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Velle Movie Review: वेल्ले बैठे हैं तो भी मत देखिए ये फिल्म, देओल परिवार के नाम पर लगा एक और बट्टा

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करन देओल - फोटो : Social Media
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Movie Review
वेल्ले
कलाकार
अभय देओल , करन देओल , मौनी रॉय , विशेष तिवारी , सावंत सिंह और अन्या सिंह
लेखक
पंकज मट्टा
निर्देशक
देवेन मुंजाल
निर्माता
अभिषेक पाठक और नंदिनी शर्मा
10 दिसंबर 2021
रेटिंग
1.5/5

इम्तियाज अली ने जब ‘सोचा न था’ फिल्म से अपना करियर शुरू किया था तो धर्मेंद्र ने उन्हें अपने भतीजे अभय देओल का करियर बनाने का जिम्मा सौंपा था। अभय देओल काबिल कलाकार रहे हैं लेकिन अपनी एक अलग ही दुनिया की ‘तरंग’ के चलते उनका करियर हिंदी सिनेमा में कभी रफ्तार ले नहीं पाया। सनी देओल के बेटे करन देओल का करियर खुद उनके पापा ने डेब्यू फिल्म में चौपट कर दिया। अब दोनों चाचा भतीजे एक साथ एक फिल्म कर रहे हैं। फिल्म का नाम ही है, ‘वेल्ले’ यानी ऐसे लोग जिनके पास कोई काम नहीं होता। फिल्म रिलीज हो रही है एक और पंजाबियत से भरपूर फिल्म ‘चंडीगढ करे आशिकी’ के साथ और वह भी तब जब फिल्म बनाने वालों को फिल्म वितरण का भरा पूरा अनुभव है। पाठक फैमिली की देओल फैमिली को लेकर बनी इस फिल्म को देवगन फैमिली का सपोर्ट हासिल है। बाकी कहानी आप समझ ही गए होंगे।

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करन देओल - फोटो : Social Media
मुट्ठी भर परिवारों के बीच फंसे सिनेमा को ऑक्सीजन दिलाने के लिए एक तरफ आयुष्मान खुराना जैसे कलाकार ट्रांस गर्ल से प्रेम करने वाली कहानी ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ कर रहे हैं और इधर देओल परिवार का दम अब भी रीमेक पर ही अटका है। तेलुगू में बनी दो साल पहले रिलीज हुई एक कॉमेडी फिल्म का ये रीमेक कब बना, कहां बना और क्यूं बना, किसी को खास पता नहीं है। फिल्म ‘वेल्ले’ वेल्ले लोगों की फिल्म है। उन्हीं की बनाई हुई और उन्हीं के लिए बनी हुई। जिसको अपने समय की जरा सी भी परवाह है, वह ये फिल्म देखने की वेलापंथी शायद ही करे। ओरीजनल अगर आप देख पाएं तो जरूर देखें ताकि पता ये चल सके कि आखिर ‘तड़प’ और ‘वेल्ले’ जैसी फिल्मों की ओरीजनल की रिपोर्ट देखकर रीमेक बनाने वालों के हाथों में अपना भविष्य सौंप देने वाले कलाकारों के गुनहगार कौन हैं?

करन देओल - फोटो : Social Media
डेब्यू फिल्म ‘पल पल दिल के पास’ में ही फ्लॉप हो जाने वाले धर्मेंद्र के पोते करन देओल को फिल्म ‘वेल्ले’ करने की सलाह जरूर किसी वेल्ले इंसान ने ही दी होगी। करन को धड़ाधड़ फिल्में करने की जरूरत भी नहीं है, उनको पहले एक अच्छा कलाकार बनने की जरूरत है। और, अगर ऐसा न हो सके तो फिर कुछ दूसरा करने में भी क्या जाता है। धर्मेंद्र को चाहने वाले करोड़ों में हैं, सनी को भी लाखों लोग चाहते हैं, अब करन की ऐसी फिल्मों के चक्कर में देओल परिवार की चाहत हजारों में आ जाए, ऐसा होना नहीं चाहिए। लेकिन, फिल्म ‘वेल्ले’ के शोज की हालत देखकर लगता यही है। दिक्कत यहां सबसे ज्यादा कहानी और कास्टिंग की है। दक्षिण की कहानी को उत्तर भारत में स्थापित करने में फिल्म के लेखक निर्देशक दोनों पूरी तरह विफल हैं। ‘खेल खेल में’ जैसा माहौल रचने के चक्कर में फिल्म ‘वेल्ले’ के साथ ही यहां खेल हो जाता है।

करन देओल - फोटो : Social Media
फिल्म ‘वेल्ले’ देखकर ये भी समझ आता है कि आखिर हाल फिलहाल में मौनी रॉय की शादी की खबरों ने इतना जोर क्यों मारा था। मौनी रॉय, उर्फी जावेद, पायल रोहतगी, उर्वशी रौतेला ये सब खबरों की रानियां हैं। जितनी मेहनत ये सब सुर्खियां बनाने के लिए करती हैं, उससे आधी मेहनत भी इनकी परदे पर इनके अभिनय में नहीं दिखती। उनसे अच्छा काम तो फिल्म ‘वेल्ले’ मे रिया का किरदार कर रही अन्या सिंह ने कर दिखाया है। अभय देओल फिल्म में बस नाम के लिए हैं। करन देओल के लिए ये फिल्म एक और ड्राई रन जैसा मामला है। सावंत सिंह और विशेष तिवारी उनसे ज्यादा असरदार रहे हैं।
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करन देओल - फोटो : Social Media
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कहानी और स्क्रिप्ट तो है ही, देवेन मुंजाल का निर्देशन भी फिल्म को कुछ खास मदद नहीं करता। फिल्म एक बहुत ही साधारण सी फिल्म है जो दूरदर्शन के जमाने में खाली बैठे लोगों के टाइमपास करने के लिए तो ठीक हो सकती है लेकिन ओमिक्रॉन के दौर में सिनेमाघरों में जाकर इसे देखने के लिए कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने से भी बड़ी हिम्मत चाहिए। फिल्म का संगीत थोड़ा बहुत टाइम पास कराने की कोशिश करता है, लेकिन मामला म्यूजिकल हो नहीं पाता।
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