अगस्त्य, सुहाना और खुशी...
लेकिन, फिल्म ‘द आर्चीज’ देखने के लिए इसकी कहानी के लिए भला कौन दो घंटे बैठने वाला है। ये फिल्म देखी जा रही है तो इसके तीन मुख्य कलाकारों अगस्त्य नंदा, सुहाना खान और खुशी कपूर को लेकर। आर्चीज, वेरोनिका और बेट्टी के किरदार इसी क्रम में किए हैं इन तीनों ने। इस फिल्म के रिव्यू भी लोग फिल्म कैसी है ये जानने के लिए कम पढ़ेंगे, सबकी तलाश इस बात की रहेगी कि आखिर इन तीनों की अदाकारी को फिल्म में कितने नंबर मिलेंगे? तो रिजल्ट ये है कि ये तीनों अच्छे नंबरों से पास हैं। तीनों ने काफी तैयारी के साथ कैमरे के सामने कदम रखा है। अगस्त्य नंदा अपने मामा अभिषेक से बेहतर डेब्यू फिल्म पाने में सौभाग्यशाली रहे हैं। उनकी संवाद बोलने, चलने फिरने, कंधे सीधे रखने और नाचने-गाने की तैयारी भी बढ़िया है। रुआब उनके चेहरे पर थोड़ा कम है लेकिन ध्यान यहां ये रखना है उनका सरनेम बच्चन नहीं है। सुहाना खान भी किसी शैतान और शरारती बच्ची की तरह पूरी तैयार होकर आई हैं। किरदार उनका लंदन रिटर्न का है तो अगस्त्य के साथ ‘फ्रेंच किस’ भी कहानी के हिसाब से ‘ओके’ है। खुशी कपूर शुरू से ही पूरे जोश में दिखती हैं। अमेरिकी फिल्मों की तरह बोलते बोलते गाने लगती हैं और गाते गाते गुमसुम हो जाती हैं।
एक और रिवरडेल की कहानी
नेटफ्लिक्स पर सात सीजन तक चली वेब सीरीज ‘रिवरडेल’ पहले से है। उसका आखिरी सीजन अभी बस कुछ महीने पहले ही रिलीज हुआ। और, साल खत्म होने से पहले नेटफ्लिक्स के एक और रिवरडेल की हिंदुस्तानी कहानी दर्शकों के बीच है। आर्चीज कॉमिक्स के सात मुख्य किरदार इस फिल्म में हैं। साथ में और भी कई अच्छे-बुरे किरदार हैं। कहानी अगस्त्य नंदा की आवाज से शुरू होती है और सातों के कहीं ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ की तरह की किसी ट्रिप पर निकल जाने के आभास पर खत्म होती है। बहुत साधारण सी कहानी है। लेकिन, इस कहानी में जो सबसे अच्छी बात है वह ये है इसका स्कूल बेहतरीन है। देश को ऐसे स्कूलों की बहुत सख्त जरूरत है जहां शहर के सबसे अमीर शख्स की बेटी और रेस्तरां में नौकरी करके अपना खर्च निकालने वाला एक किशोर एक साथ पढ़ सकें और एक दूसरे से दोस्ती भी कर सकें। यही तो आदर्श समाज है।
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ये इश्क, इश्क है, इश्क इश्क
एक अखबार भी इस कस्बे में निकलता है जिसे रेजी के पिता निकालते हैं और हमेशा रेजी के चुटकुलों पर तंज कसते रहते हैं। हालात तब बदलते हैं जब रेजी सिटी काउंसिल के अध्यक्ष का इंटरव्यू लाकर अपने पिता के सामने रखता है और वादे के बावजूद ये स्टोरी अगले अंक में छपती नहीं है। याद रहे ये सन 1964 का भारत है। बच्चे सारे 17 साल के आसपास के हैं। सबके अपने अपने घरेलू किस्से हैं। आर्ची को लंदन पढ़ने जाना है तो लंदन से लौटी वेरोनिका को अपने पापा से बात करने के लिए भी उनके पीए से टाइम लेना पड़ता है। बेट्टी और वेरोनिका दोनों पर आर्ची फिदा है लेकिन प्यार किससे करता है, खुद उसे नहीं मालूम। ‘जो जीता वही सिकंदर’ से लेकर ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ तक सबने तो आर्चीज को ही घिसा है तो जब सीधे आर्चीज पर ही फिल्म बनकर आई है तो उसमें ये सब किसी को चौंकाने वाला सा लगता नहीं है।
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वेदांग रैना रहे अदाकारी में नंबर वन
फिल्म ‘द आर्चीज’ की बस दो ही कमजोर कड़ियां हैं और वे हैं इसकी कहानी और इसका निर्देशन। अभिनय फिल्म के मुख्य कलाकारों से लेकर सहायक कलाकारों तक सबने दमदार किया है। मिहिर आहूजा भी जगहेड के किरदार में मौका पाने पर अपना माद्दा दिखाने में सफल हैं तो डिल्टन डोएली का एक खास अंदाज में थेंकयो बोलना फिल्म की पंचलाइन बनती जाती है। अदिति सहगल ने एथेल का किरदार किया है और डॉट के नाम से फिल्म के गाने भी रचे हैं। बाकी कलाकारों में अली खान को सुहाना खान के पिता के किरदार में देखकर एक बार तो अनिल कपूर को भी ‘कॉम्प्लेक्स’ हो सकता है कि ये नया कंपटीशन कहां से आ गया। लेकिन, फिल्म की असल खोज हैं अभिनेता वेदांग रैना। रेजी के किरदार में वेदांग ने असल हीरो होने का माद्दा फिल्म मे दिखाया है। कहानी का असली कैटलिस्ट भी यही किरदार है। बताते ये भी हैं कि इस फिल्म की रिलीज से पहले ही उनके काम की तारीफें बाहर आती रही हैं और इसीलिए वह आलिया भट्ट के साथ उनकी अगली फिल्म ‘जिगरा’ की शूटिंग भी शुरू कर चुके हैं।
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‘गली बॉय’ वाली जोया की फिल्म नहीं
फिल्म तकनीकी रूप से बहुत अच्छी बन पड़ी है। ऊटी के नयनाभिराम प्राकृतिक दृश्य को निकोल ने बेहद खूबसूरती से परदे पर उतारा है। शंकर, एहसान, लॉय का रचा फिल्म का बैकग्राउंड संगीत फिल्म की आत्मा को मजबूती देता है। कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन और आर्ट डायरेक्शन सब बढ़िया है। गाने कुछ अंग्रेजी में हैं कुछ हिंदी में हैं और सबसे अच्छा गाना है फिल्म का, ‘सुनो’। वीकएंड की छुट्टियों में जब कुछ न करने को हो तो एक पैकेट पॉपकॉर्न का माइक्रोवेव में भूनकर रजाई में दुबके हुए हैपी हैपी मूड बनाने के लिए फिल्म ‘द आर्चीज’ वन टाइम वॉच है। सुहाना, खुशी और अगस्त्य के लिए फिल्म देखनी है तो तीनों अपना अपना काम अच्छे से कर गए हैं। लेकिन, अगर तमन्ना फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ और ‘गली बॉय’ वाली जोया अख्तर की वैसी ही भीतर तक कचोटने वाली फिल्म देखने की हो, तो इसे अपने रिस्क पर ही देखिएगा।