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120 Bahadur: फरहान अख्तर की '120 बहादुर' का नाम बदलने की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- 'इतने संवेदनशील क्यों?'

Mon, 17 Nov 2025 07:45 PM IST
हिमांशु सोनी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Punjab And Haryana Highcourt on 120 Bahadur: फरहान की फिल्म '120 बहादुर' को लेकर कोर्ट में दायक की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शीर्षक बदलने की मांग को गलत ठहराया है।
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120 बहादुर ट्रेलर रिलीज - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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फरहान अख्तर की आने वाली युद्ध-आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ रिलीज से पहले ही विवादों का सामना कर रही है। सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फिल्म का टाइटल बदलने की मांग वाली याचिका को सुनवाई से ही इंकार कर दिया। कोर्ट ने साफ शब्दों में पूछा कि जब फिल्म को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है, तब सिर्फ नाम को लेकर इतनी संवेदनशीलता क्यों दिखाई जा रही है?

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फिल्म की रिलीज पर रोक की मांग को कोर्ट ने ठुकराया
‘120 बहादुर’ 21 नवंबर को रिलीज होने जा रही है। इसी को रोकने के लिए संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा और कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया था कि फिल्म का शीर्षक और उसकी प्रस्तुति रेजांग ला की लड़ाई की वास्तविकता और शहीदों की पहचान को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं करती।

याचिका में आरोप था कि फिल्म के ट्रेलर में मेजर शैतान सिंह को अकेला नायक दिखाया गया है, जबकि 13 कुमाऊं रेजिमेंट की सी कंपनी के 120 जवानों ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे इतिहास और सामूहिक पहचान को नुकसान पहुंचता है।

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120 बहादुर ट्रेलर रिलीज - फोटो : यूट्यूब ग्रैब
प्रोडक्शन हाउस की दलील
फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट की ओर से पेश अधिवक्ता जय के. भारद्वाज ने कहा कि ट्रेलर और फिल्म का नाम दो महीने से सार्वजनिक डोमेन में हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने रिलीज से ठीक पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जो न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है। भारद्वाज ने यह भी बताया कि फिल्म को सीबीएफसी प्रमाणन के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय की पूर्वावलोकन समिति से 7 नवंबर को मंजूरी मिल चुकी है।

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अहीर समुदाय की भावनाओं की दलील भी नहीं बनी आधार
इस मामले पर संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा का तर्क था कि फिल्म को ‘120 वीर अहीर’ नाम दिया जाना चाहिए, ताकि लड़ाई में अहीर समुदाय के योगदान को स्पष्ट मान्यता मिल सके। याचिका में सभी शहीदों के नाम शामिल करने और अहीर कंपनी की भूमिका को प्रमुखता से दर्शाने की मांग की गई थी।

हालांकि कोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार करने से इंकार किया। कोर्ट का स्पष्ट मत था कि फिल्म एक रचनात्मक अभिव्यक्ति है जिसे पहले ही आवश्यक सरकारी स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। इसके कारण कोर्ट के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं बनती।

 
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120 बहादुर टीजर - फोटो : इंस्टाग्राम
'कास्ट-समुदाय का उल्लेख आर्मी नियमों के खिलाफ'
अधिवक्ता भारद्वाज ने अपनी दलील में इस बात पर भी जोर दिया कि सेना के नियमों के अनुसार किसी सैनिक की जाति, समुदाय या धर्म को उजागर करना अनुचित है। इसलिए फिल्म का शीर्षक ‘120 बहादुर’ रखा गया है, जो सैनिकों की सामूहिक वीरता का प्रतिनिधित्व करता है। फिल्म की शुरुआत में लगे डिस्क्लेमर में भी “वीर सैनिकों” के प्रति सम्मान दर्ज है और पूरी फिल्म भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को समर्पित बताई गई है।

कोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने अंत में कहा कि जब फिल्म आधिकारिक प्रक्रियाओं से गुजरकर तैयार है और रिलीज के बिल्कुल करीब है, तब आखिरी क्षण में इस तरह की याचिका दायर करना न्यायालय के समय की बर्बादी है। इसके साथ ही अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और फिल्म की रिलीज में किसी भी प्रकार का अवरोध लगाने से साफ मना कर दिया।
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