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Ravi Baswani: चश्मे बद्दूर से किया डेब्यू, नसीर साहब ने दिलाई पहचान; अधूरी रही रवि के निर्देशक बनने की ख्वाहिश

Sun, 27 Jul 2025 08:32 AM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Ravi Baswani Death Anniversary: रवि बासवानी का करियर काफी अच्छा रहा। उन्होंने फिल्मों के अलावा टीवी में भी काम किया। उन्होंने कभी शादी नहीं की। आज उनकी पुण्यतिथि है।
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रवि बासवानी - फोटो : एक्स
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विस्तार
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अभिनेता रवि बासवानी की आज पुण्यतिथि है। फिल्म 'चश्मे बद्दूर' और 'जाने भी दो यारो' में बेहतरीन काम करने के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। फिल्म में अच्छी अदाकारी करने के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया। वह बेहतरीन कॉमेडी के अलावा कैरेक्टर रोल के लिए भी जाने जाते हैं। आज उनकी पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनके बारे में खास बातें।
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रवि बासवानी का शुरुआती जीवन और पढ़ाई 
रवि बासवानी का जन्म 29 सितंबर 1946 को एक जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा सेंट जॉर्ज कॉलेज मसूरी से पूरी की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की। यहां वह केएमसी नाट्य समाज के सदस्य थे।
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रवि बासवानी का करियर
30 साल के करियर में रवि बासवानी ने लगभग 30 फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'चश्मे बद्दूर' से की। उन्होंने फिल्मों में एक हास्य अभिनेता के अलावा सीरियस रोल भी किए हैं। बासवानी ने 'बंटी और बबली' और 'प्यार तूने क्या किया' जैसी फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं कीं।

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रवि बासवानी - फोटो : एक्स
फिल्मों में निभाया दमदार किरदार
जाने भी दो यारों

फिल्म 'जाने भी दो यारों' साल 1983 में रिलीज हुई थी। इसमें उन्होंने सुधीर नाम का किरदार निभाया। यह किरदार एक पत्रकार का था। इस किरदार को निभाने के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। फिल्म में उनका यह किरदार इतना अच्छा था कि इसके लिए उन्हें 1984 में सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार दिया गया।

चश्मे बद्दूर
साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'चश्में बद्दूर' में रवि बासवानी ने लखन पाल का किरदार निभाया। यह किरदार एक छात्र का था। यह उनकी पहली फिल्म थी। इस फिल्म में अभिनय के लिए उनकी काफी तारीफ हुई। इस फिल्म में फारूक शेख और दीप्ति नवल अहम किरदार में थे।

कभी हां कभी ना
साल 1994 में उनकी फिल्म 'कभी हां कभी ना' रिलीज हुई। इसमें उन्होंने अल्बर्ट गोंजास्विस का किरदार निभाया। इसके लिए भी उनकी काफी तारीफ हुई। इस फिल्म में शाहरुख खान और सुचित्रा कृष्णमूर्ति अहम किरदार में थे।

छोटा चेतन
इसके बाद साल 1998 में फिल्म 'छोटा चेतन' रिलीज हुई। इसमें उन्होंने राजा का किरदार निभाया। यह मलयालम भाषा की फिल्म थी। इसमें उनके किरदार को पसंद किया गया।

चल मेरे भाई
साल 2000 में आई फिल्म 'चल मेरे भाई' में रवि बासवानी ने एक वेटर का किरदार निभाया। उनके इस रोल की भी काफी सराहना हुई।

रवि बासवानी, नसीरुद्दीन शाह - फोटो : एक्स
टीवी में भी किया काम 
एक टेलीविजन अभिनेता के रूप में, रवि बासवानी ने कई टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया। उन्होंने 1980 के दशक में दूरदर्शन पर लोकप्रिय कॉमेडी धारावाहिक 'इधर उधर' में काम किया। इस धारावाहिक में उन्होंने पाठक बहनों, सुप्रिया पाठक और रत्ना पाठक के साथ अभिनय किया था। इसके बाद वह 'एक से बढ़कर एक' और 'जस्ट मोहब्बत (1997)' में नजर आए। 

नसीरुद्दीन शाह के साथ संभाला पद
साल 2004 में जब भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे ने 26 वर्षों के बाद अपने अभिनय पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किए तो रवि बासवानी नसीरुद्दीन शाह के साथ इसके समन्वयक और शिक्षक बने। संस्थान के पाठ्यक्रम को नया रूप देने में इन्होंने भी अहम रोल निभाया। हालांकि बसवानी ने अगले वर्ष संस्थान से इस्तीफा दे दिया।
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पहली फिल्म का निर्देशन से पहले निधन
रवि बासवानी ने कभी शादी नहीं की। वह जिंदगी भर अकेले ही रहे। 27 जुलाई 2010 को नैनीताल में दिल का दौरा पड़ने से बासवानी का निधन हो गया। वह अपनी पहली फिल्म निर्देशित करना चाहते थे। इसके लिए फिल्म की लोकेशन ढूंढ रहे थे। ऐसे में नैनीताल से दिल्ली जाते समय हल्द्वानी में उनका निधन हो गया। यह काफी दुखद रहा कि वह अपनी फिल्म का निर्देशन करने से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह गए।
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