आज नूर मोहम्मद चार्ली की डेथ एनिवर्सरी है। वही, नूर मोहम्मद, जिन्हें बॉलीवुड के पहले कॉमेडियन के रूप में जाना जाता है। नूर ने बहुत संघर्ष के बाद फिल्मी दुनिया में नाम कमाया और फिर ऐसा मुकाम हासिल किया कि आज भी कॉमेडी स्टार्स का जिक्र हो तो उनका नाम शुमार किया जाता है। फिल्मों में अभिनय के अलावा नूर ने गाना भी गाया और निर्देशन भी किया। आइए जानते हैं उनके बारे में...
स्कूल से भाग देखा करते थे नाटक
नूर मोहम्मद चार्ली का जब जन्म हुआ तब भारत और पाकिस्तान का बटवारा नहीं हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका जन्म 1 जुलाई 1911 को भारत के पोरबंदर के पास बसे रानावाव गांव के मेनन परिवार में हुआ था। बचपन से ही नूर का झुकाव थिएटर की तरफ था। कहा जाता है कि वे स्कूल से भाग जाया करते थे और गांव में आने वाली ड्रामा कंपनी के नाटक देखने चले जाते थे। इस वजह से उनकी पढ़ाई में भी कम दिलचस्पी रही और फिर धीरे-धीरे पढ़ाई से मन ही हट गया।
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चार्ली चैपलिन से थे बेहद प्रभावित
नूर मोहम्मद चार्ली का असली नाम नूर मोहम्मद हाजी अहमद था। कहा जाता है कि वे चार्ली चैपलिन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। उन पर चार्ली चैपलिन का प्रभाव कुछ ऐसा था कि वे उन्हीं की तरह एक्ट किया करते। उन्हीं की तरह अपना व्यक्तित्व भी कर लिया। उन्हीं की जैसी मूंछे भी थीं। इसलिए लोग उन्हें बाबा चार्ली भी कहते थे। बाद में उन्होंने नाम के साथ भी चार्ली लगा लिया। दोनों मुल्कों के बंटवारे के बाद नूर मोहम्मद चार्ली पाकिस्तान चले गए। कहा जाता है कि पाकिस्तान जाने के बाद उनके स्टारडम में ढलान आना शुरू हो गया।
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मुंबई में छाता करते थे रिपेयर
नूर मोहम्मद चार्ली की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। वे पैसों की तंगी से जूझे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने मुंबई में छाता बनाने वाली दुकान में काम करना शुरू कर दिया। यहां वह छाता रिपेयरिंग का काम करते और यही उनकी आजीविका का साधन था। हालांकि, इस दौरान भी उन्होंने अभिनय का सपना नहीं छोड़ा। एक दिन वे मशहूर इंपीरियल फिल्म कंपनी पहुंचे। वहां तब उम्र थी सिर्फ 14 साल और इस तरह फिल्मी सफर शुरू हुआ।
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इस फिल्म से हासिल की लोकप्रियता
1928 में इन्होंने प्रफुल्ल घोष के निर्देशन में बनी फिल्म 'अकलना वरदान' से एक्टिंग शुरू की। फिर कुछ और फिल्में कीं। वर्ष 1929 में उन्हें 'द इंडियन चार्ली' के लिए एल्फिन फिल्म कंपनी ने साइन किया। 1933 में रिलीज हुई इस फिल्म ने उन्हें स्टार बना दिया। कहा जाता है कि इसी फिल्म के बाद उन्होंने नाम में चार्ली नाम जोड़ लिया था। वर्ष 1983 में 30 जून को वे दुनिया को अलविदा कह गए।
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