यहूदियों द्वारा ऑस्कार विजेता हमदान बल्लाल पर हिंसक हमला किया गया था और उन्हें इजरायली सेना द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले पर अकादमी द्वारा मामले का समर्थन ना करने और उनका नाम ना लेने के लिए सैकड़ों सदस्यों द्वारा विरोध किया गया था। विवाद बढ़ता देख अकादमी ने माफी मांग ली है। आइए जानते हैं पूरी खबर।
क्यों हो रहा विरोध?
एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज (एएमपीएएस) ने बीते बुधवार को इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की, लेकिन उन्होंने हमदान बल्लाल का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। इस वजह से इसपर जांच शुरू हो गई थी। इस बयान के बाद अकादमी के लगभग 600 सदस्यों ने इसकी कड़ी निंदा की। पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में मार्क रफालो, जेवियर बार्डेम, ओलिविया कोलमैन, जोआक्विन फीनिक्स, एम्मा थॉम्पसन, पेनेलोप क्रूज और रिचर्ड गेरे शामिल रहे। इसके अलावा पत्रकार और ‘नो अदर लैंड’ के सह-निर्देशक युवल अब्राहम ने भी अकादमी की इस प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह हमदान के हमले पर चुप्पी है। सदस्यों द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया कि बल्लाल को निशाना बनाना सिर्फ उनके ऊपर हमला नहीं है, बल्कि उन सभी पर हमला है, जो सच बताने की कोशिश करता है।
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अकादमी ने मांगी माफी
अकादमी ने बीते शुक्रवार को बयान दिया कि उन्हें खेद है कि वह बल्लाल और फिल्म का नाम नहीं ले पाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह बल्लाल और सभी कलाकारों से माफी मांगते हैं, जिन्हें उनके पिछल बयानों से समर्थन नहीं मिला। अकादमी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह दुनिया में किसी भी तरह के हिंसा की निंदा करते हैं।
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क्या है पूरा मामला?
हाल ही में डॉक्यूमेंट्री फीचर फिल्म का ऑस्कर अवॉर्ड ‘नो अदर लैंड’ ने अपने नाम किया था। लॉस एंजेलिस में हुए 97वें ऑस्कर अवॉर्ड में इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म की काफी चर्चा रही। इसके बाद फिल्म के सह-निर्देशक हमदान बलाल पर वेस्ट बैंक में बसने वाले यहूदियों ने हमला किया और इजरायली सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि अब उन्हें रिहा कर दिया गया है। रिहा होने के बाद बल्लाल ने बताया कि वो लोग उनपर खास तरीके से हमला कर रहे थे।