नवरात्रि और विश्वास का महत्व
‘मैं 14 साल की उम्र से कभी नवरात्रि मिस नहीं करती। हर साल मैं पूरे नौ दिन उपवास रखती हूं। हां, कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां आ गईं कि मैं चाहकर भी उपवास नहीं रख पाई। बचपन में लगता था कि अगर मैं उपवास नहीं रखूंगी तो मां नाराज हो जाएंगी, लेकिन समय के साथ मेरा उन पर और अपने ऊपर भरोसा बढ़ा।’
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बचपन की यादें: गरबा, डांडिया और भक्ति
‘बचपन में हम गांव में गरबा और डांडिया खेलते और माता के भजन गाते थे। ये यादें आज भी मेरे दिल के करीब हैं। गरबा और डांडिया सिर्फ नृत्य नहीं थे, बल्कि भक्ति और उल्लास का संगम थे। अब उम्र की वजह से मैं गरबा या डांडिया नहीं खेल पाती, लेकिन सच कहूं तो बस बचपन की यादें और भजन मुझे वही खुशी और ऊर्जा देते हैं।’
जीवन का संदेश: साहस और विश्वास
‘सबको एक ही संदेश दूंगी कि डर को अपने जीवन का हिस्सा मत बनने दो। हर मुश्किल, चाहे स्वास्थ्य की हो या कोई और संघर्ष, विश्वास और हिम्मत से पार की जा सकती है। मां की शक्ति और अपनी भक्ति ही हमें अंदर से मजबूत बनाती है। विश्वास रखो, साहस रखो और अपने अंदर की शक्ति को जगाओ।