कल्कि केकलां और उनकी बेटी
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बेटी को सीमाएं बनाना सिखाऊंगी
‘महत्वपूर्ण सबक जो मैं अपनी बेटी को देना चाहती हूं, वह यह है कि वह 'ना' कहना सीखे और अपनी सीमाएं बनाए रखे। वहीं, महिलाओं से कहना चाहती हूं कि यदि आप खुद को प्राथमिकता नहीं देंगी तो कुछ भी काम नहीं करेगा। दूसरों के लिए अच्छा बनने के लिए पहले अपनी ऊर्जा फिर से भरना जरूरी है। कठिन दिनों में मदद मांगना ठीक है पर अपने प्रति दयालु रहें, खुद को माफ करें और ज्यादा उम्मीद न रखें। यही असली नवरात्रि की शक्ति है।’
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बेटी में देखती हूं अपने गुण
‘मेरी मां हाल ही में 78 साल की हुईं। हम दोनों में जो चीज समान है, वह है जिद और फोकस। जब हम कुछ चाहते हैं, तो हम उसमें पूरी तरह से फोकस करते हैं और दृढ़ रहते हैं। यह गुण मैं अपनी बेटी में भी देखती हूं।’
नवरात्रि का असली अर्थ
‘यह दुनिया महिलाओं के बिना नहीं चल सकती। नारी शक्ति से ही जीवन चलता है, इसे कभी मत भूलिए। दुनिया के कई हिस्सों में नारी शक्ति का सम्मान किया जाता है, चाहे वह गर्भ की पूजा हो या भारत में शक्ति की पूजा।’