वेनम लेट देयर बी कारनेज रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला मुंबई
फिल्म ‘वेनम: लेट देयर बी कारनेज’ (Venom: Let There Be Carnage) का अध्याय वहीं से खुलता है जहां इसकी कहानी पिछली फिल्म में छूटी थी। वेनम और एडी ब्रॉक की पटरी अब भी नहीं बैठ रही है। दोनों के विचारों में लगातार टकराव हो रहा है। वेनम को इंसानी दिमाग सबसे लजीज खाना लगता है और एडी उसकी भूख मिटाने के लिए मुर्गियां को सबसे सही विकल्प बताता है। कहानी में ट्विस्ट आता है जब एडी सीरियल किलर क्लीटस में मिलने जाता है। यहां एक बार से दोनों का जी नहीं भरता और फिर से देख मुझे दोबारा की तर्ज पर दोनों फिर मिलते हैं। इस बार मामला संगीन ही नहीं बल्कि कारनेज (मारकाट) वाला हो जाता है। इधर वेनम और एडी ब्रॉक की लड़ाई ऐसे मोड़ पर पहुंच जाती है कि वेनम उसका शरीर छोड़कर चला जाता है। लेकिन, पहली बार आजादी का एहसास करने वाला वेनम भी जल्द ही समझ जाता है कि सहजीविता का मतलब क्या होता है। फिल्म के आखिर तक आते आते एडी ब्रॉक को भी ये समझ आता है कि साथ काम करने वाले दो लोग आपस में कितना ही जूझते रहें लेकिन अगर दोनों का उद्देश्य एक है तो बात बन ही जाती है।
वेनम लेट देयर बी कारनेज रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेनम की आवाज और एडी ब्रॉक बने अभिनेता टॉम हार्डी ने फिल्म ‘वेनम: लेट देयर बी कारनेज’ (Venom: Let There Be Carnage) की कहानी और पटकथा में भी हाथ बंटाया है। सिर्फ 97 मिनट की ये फिल्म कहानी के हिसाब से मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स की दूसरी फिल्मों की तरह विशाल तो नहीं है लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा इसके पोस्ट क्रेडिट सीन में एक बड़ा सरप्राइज है। ये फिल्म ‘वेनम’ का विस्तार बनने जा रही है। गौर करने वाली बात ये है कि फिल्म ‘वेनम: लेट देयर बी कारनेज’ घोषित तौर पर रौद्र, भयानक और वीभत्स रसों की फिल्म है। इसमें हास्य, श्रृंगार और करुण रस के छींटे हैं। हां, फिल्म में अद्भुत जैसा कुछ नहीं है और शांत होना तो इसके डीएनए में ही नहीं है। निर्देशक एंडी सरकिस ने फिल्म को इसके मूल भावों और रसों के हिसाब से पटरी पर बनाए रखने का जो संतुलन दिखाया है, वही इस फिल्म को शुरू से आखिर तक देखते रहने की असली जीत है। फिल्म का वीर रस भी यहीं से आता है।
वेनम लेट देयर बी कारनेज रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘वेनम: लेट देयर बी कारनेज’ (Venom: Let There Be Carnage) की कमजोरी अगर इसकी रूटीन सी कहानी और छोटी सी पटकथा है तो इसकी मजबूती है इसके स्पेशल इफेक्ट्स, इसका पार्श्वसंगीत और इसके कलाकारों का अभिनय। एडी ब्रॉक और वेनम के किरदारों में टॉम हार्डी ने पूरी फिल्म को अपने कंधों पर टिकाए रखने में कामयाबी पाई है। उनकी एक्स गर्लफ्रेंड के किरदार में मिशेल विलियम्स भी असरदार हैं। नाओमी हैरिस के किरदार का अतीत अगर इसमें ढंग से जोड़ा जाता तो सुपरपॉवर का एक सुपरसोनिक अध्याय एमसीयू में शुरू हो सकता था। क्लीटस और कारनेज के किरदार में वूडी हैरेलसन ने अपनी तरह से एक मजबूत खलनायक बनने की कोशिश पूरी की लेकिन बस उन्हीं का अभिनय कहानी में कोई नयापन नहीं ला पाता।
वेनम लेट देयर बी कारनेज रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
टॉम हार्डी की इसके पहले आई फिल्म ‘वेनम’ समीक्षकों को खास पसंद नहीं आई थी और हो सकता है फिल्म ‘वेनम: लेट देयर बी कारनेज’ (Venom: Let There Be Carnage) को भी समीक्षकों से खास मदद न मिले। लेकिन, डेढ़ घंटे से सात मिनट अधिक ये फिल्म बोर बिल्कुल नहीं करती। भारतीय दर्शकों में इस तरह की फिल्मों का स्वाद विकसित होना अभी बाकी है लेकिन फिर भी सुबह नौ बजे के शो में पर्याप्त संख्या में दिखे दर्शक इस बात की गवाही हैं कि हिंदी सिनेमा को इस बदलते दौर के सबक जल्दी सीखने होंगे। फिल्म ‘वेनम’ ने 800 मिलियन डॉलर का कारोबार किया था और फिल्म ‘वेनम: लेट देयर बी कारनेज’ भी इस साल रिलीज होने वाली फिल्मों में बॉक्स ऑफिस पर सबसे अच्छा स्टार्ट लेने वाली फिल्म बन चुकी है। फिल्म सिर्फ बड़े परदे पर और सिनेमा के बेहतरीन साउंड सिस्टम के साथ ही असली मजा दे सकती है।