अमिताभ बच्चन-पिता हरिवंशराय बच्चन
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अमिताभ बच्चन
अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी के बहुत बड़े कवि थे। वह अपनी कविताओं से आम जनमानस को प्रोत्साहित कर देते थे, उनके मन की निराशा को दूर कर देते थे। फिर वह अमिताभ बच्चन को भला कैसे ना मोटिवेट करते। खुद अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह अपने करियर को लेकर काफी निराशा का अनुभव कर रहे थे तो उनके पिता जी ने ऐसी बात कही, जो उनके लिए जीवन भर का सबक बन गई। पिता हरिवंश राय बच्चन ने कहा था, 'बेटा अगर मन का हो तो अच्छा और अगर मन का ना हो तो और भी अच्छा। क्योंकि जब आपके मन का नहीं होता है, तो ईश्वर के मन का होता है।' कहने का मतलब है कि जब जो बात या चीज हमारे हिसाब से नहीं होती है, तो इसका अर्थ है कि ईश्वर ऐसा कुछ करना चाहता है, जिससे हमारी जिंदगी ही बदल जाए। अमिताभ बच्चन को अपने पिता की यह बात बहुत सही लगी और उन्होंने निराश होना छोड़ दिया। इसके बाद वक्त गवाह है कि अमिताभ बच्चन ने अभिनय की दुनिया में ऊंचाइयों को छुआ और सदी के महानायक बन गए।
प्रियंका चोपड़ा-पिता अशोक चोपड़ा
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प्रियंका चोपड़ा
प्रियंका चोपड़ा के पिता ने भी उन्हें जीवन के लिए बहुत बड़ी सीख दी थी, जिसे वह आज भी अमल में लाती हैं। प्रियंका चोपड़ा एक इंटरव्यू में बताती हैं, 'मेरे पिता आर्मी में थे, तो हमें हर दो साल में एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता था, इस वजह से मुझे अपने दोस्तों को छोड़ना पड़ता था, स्कूल बदलना पड़ता था। इस बात से मैं काफी दुखी होती थी। एक बार मैंने कहा कि मैं दूसरी जगह आपके साथ नहीं जाऊंगी। इस पर मेरे पिता ने कहा कि बेटा, तुम पानी की तरह बनो। जो झरने के तौर पर हो तो बड़े-बड़े पत्थरों में छेद कर दे। लेकिन जब किसी जग या प्याले में हो तो उसका आकार ले। असल मैं उनके कहने का मतलब था कि जहां भी जाओ, वहां के हिसाब से खुद को ढाल लो। यह सबक मेरे लिए जीवन और एक्टिंग करियर दोनों, जगह बहुत काम का साबित हुआ।
अपनी मां के साथ आर. माधवन
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आर. माधवन
आर. माधवन की मां ने उन्हें जो सीख दी, उसने उन्हें एक बेहतर इंसान बनने में मदद की। इस बारे में माधवन ने कई साल पहले एक प्रेस मीटिंग में बताया था। वह कहते हैं, ' मां ने मुझे तीन जरूरी सीख दी। पहली, कभी किसी को दुख मत पहुंचाना। दूसरी, कभी किसी को फाइनेंशियली धोखा मत देना और तीसरी, हर व्यक्ति का समान करना, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। यह तीनों ही सीखें माधवन के लिए बहुत मददगार साबित हुईं। यही कारण है कि आज अभिनय की दुनिया में वह बतौर कलाकार तो पॉपुलर हैं ही साथ ही उनके को-एक्टर्स उन्हें एक बेहतरीन इंसान भी मानते हैं।
अपनी मां के साथ माधुरी
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माधुरी दीक्षित
माधुरी दीक्षित की शालीनता, सभ्य व्यवहार का कायल बॉलीवुड पहले से ही है। उनका ऐसा व्यक्तित्व उनकी मां की लाइफ टीचिंग्स की देने ही है। माधुरी ने एक बार अपनी मां के गुजर जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनके बारे में कुछ बातें साझा की थीं। माधुरी ने कहा था, 'मां ने हमेशा लोगों को दिया ही है, वह बहुत दयालु थीं। इसके अलावा उन्होंने हमें जिंदगी को सेलिब्रेट करना सिखाया। मैं आज भी उनकी इस सीख को अमल में लाती हूं।