फिल्म 'तेरा क्या होगा लवली' की कहानी लवली की है। सांवलापन उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा अभिशाप है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे किसी लड़की की शादी होने में सबसे ज्यादा अहम किरदार उसका रंग व दहेज निभाता है। लवली को जब एक लड़का उसके सांवले रंग की वजह से अस्वीकार कर लेता है, तो लड़की के पिता दोगुने दहेज पर लवली का रिश्ता कहीं और तय कर देते हैं, लेकिन दहेज का सामान चोरी होने पर समस्याएं पैदा होती है। चोरों को पकड़ने के चक्कर में एक पुलिस अधिकारी कैसे लवली के करीब आता है और उसके बाद क्या क्या होता है, इसी लीक पर फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है।
फिल्म 'सांड की आंख' और 'मुबारकां' जैसी फिल्मों के लेखक बलविंदर सिंह जंजुआ ने इस फिल्म का निर्देशन भी किया है और रूपिंदर चहल व अनिल रोधन के साथ मिलकर फिल्म की कहानी भी लिखी हैं। फिल्म का विषय उन्होंने बहुत ही अच्छा चुना है, लेकिन निर्देशक के रूप में वह बिल्कुल खरे नहीं उतरे। हमारे समाज में दहेज और लड़कियों का सांवला होना सबसे बहुत बड़ा अभिशाप है। इस समस्या से से बहुत सारी लड़कियां जूझ रही हैं। दहेज और रंग के भेद भाव जैसे जटिल मुद्दे को निर्देशक ने बहुत ही हल्के अंदाज में पेश कर दिया है। फिल्म जैसे-जैसे हास्य की तरफ बढ़ती हैं, कहानी की मूल आत्मा खत्म हो जाती है।
फिल्म ‘तेरा क्या होगा लवली’ की सबसे कमजोर कड़ी फिल्म की मुख्य नायिका इलियाना डिक्रूज हैं। मां बनने की खबर आने के बाद वह पहली बार इस फिल्म के जरिए दर्शकों के बीच नजर आई हैं, लेकिन इससे पहले फिल्मों के चयन को लेकर उनकी जो सोच रही है, उसके मुताबिक यह फिल्म उनके व्यक्तित्व से बिल्कुल भी मेल नहीं खाती है। एक कलाकार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वह अपने लिए ऐसी फिल्में और किरदार का चयन करे, जिसे वह पूरी तरह से न्याय कर सके। बलविंदर सिंह जंजुआ की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी बनती थी कि लवली के किरदार के लिए सही अभिनेत्री का का चयन करते। इस किरदार के लिए अगर वास्तविक जीवन की किसी सांवली हीरोइन का चयन किया जाता तो बात ही कुछ और होती।
बतौर निर्माता व निर्देशक अपनी पहली फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' की रिलीज से पहले अभिनेता रणदीप हुड्डा की यह फिल्म सोनी पिक्चर्स ने जानबूझकर रिलीज की है। कंपनी को अंदाजा रहा होगा कि रणदीप हुड्डा को लेकर बनी हाइप से ‘तेरा क्या होगा लवली’ को भी फायदा होगा लेकिन बात नहीं। रणदीप खुद हरियाणा से हैं और फिल्म में हरियाणवी बोलने का लहजा उनका बहुत सही है, लेकिन जिस तेवर और कलेवर के वह अभिनेता हैं, वैसी परफॉर्मेंस उनसे फिल्म के निर्देशक नहीं निकलवा पाए हैं।