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इंटरव्यू: भुवन बाम की ‘द रिवोल्यूशनरीज' में कितना सच और कितना फिक्शन? निखिल आडवाणी ने खोले सीरीज से जुड़े राज

सार

The Revolutionaries: निखिल आडवाणी की नई सीरीज 'द रिवोल्यूशनरीज' संजीव सान्याल की किताब 'रिवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम' पर आधारित है। सीरीज में आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी दिखाई गई है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे।
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निखिल आडवाणी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हालांकि, किताब की कहानी को पर्दे पर उतारते वक्त निखिल ने कुछ हिस्सों में क्रिएटिव फ्रीडम भी ली है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने खुद बताया कि सीरीज में कितना हिस्सा इतिहास से लिया गया है और कहां कहानी के लिए बदलाव किए गए।

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द रिवोल्यूशनरीज - फोटो : सोशल मीडिया
‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ की रिसर्च से आया आइडिया
निखिल बताते हैं कि इस सीरीज का विचार 'फ्रीडम एट मिडनाइट' की रिसर्च के दौरान आया। वह कहते हैं, ‘जब मैं ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ पर रिसर्च कर रहा था, तब मुझे समझ आया कि आजादी की लड़ाई की ऐसी बहुत सारी कहानियां हैं, जिनके बारे में हमें बात करनी चाहिए। हमें उन्हें दिखाना चाहिए। साथ ही, मैं थोड़ा थक भी गया था। हर चीज को बार-बार प्रामाणिक रखने की कोशिश कर रहा था। तब मैं सोचने लगा कि इन घटनाओं को किस तरह दिखाया जाए। इन लोगों ने जो किया, जो करने के बारे में सोचा, वह विचार कहां से आया? यह चिंगारी कैसे शुरू हुई?’

वह आगे कहते हैं, ‘उधम सिंह, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे लोग इस सोच से कैसे जुड़े? मुझे लगा कि सत्याग्रह के साथ-साथ एक अलग आंदोलन भी चल रहा था। यह बहुत दिलचस्प कहानी थी और मैं इसे युवाओं के साथ साझा करना चाहता था।’

निखिल आडवाणी - फोटो : इंस्टाग्राम@nikkhiladvani
‘कहानी को बिल्कुल उसी तरह नहीं दिखाया गया है जैसा किताब में है’
फिल्ममेकर बताते हैं कि सीरीज में किताब की कहानी को बिल्कुल उसी तरह पर्दे पर नहीं उतारा गया है। ‘ऐसा कर भी नहीं सकते। मसलन, प्लेन में उड़ रहे हैं, प्लेन से लगभग गिर रहे हैं, वगैरह-वगैरह। इसमें नौ गाने हैं। लोगों की प्रेम कहानी है।’
प्रेम कहानी को लेकर वह प्रतिभा सान्याल का उदाहरण देते हैं। निखिल कहते हैं, ‘असल में प्रतिभा सान्याल को अगर आप गूगल भी करेंगे तो उस समय वह छह साल की थीं। उनका पहले ही गौना हो चुका था। मुझे प्रेम कहानी चाहिए थी, इसलिए मैंने वह हिस्सा जोड़ा।’
निखिल के मुताबिक, सीरीज में कुछ संवाद और हिस्से भी उन्हें खुद तैयार करने पड़े। वह कहते हैं, ‘कहानी को बिल्कुल उसी तरह नहीं दिखाया गया है जैसा किताब में है। लेकिन इसके लिए हमने बहुत मजबूत ऐतिहासिक कंटेंट का सहारा लिया है। मुझे यह भी पता नहीं था कि नेहरू और पटेल ने उस कमरे के अंदर क्या बात की थी। इसलिए मुझे कुछ चीजें खुद बनानी पड़ीं।’

'द रिवोल्यूशनरीज' का ट्रेलर रिलीज - फोटो : सोशल मीडिया
‘कुछ एक्शन मैंने बनाए हैं, लेकिन घटनाएं असली हैं’
सीरीज में कुछ एक्शन सीक्वेंस निखिल ने अपनी तरफ से जोड़े हैं, लेकिन उनके पीछे की घटनाएं असली हैं। इस बारे में  वह कहते हैं, ‘इस मामले में कुछ एक्शन मैंने बनाया है, लेकिन घटनाएं असली हैं। किसी क्रांतिकारी का बम फेंकना, उसके बाद वहां से बचकर निकलना, अंग्रेजों के लिए मोस्ट वांटेड होना और अंतिम संस्कार के जरिए बच निकलना- ये सब असली घटनाएं हैं।’
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द रिवॉल्यूशनरीज - फोटो : X
‘क्रांति की घटनाओं से ज्यादा उनके रिश्ते भी अहम हैं’
सीरीज के केंद्र में चार ऐसे लोग हैं, जो एक ही मकसद के लिए साथ आते हैं। निखिल कहते हैं, ‘इनमें बहुत सारे जुनून हैं, अपने-अपने देश को लेकर। ये चार ऐसे लोग हैं, जो सिर्फ एक मकसद के लिए साथ आते हैं। उन्हें क्रांति चाहिए। जिस तरीके से वो लड़ रहे हैं, उसकी सबसे खूबसूरत बात ये है कि इन सबके आपस के रिश्ते भी बहुत प्यारे हैं। वो एक-दूसरे के साथ किस तरह रहते हैं, किस तरह आगे बढ़ते हैं, यही कहानी को आगे लेकर जाता है।
मेरे लिए इसकी खूबसूरती यही है। यह सिर्फ क्रांति की घटनाओं की कहानी नहीं है। इसमें उन लोगों का जुनून भी है। अगर मुझे इस शो को एक शब्द में बताना हो तो वो जुनून है।’
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