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Shiv Sagar: ‘जीवन में जो भी सीखा, उनसे ही सीखा’, पिता प्रेम सागर के निधन पर शिव सागर ने जारी किया भावुक बयान

Mon, 01 Sep 2025 02:13 PM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Shiv Sagar O Father Prem Sagar: पिता प्रेम सागर के निधन के बाद अब उनके बेटे व निर्माता शिव सागर ने पिता को याद किया है। इस दौरान भावुक होते हुए उन्होंने अपने पिता के सफर के बारे में बताया।
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शिव सागर और प्रेम सागर - फोटो : इंस्टाग्राम-@shivsagarchopra और सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिग्गज निर्माता-निर्देशक राम सागर के बेटे प्रेम सागर का बीते रविवार को निधन हो गया। अब उनको याद करते हुए उनके बेटे व निर्माता शिव सागर ने एक बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने अपने पिता की बीमारी और उनके बारे में जानकारी दी है।

सरल, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्त पिता थे

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पिता को याद करते हुए शिव सागर ने कहा कि उन्हें एक महीने पहले कोलन कैंसर का पता चला था और उनका इलाज चल रहा था। वह शनिवार को घर लौटे और गणेश उत्सव के पांचवें दिन यानी रविवार 31 अगस्त को उनका निधन हो गया। प्रेम जी अपने नाम की तरह ही थे—प्यार और भावनाओं से भरपूर थे। वह एक स्नेही पिता थे, फिर भी जरूरत पड़ने पर सख्त भी थे। 

हमेशा नई तकनीक को अपनाने पर देते थे जोर
अपने बयान में शिव सागर ने आगे कहा कि कैमरा तो बस उनके (प्रेम सागर) हाथों का एक विस्तार था। एक बेहतरीन सिनेमैटोग्राफर होने और जीतेंद्र व हेमा मालिनी के साथ एक फिल्म का निर्देशन करने के बावजूद, उन्होंने ‘विक्रम और बेताल’ के साथ सागर आर्ट्स के टेलीविजन विंग की शुरुआत की, जो रामायण का पूर्ववर्ती था। बाद में, वह सागर आर्ट्स के मार्केटिंग डायरेक्टर बने। वह हमेशा नई तकनीक को अपनाते थे। उन्हें स्टार भारत पर हाल ही में रिलीज हुआ हमारा शो ‘कामधेनु गौमाता’ बहुत पसंद आया। जब हम इसकी शूटिंग कर रहे थे, तो वह सेट पर भी कई बार आए।

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वह मेरे गुरु भी थे
पिता से मिली सीखों के बारे में बात करते हुए शिव सागर ने कहा कि मैंने जीवन और फिल्म निर्माण के बारे में जो कुछ भी सीखा, वह सब उनसे सीखा। वे मेरे गुरु भी थे और वाकपटुता में निपुण थे। हमने कई प्रोजेक्ट्स पर साथ काम किया। मैं उनके धैर्य, कहानी कहने की क्षमता, मार्केटिंग की दृष्टि और लोगों को हंसाने और सहज महसूस कराने की उनकी क्षमता का प्रशंसक था। उन्हें हिंदू धर्म, अध्यात्म और सिनेमा का गहरा ज्ञान था। उनके जाने से एक पूरा युग चला गया।

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