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Yeh Meri Family Season 2 Review: 94 की सर्दियों में अटकी अरुणभ कुमार की टीम, न रजाई गर्म हुई और न कहानी

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ये मेरी फैमिली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
ये मेरी फैमिली सीजन 2
कलाकार
हेतल गडा , अंगद मोहाले , राजेश कुमार और वीना मेहता
लेखक
श्रेयांस पांडे , आनंदेश्वर द्विवेदी , निखिल सचान और विपुल मयंक
निर्देशक
मंदार कुरुंदकर
निर्माता
अरुणभ कुमार
ओटीटी
अमेजन मिनी टीवी
रिलीज
19 मई 2023
रेटिंग
1/5

ये उन दिनों की बात है, जिन दिनों का जिक्र आते ही कसम से 50 साल का बंदा आज भी एकदम से सलमान खान हो जाता है। और, महिलाओं को तो खैर ऐश्वर्या राय याद आती ही हैं। अमेजन मिनी टीवी पर आई वेब सीरीज ऐसी ही ही है। सलमान और ऐश्वर्या राय के सुपरसितारा बनने के दिनों वाली। हां, इसको लिखने वाले थोड़ा कच्चे हैं। सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर प्रसारित होने वाले प्रादेशिक समाचार के उपसंहार में मौसम का हाल और एक ठो गाना समेट लाए लेखकों से सीरीज की उम्मीद क्या बंधती है, ये पहले एपिसोड में ही साफ हो जाता है।  'पंचायत', 'गुल्लक', 'कोटा फैक्टरी' जैसी आम लोगों की आम कहानियों पर काम करना टीवीएफ की पहचान है। 2018 में आई 'ये मेरी फैमिली' को जिसने भी देखा पसंद किया। वजह यही रही कि मामला एकदम असली जैसा था। इस बार एक लोकप्रिय ब्रांड को फिर से भुनाने की कोशिश है, बालू में भुनती दिखती मूंगफली की तरह।

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ये मेरी फैमिली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पांच एपिसोड की पांच कहानियां
'ये मेरी फैमिली' का दूसरा सीजन पांच एपिसोड का है और लिखा भी इसे पांच लोगों ने मिलकर ही है। पांच एपिसोड, पांच कथा लेखक। फिर इन कहानियों पर पटकथा जिन्होंने लिखी, उन निखिल सचान ने 90 के दशक को कितना खुद समझा और कितना दूसरों से समझ के समझा, इस सीरीज को देखते हुए सब धीरे धीरे साफ होता जाता है। कहने का मतलब ये कि ये कहानी बहुत फिल्मी है। एक बहुत ही भद्दे चुटकुले सरीखे दृश्य के जरिये भाई बहन का अपनापा समझाने वाली इस सीरीज को बनाने वालों को ये याद रखना चाहिए कि 90 के दशक में ऐसा बोलने वाले बच्चों की पीठ पर मां-बाप के हाथ में आए हर फेंक कर माने जा सकने वाली चीज के निशान कुरुक्षेत्र के नक्शे की तरह बने होते थे।

ये मेरी फैमिली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लखनऊ की अदबी जुबान नदारद
कहानी इस बार लखनऊ आई है। घर की बिटिया को 12वीं के इम्तिहान की तैयारी करनी है। पिता दूरसंचार विभाग में है। बिटिया को तकलीफ कि इसके बावजूद घर में उसका अलग कमरा नहीं दिलवा पा रहे हैं। माताश्री अध्यापिका हैं। बिटिया आगामी परीक्षा को लेकर परेशान है। हर कोई उसे सुबह, दोपहर, शाम नित्य ज्ञान देता रहता है। 16 बरस की बाली उमर जैसा भी कुछ कुछ साथ में चल रहा है। समझ नहीं आता कि ये प्रेम है या बस एक आकर्षण। जवान होती बिटिया और किशोर होते बेटे की समस्याएं तमाम हैं। डांटने वाले तमाम हैं। ताने मारने वाले तमाम हैं। काश, उस दौर के हर स्कूल में काउंसलिंग का भी एक परमानेंट टीजर होता तो तमाम लोग आलू की आढ़त छोड़ इन दिनों कुछ ढंग का कर रहे होते और कुछ नहीं तो कम से कम इस तरह की सीरीज के संवाद तो ऐसे लिखते कि पता चलता बात लखनऊ में हो रही है।

ये मेरी फैमिली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहले सीन से मात खाता दिखा निर्देशन
एक छोटा सा घर। घर में दो बच्चे और दो माता पिता। छोटा सा परिवार, मुश्किलें हजार। ‘ये मेरी फैमिली’ का यही डीएनए है। सीरीज की दूसरे सीजन का पहले से कोई लेना देना नहीं है। हां, कहानी में कमरे पर कब्जे वाला एंगल जरूर पहले सीजन से खिसककर यहां तक आ गया है। हेतल गडा के जिम्मे इस सीरीज की कहानी के सारे चप्पू हैं लेकिन उनकी नाव यूं लगता है कि निर्देशन के भंवरजाल से कभी निकल ही नहीं पाई। मंदार कुरुंदकर यहां न सिर्फ घर के बड़े बच्चे की कास्टिंग में मात खाते हैं बल्कि लखनऊ की एक टीनएजर की तरह उसे पेश भी नहीं कर पाते हैं। अवस्थी परिवार की बिटिया का शब्द उच्चारण भी बहुत साफ नहीं है। खुद अवस्थी जी का किरदार भी आखिर तक साफ नहीं हो पाता कि करने क्या वाला है। हां, अम्मा बनीं जूही परमार ने शुरू से अपने किरदार का खाका सेट रखा। भाव उनके चेहरे पर बहुत बढ़िया आते हैं, और कई दृश्यों में तो उनकी आंखें ही कमाल कर जाती हैं, बोलने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
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ये मेरी फैमिली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
टीवीएफ का इस बार नहीं चला टोटका
अमेजन मिनी टीवी के जरिये घरों तक पहुंची वेब सीरीज ‘ये मेरी फैमिली’ सीजन 2 बनी भी मुफ्त में बांटने वाली सीरीज की तरह है। कहीं कुछ कोशिश इसमें दिखती नहीं है कि इसे देखने के लिए दर्शकों को समय का निवेश करने के लिए राजी किया जा सके। धीरेंद्र शुक्ला की सिनेमैटोग्राफी का फिल्म के कालखंड से कोई कनेक्शन नहीं है। जसकरन सिंह दुसांजे ने जो कुछ शूट होकर मिला, उसमें से औसतन 30 मिनट के पांच एपिसोड निकालकर अपने काम की इतिश्री कर ली है। नीलोत्पल बोरा एक भी ढंग का गाना पूरी सीरीज में नहीं गढ़ पाए हैं, यही हाल प्रणय का है जिनके बैकग्राउंड म्यूजिक का कहानी की लोकेशन, इसके किरदारों और इसकी कहानी से कहीं कोई तालमेल होता नजर नहीं आता।

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