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Producer Anand Pandit: बॉलीवुड फिल्में बॉक्स ऑफिस पर क्यों नहीं चल रहीं? निर्माता आनंद पंडित ने बताई वजह

Tue, 22 Apr 2025 05:10 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Why Bollywood Films Struggle At Box Office: बॉलीवुड फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रही हैं। इसकी कुछ वजहें हाल ही में निर्माता आनंद पंडित ने बताई हैं।
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निर्माता आनंद पंडित - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हाल के दिनों में कई बड़े बजट की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई हैं। कुछ ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। इसकी क्या वजह है, इस पर हाल ही में फिल्म निर्माता आनंद पंडित ने चर्चा की। उन्होंने ओटीटी के बढ़ते आकर्षण और बॉक्स ऑफिस पर बॉलीवुड फिल्में की विफलता की कई वजहें बताईं। जानते हैं। 

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सलीम जावेद का दौर किया याद
आनंद पंडित ने कहा कि मौलिकता की कमी और ओटीटी का क्रेज इसकी वजह हैं। इसके अलावा उन्होंने हाल के वर्षों में आइटम गानों को जबर्दस्ती शामिल करने को भी जिम्मेदार ठहराया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में आनंद पंडित 'सलीम-जावेद' के युग को याद किया, जब फिल्में सिर्फ क्रेडिट रोल के आधार पर बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करती थीं।

बोले- अब फिल्में नहीं, प्रोजेक्ट बनते हैं
आनंद पंडित ने कहा कि इसकी दो-तीन वजह हैं। पहले फिल्में बनती थीं, अब प्रोजेक्ट बनते हैं। पहले हम लेखक और निर्देशक रचनात्मक लोगों पर ज्यादा ध्यान देते थे। आपने एक समय देखा होगा जब सलीम जावेद के नाम पर फिल्में बिकती थीं। आज पिछले पांच सालों में आपको शायद पता भी न हो कि किसी बड़े लेखक की फिल्म बिकी हो। निर्माता अब फिल्मों को सिर्फ प्रोजेक्ट के तौर पर देखते हैं, जिसमें ओटीटी स्ट्रीमिंग, सैटेलाइट, म्यूजिक और ओवरसीज राइट्स के लिए कैलकुलेशन होती है।

बॉक्स ऑफिस किया जा रहा नजरअंदाज
उन्होंने आगे कहा कि फिल्म मेकर अब भारत में बॉक्स ऑफिस के महत्व को नजरअंदाज करते हैं। उनका ध्यान फिल्मों को सिनेमाघरों में दर्शकों के बजाय ओटीटी प्लेटफार्मों पर अपनी फिल्मों को बेचने पर रहता है।  उसी के हिसाब से कैलकुलेशन होती है और बॉक्स ऑफिस भी उसी आधार पर काउंट किया जाता है। 80 और 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस ही एकमात्र बिजनेस था। इसलिए दर्शकों को ध्यान में रखते हुए कि वे टिकट खरीदेंगे और सिनेमा हॉल आएंगे या नहीं, इसे ध्यान में रखते हुए फिल्में लिखी और बनाई गईं। आज दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है क्योंकि ओटीटी की मानसिकता अलग है, सैटेलाइट की मानसिकता अलग है, ओवरसीज अलग है।

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आइटम नंबर को बताया अनावश्यक
आनंद पंडित ने आगे कहा कि दूसरी वजह स्क्रिप्ट में मौलिकता की कमी है। हम पूरी तरह से एक प्रेरित इंडस्ट्री बनकर रह गए हैं। हम दक्षिण से प्रेरित हैं, हम कोरिया से प्रेरित हैं, हम इस भाषा से प्रेरित हैं। इसलिए, जो मौलिकता पहले थी, वह मौलिकता आज नहीं है'। उन्होंने आइटम सॉन्ग को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि आइटम नंबर कभी-कभी प्रमोशन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर आपको कोई अच्छा आइटम नंबर मिलता है, तो यह टेलीविजन या सोशल मीडिया पर प्रमोशन के लिए बहुत मददगार होता है। उसकी वजह से आपके संगीत अधिकार भी बढ़ जाते हैं। लेकिन अगर आप जबर्दस्ती कोई आइटम नंबर डाल देते हैं, तो मुझे लगता है कि वह तस्वीर भी बोरिंग हो जाती है।

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