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'जुनून खत्म हो गया था; मैंने परवाह करना छोड़ दिया था'; आर माधवन ने साझा किया करियर से जुड़ा किस्सा

Sun, 19 Jul 2026 06:17 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

R Madhavan On His Career: अभिनेता आर. माधवन ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब वे थोड़े लापरवाह हो गए थे। वे इसे महसूस तक नहीं कर पा रहे थे। तब उनकी पत्नी ने इस तरफ गौर किया। 
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आर माधवन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आर. माधवन ने साउथ से लेकर बॉलीवुड तक कई चर्चित फिल्मों में काम किया है। वे जिस भी किरदार को करते हैं, उसमें पूरी तरह ढल जाते हैं। हाल ही में आर माधवन ने अपने करियर से जुड़ा एक खुलासा किया। अभिनेता ने बताया कि उनके करियर में एक ऐसा दौर आया, जब वे 40 के दशक की शुरुआत में थे। उन्होंने परवाह करना छोड़ दिया था। ऐसा नहीं था कि उन्होंने अचानक काम करना बंद कर दिया हो। वे तब भी काम कर रहे थे और फिल्में साइन कर रहे थे। लेकिन जिस चीज ने उन्हें वर्षों तक प्रेरित किया, सुबह उठकर किसी कहानी के बारे में सोचने का उत्साह और सेट पर पहुंचने के लिए घर से तेजी से निकलने की बेचैनी, वह सब कहीं खो गई थी।

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पत्नी सरिता ने तुरंत दिलाया ध्यान
माधवन ने आगे कहा, 'अजीब बात है कि उन्हें इस बात का पता भी नहीं चला कि वह चीज गायब थी। उन्हें एहसास होने से पहले ही उनकी पत्नी सरिता ने यह बात पकड़ ली। 'फिल्म कम्पेनियन' के साथ बातचीत में आर माधवन ने उस दौर के बारे में कहा, 'मेरी जिंदगी में एक ऐसा दौर था, जब मैं जो कुछ भी कर रहा था, उसमें मुझे आम तौर पर सफलता मिल रही थी। न तो कोई बहुत बड़ी तारीफ मिल रही थी और न ही कोई जबर्दस्त उछाल आ रहा था'। उन्होंने आगे कहा, 'घर से जल्दी निकलने या किसी भी समय कहानी के बारे में सोचने का जो जुनून मुझमें था, वह खत्म हो गया था। मेरी पत्नी ने ही मुझे इस बात का एहसास दिलाया'। 

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आर माधवन - फोटो : सोशल मीडिया
अंदर से कमजोर हो रहे थे अभिनेता
उन्होंने आगे कहा कि असलियत का एहसास उन्हें जोरदार तरीके से हुआ। वह 40 के दशक की शुरुआत में थे। वह उम्र जब ज्यादातर एक्टर अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में होते हैं, लेकिन वह पहले ही ऑटोपायलट मोड में आ चुके थे। एक्टर ने कहा, '40 के दशक की शुरुआत में ही मैं क्रूज कंट्रोल वाले दौर में कैसे पहुंच गया? मैंने ऐसा नहीं चाहा था। मुझमें एक तरह का आत्मविश्वास था, लेकिन वह सही आत्मविश्वास नहीं था। एक कम्फर्ट जोन था, जो असल में मुझे अंदर से कमजोर कर रहा था'।

माधवन ने कफंर्ट जोन को कैसे खत्म किया?
आर. माधवन ने आगे बताया कि उनका कम्फर्ट जोन आर्थिक था। अपने करियर के उस पड़ाव पर माधवन को अपने बिल भरने के लिए फिल्मों की जरूरत नहीं थी। एंडोर्समेंट, पब्लिक अपीयरेंस, भाषण और कॉर्पोरेट इवेंट्स से इतनी कमाई हो रही थी कि उनकी लाइफस्टाइल चलती रहे, चाहे उनकी फिल्में चलें या न चलें। पैसे ने डर को खत्म कर दिया था। डर के बिना, कुछ करने की भूख भी खत्म हो गई थी। इसलिए उन्होंने कुछ ऐसा किया, जिसके बारे में उनकी पोजिशन पर मौजूद अधिकांश अभिनेता कभी विचार नहीं करेंगे, उन्होंने यह सब बंद कर दिया। एक्टर ने कहा,  'मैंने सबसे पहले उस पर रोक लगाई। मैंने कहा ठीक है, मैं अभी कुछ नहीं कर रहा हूं। मैं फिर देखूंगा कि क्या मुझे भूख और असुरक्षा वापस मिल सकती है। मुझे घबराहट की भावना महसूस करने की जरूरत थी। मुझे महसूस करने की जरूरत थी, हे भगवान, मैं इसे खोने जा रहा हूं'।

बोले- वह मेरी जिंदगी का रियलिटी चेक था
आर. माधवन ने कहा, 'हालात के खुद बिगड़ने से पहले ही मैंने समझदारी दिखाते हुए खुद को इस स्थिति में डाल लिया। मैंने ऊपरी दिखावे को हटा दिया। अपनी आवाज सुनी।असलियत को पहचाना। मैं यह बात सचमुच कह रहा हूं। किसी दार्शनिक अंदाज में नहीं। मुझे उस घबराहट को फिर से महसूस करने की जरूरत थी। इसके बाद साल 2011 से 2015 तक का चार साल का दौर आया, जिसे माधवन अपनी जिंदगी का 'रियलिटी चेक' यानी हकीकत से सामना करने वाला मानते हैं। उन्होंने कहा, 'चार साल के उस दौर ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वह मेरी जिंदगी का 'रियलिटी चेक' था'।
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