शो में असली गाड़ियों के साथ हमने शूट किया है। अक्सर ये गाड़ियां बार-बार बंद हो जाती थीं। इसलिए शो पर हमेशा चार-पांच मैकेनिक मौजूद रहते थे, ताकि जब गाड़ी बंद हो तो हम उसे सही कर सकें। इसके चलते एक सीन हमे स्लोप पर भी शूट करना पड़ा क्योंकि गाड़ी चल ही नहीं रही थी।
सनी हिंदुजा बोले- हमेशा अच्छे रोल का भूखा हूं
इसी दौरान सीरीज में आईएसआई एजेंट का किरदार निभाने वाले सनी हिंदुजा ने अपने किरदार को लेकर कहा कि एक हमेशा अच्छे रोल्स का इंतजार करता रहता है। मैं भी उसी कड़ी में हूं। अच्छे राइटर्स, अच्छे मेकर्स और अच्छे प्लेटफॉर्म्स के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब आपको अच्छी स्क्रिप्ट मिलती है और रोल में जान डालने का मौका मिलता है, तो आपको वह काम पूरे दिल से करना होता है। चाहे वह आईएएस बनने की कोशिश कर रहा संदीप भैया हो या एक आईएसआई एजेंट, हर किरदार में आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है।