दूसरी ओर अगर पूरी फिल्म का कंट्रोल सिर्फ एक ही व्यक्ति को दे दिया जाए तो वह भी खतरनाक हो सकता है। इससे वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी या अहंकारी हो सकता है। याद रखिए फिल्म बनाना बहुत महंगा काम है इसमें समय पैसा और कई लोगों की प्रतिष्ठा जुड़ी होती है। इसलिए एक ही व्यक्ति पर सबकुछ छोड़ देना भी सही नहीं है। इसलिए मैं मानता हूं कि कॉरपोरेट सिस्टम एक जरूरी बुराई है। उसमें कमियां हैं लेकिन फायदे भी हैं। और यही बात मैं इंडिपेंडेंट फिल्ममेकिनग पर भी लागू करता हूं। उसमें भी खामियां हैं। संतुलन ही सबसे जरूरी है। ना पूरी आजादी सही है ना पूरा कंट्रोल। सही फिल्म वहीं बनती है जहां क्रिएटिविटी और जिम्मेदारी के बीच सही संतुलन हो।
आज के समय में निर्देशक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आपको क्या लगती है?
देखिए फिल्में किसी तय नियम से नहीं बनतीं। फिल्म को दिशा देने वाला असली व्यक्ति निर्देशक होता है। 'एनिमल' सफल हुई इसलिए उसकी चर्चा हो रही है। अगर वही फिल्म असफल होती तो लोग उसे आसानी से खारिज कर देते। सफलता और असफलता नजरिए को बदल देती है लेकिन निर्देशक की सोच अपनी जगह रहती है।
सिनेमा में कोई तय फार्मूला नहीं होता। निर्देशक ही तय करता है कि किस दिशा में जाना है। असली परीक्षा तब होती है जब फिल्म सामने आ जाती है। मेरे लिए सबसे अहम बात है निर्देशक की ईमानदारी और लगन। अगर वह सच्चे मन से काम कर रहा है तो उसे पूरी आजादी मिलनी चाहिए। फिल्म की असली ताकत उसकी सोच और संवेदनशीलता में होती है। यही बात मुझे सबसे महत्वपूर्ण लगती है।
कभी लगा बतौर निर्देशक आप संतुष्ट नहीं थे लेकिन मजबूरी में आगे बढ़ना पड़ा?
हां होता है। निर्देशक की असली जिम्मेदारी है कि वह दूसरों को अपनी सोच समझा सके। लेकिन जब कॉरपोरेट प्रोड्यूसर एक्टर और डायरेक्टर जैसे कई लोग फैसले लेते हैं तो हर किसी को लगता है कि वही सही है। यही टकराव शुरू करता है। अगर कॉरपोरेट हावी हो जाए तो निर्देशक जुनून खो देता है और बस कॉपी करने लगता है। लेकिन पैसा उन्हीं का होता है इसलिए उनकी बात भी जरूरी मानी जाती है। अंत में निर्देशक को अपनी विजन समझाने की क्षमता होनी चाहिए। अगर वह समझा नहीं पा रहा तो शायद विजन है ही नहीं।
क्या कभी निर्देशक की आवाज दब जाती है? क्या इस स्थिति को कंट्रोल करने की जरूरत है?
अभी के हालात में मुझे ऐसा नहीं लगता। क्योंकि हर पक्ष का अपना एजेंडा और अपना उद्देश्य होता है। कॉरपोरेट प्लेटफॉर्म के डेटा पर चलते हैं। कौन सा शो चल रहा है किस एक्टर की रीच है किस तरह की कहानियों को रिस्पॉन्स मिल रहा है। उनकी सोच वहीं से बनती है। लेकिन निर्देशक अपनी समझ के आधार पर दर्शकों की बात करता है। इन दो सोचों का मिलना मुश्किल है।
इसलिए उन्हें उस सिस्टम के प्रति वफादार रहना होगा जिसे उन्होंने बनाया है। वे निर्देशक की सेवा करने के लिए नहीं हैं। उनका काम है अपने प्लेटफॉर्म की जरूरतों को पूरा करना। यही उनका अधिकार है और यही उनकी जिम्मेदारी भी।
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आपने इतने वर्षों तक इंडस्ट्री में काम किया है। नए जमाने के एक्टर्स में आपको क्या बदलाव दिखता है?
मेरे हिसाब से आज की नई पीढ़ी के अभिनेता ज्यादा तैयार हैं। वो तकनीक समझते हैं और अलग अलग तरह की भूमिका निभा सकते हैं। पहले ज्यादातर फिल्में एक ही ढर्रे पर बनती थीं लेकिन अब कहानियों में बहुत बदलाव आया है। आज के अभिनेता बचपन से ही तरह तरह की फिल्में देखते आए हैं। 'एनिमल', 'द कश्मीर फाइल्स', 'द केरल स्टोरी', 'सैराट' जैसी फिल्में पहले के जमाने में नहीं बनती थीं। इन फिल्मों ने नए अभिनेताओं को और सोचने पर मजबूर किया और उनकी अभिनय क्षमता भी बढ़ाई।
न्यू जेनेरेशन में से क्या कोई ऐसा एक्टर है जिसके साथ आप काम करना चाहेंगे अगर मौका मिले?
सच कहूं तो नहीं। मैंने हमेशा स्क्रिप्ट और कैरेक्टर की जरूरत के हिसाब से कास्टिंग की है। सिर्फ एक व्यक्ति ऐसा है जिसके साथ मैं दिल से काम करना चाहता था अमिताभ बच्चन। कारण बहुत सीधा है वह इकलौते ऐसे एक्टर हैं जिनकी फिल्म देखने के लिए मैं टिकट खरीदने लाइन में लगा था। मेरे लिए वही एक सच्चे स्टार हैं। बाकी सभी को मैंने प्रोफेशनल नजर से देखा है कभी फैन की तरह महसूस नहीं किया। लेकिन बच्चन साहब के लिए वह भाव हमेशा रहा।
क्या बड़े स्टार्स खुद आपके साथ काम करना चाहते हैं या आपको ही उनसे दूरी बनानी पड़ती है?
बातचीत तो कई बार हुई है और लोग मेरे काम को जानते हैं। लेकिन मेरी फिल्में ज्यादातर रियलिस्टिक और साइकोलॉजिकल थ्रिलर की तरफ होती हैं। सलमान खान या शाहरुख खान जैसे स्टार्स की अपनी एक बड़ी इमेज होती है और उनके फैन्स उनसे एक अलग तरह का मनोरंजन चाहते हैं।
ऐसे में अगर मैं उनके साथ फिल्म बनाऊं तो मुझे लगता है कि मैं उनके स्टारडम के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगा। मैं उस तरह का सिनेमा बनाता ही नहीं हूं। इसलिए उन्हें मना करने से ज्यादा मुझे लगता है कि अपनी क्रिएटिव ईमानदारी बनाए रखना जरूरी है।
राम गोपाल वर्मा और आमिर खान
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