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Navratri Special: ‘मातृत्व आपको सशक्त और आत्मनिर्भर बनाता है’, कल्कि ने बताया नारी शक्ति का मतलब

सार

Kalki Koechlin Interview: इस नवरात्रि अमर उजाला आपके लिए लाया है 9 दिन, 9 कलाकारों की 9 कहानियां। हर दिन एक देवी को समर्पित है। आज नवरात्रि के पांचवें दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो मातृत्व, पोषण और देखभाल की प्रतीक मानी जाती हैं। इस अवसर पर हमने कल्कि केकलां से बात की। पढ़िए कल्कि की कहानी उन्हीं की जुबानी।
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कल्कि केकलां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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‘नवरात्रि के पहले दिन मुझे सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब मेरी बेटी अपनी नैनी (हेल्पर) के साथ पड़ोस में जाकर डांडिया और गरबा कर रही थी। मेरा मानना है कि ऐसे त्योहार समुदाय को जोड़ते हैं, पड़ोसियों से बातचीत बढ़ाते हैं और एक-दूसरे की संस्कृति का हिस्सा बनने का मौका देते हैं। अपनी बेटी को इस तरह उत्साह और खुशी के साथ जुड़े देखना बेहद सुखद अनुभव था।’

बचपन में सोचती थी- काश मेरे दस हाथ होते

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‘बचपन में हमें नवरात्रि के मौके पर बुराई पर अच्छाई की जीत की कहानी सुनाई जाती थी। मां दुर्गा का चित्र मुझे सबसे शक्तिशाली लगता था। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता था कि उनके दस हाथ हैं। मैं सोचती थी कि काश मेरे भी दस हाथ होते। मां दुर्गा को नए कपड़े पसंद हैं तो नए कपड़े पहनते थे। ये यादें मुझे हमेशा देवी की शक्ति की याद दिलाती हैं।’

मां बनने के बाद बदल जाता है जीवन
‘मातृत्व आपके जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। कलाकार के रूप में काम करते हुए रात में जागना और दौड़ भाग करना अलग है, पर जब आप मां बन जाते हैं तो फिर आप अपने बच्चे के अनुसार दिनचर्या बनाते हैं। यह आपको सशक्त और आत्मनिर्भर बनाता है। मातृत्व ने मुझे सिखाया कि मेरा शरीर कितना मजबूत है और यह कितना सह सकता है...बच्चे को नौ महीने तक पालना और फिर उसे जन्म देना। मेरे लिए यह नारी शक्ति का उत्सव है। यह गर्भ और पोषण की शक्ति है।’

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कल्कि केकलां और उनकी बेटी - फोटो : इंस्टाग्राम-@kalkikanmani

बेटी को सीमाएं बनाना सिखाऊंगी 
‘महत्वपूर्ण सबक जो मैं अपनी बेटी को देना चाहती हूं, वह यह है कि वह 'ना' कहना सीखे और अपनी सीमाएं बनाए रखे। वहीं, महिलाओं से कहना चाहती हूं कि यदि आप खुद को प्राथमिकता नहीं देंगी तो कुछ भी काम नहीं करेगा। दूसरों के लिए अच्छा बनने के लिए पहले अपनी ऊर्जा फिर से भरना जरूरी है। कठिन दिनों में मदद मांगना ठीक है पर अपने प्रति दयालु रहें, खुद को माफ करें और ज्यादा उम्मीद न रखें। यही असली नवरात्रि की शक्ति है।’

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बेटी में देखती हूं अपने गुण
‘मेरी मां हाल ही में 78 साल की हुईं। हम दोनों में जो चीज समान है, वह है जिद और फोकस। जब हम कुछ चाहते हैं, तो हम उसमें पूरी तरह से फोकस करते हैं और दृढ़ रहते हैं। यह गुण मैं अपनी बेटी में भी देखती हूं।’

नवरात्रि का असली अर्थ 
‘यह दुनिया महिलाओं के बिना नहीं चल सकती। नारी शक्ति से ही जीवन चलता है, इसे कभी मत भूलिए। दुनिया के कई हिस्सों में नारी शक्ति का सम्मान किया जाता है, चाहे वह गर्भ की पूजा हो या भारत में शक्ति की पूजा।’

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