फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ratan Thiyam Dies: नहीं रहे मणिपुरी थिएटर के 'रतन', 77 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; लंबे समय से थे बीमार

Wed, 23 Jul 2025 11:58 AM IST
हिमांशु सोनी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Ratan Thiyam Death News: भारतीय नाटककार रतन थियम का 77 साल की उम्र में निधन हो गया है। रतन पिछले कुल समय से बीमार चल रहे थे।
विज्ञापन
रतन थियम - फोटो : एक्स- @Gaurav Gogoi
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के सांस्कृतिक और रंगमंचीय इतिहास में एक युग का अंत हो गया है। मणिपुर के थिएटर निर्देशक, लेखक, कवि और नाटककार रतन थियम का 77 साल की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे थियम ने इंफाल के रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में अंतिम सांस ली। उनकी तस्वीर शेयर करते हुए कांग्रेस के लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई ने इस खबर के बारे में जानकारी दी है। गौरव ने रतन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 

विज्ञापन

 


रतन थियम का जन्म मणिपुर में हुआ और उनके पिता मणिपुरी नृत्य शैली के कलाकार थे। उन्हें बचपन से ही कला के क्षेत्र में जाना था। 

विज्ञापन

रतम थियम - फोटो : एक्स

मणिपुर के सीएम ने दी श्रद्धांजलि
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रतन थियम की कला में मणिपुर की आत्मा बसती थी।वो सिर्फ एक रंगकर्मी नहीं, बल्कि मणिपुरी संस्कृति के संवाहक थे। उनका समर्पण और दृष्टिकोण भारतीय थिएटर के लिए एक अमूल्य धरोहर बन चुका है।
 



रतन थियम के करियर की शुरुआत
रतन थियम का रचनात्मक सफर सिर्फ रंगमंच तक सीमित नहीं थी। उन्होंने पेंटिंग, कविता और लघु कहानियों से अपने कला-सफर की शुरुआत की। अपने शुरुआती दौर में वो नाट्य समीक्षक के रूप में भी सक्रिय रहे। धीरे-धीरे मंच से उनका जुड़ाव बढ़ा और वो खुद नाटक लिखने और निर्देशित करने लगे। उनके नाटकों की खासियत थी – प्राचीन भारतीय परंपराओं को समकालीन संदर्भों में ढालना।

ये खबर भी पढ़ें: Anuradha Paudwal: कांवड़ यात्रा में अश्लील डांस पर भड़कीं अनुराधा पौडवाल, बोलीं- ‘ये बकवास बंद करो’

 

थिएटर ऑफ रूट्स के स्तंभ
1970 के दशक में जब भारतीय रंगमंच पश्चिमी प्रभावों से भरा हुआ था, तब रतन थियम ने 'थिएटर ऑफ रूट्स' आंदोलन को नई पहचान दी। इस आंदोलन का उद्देश्य था- भारतीय संस्कृति, दर्शन और पारंपरिक कला रूपों को नाट्य मंच पर फिर से दिखाना। 

रतन थियम के यादगार नाटक
रतन थियम के नाटकों में सिर्फ कहानी नहीं होती थी, बल्कि उसमें संगीत, सीन, डायलॉग भी कमाल के होते थे। ‘उत्तर प्रियदर्शी’, ‘करणभारम्’, ‘द किंग ऑफ डार्क चैंबर’ और ‘इम्फाल इम्फाल’ जैसे उनके नाटकों में सामाजिक संदेश और सांस्कृतिक आत्मा दिखाई देती थी।

रतन थियम को मिली राष्ट्रीय पहचान
1987 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2013 से 2017 तक वो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने थिएटर की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें