फिल्म 'तौबा तेरा जलवा' की कहानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक दबंग रियल एस्टेट व्यवसायी रोमी त्यागी के इर्द गिर्द घूमती है। रोमी त्यागी का रुआब ऐसा कि पुलिस महकमे से लेकर राजनीति में भी उनकी दबंगई का सिक्का चलता है। और, राजनीतिक पार्टियां चाहती हैं कि रोमी त्यागी उनकी पार्टी से चुनाव लड़े। रोमी त्यागी की पत्नी रिंकू कुमार पूरी तरह से पतिभक्त हैं। इनके वैवाहिक जीवन में तूफान तब आया है जब रोमी त्यागी के घर में प्रोफेसर सैय्यद और लैला खान की एंट्री होती है। कहने को तो प्रोफेसर सैयद और लैला खान पति पत्नी है, लेकिन फिल्म में दोनों अजनबी की तरह दिखते हैं। यहीं पर दर्शकों को यह बात समझ में जाती है कि प्रोफेसर सैयद और लैला खान, रोमी त्यागी के खिलाफ कोई बड़ी साजिश कर रहे हैं। औऱ, होता भी कुछ कुछ ऐसा ही है।
फिल्म के लेखक-निर्देशक ने कहानी का आधार जरूर संस्कृत के श्लोक 'त्रिया चरित्रम् पुरुषस्य भाग्यम देवो न जानम कुतो मनुष्य:' को बनाया जरूर है, लेकिन कहानी में इतनी सारी घटनाओं का कॉकटेल है कि कहानी मूल कथानक से शुरू से लेकर अंत तक भटकती रहती है। प्रोफेसर सैयद बार संस्कृत के इस श्लोक को फिल्म में दोहराते रहते हैं, इसलिए फिल्म 'तौबा तेरा जलवा' की कहानी आगे चलकर क्या मोड़ लेने वाली है, पहले से समझ में आती रहती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, रियल एस्टेट में चल रही गला काट प्रतिस्पर्धा से लेकर फिल्म की कहानी समलैंगिक संबंधों पर आकर खत्म हो जाती है। फिल्म के अंतिम पांच मिनट को छोड़ दे, तो पूरी फिल्म असरहीन दिखती है।
आकाशादित्य की लिखी फिल्म 'तौबा तेरा जलवा' की कहानी, पटकथा तो कमजोर है ही, उनका निर्देशन भी फिल्म को कोई सही दिशा नहीं दे पाता है। ड्रेस कंटीन्यूटी में भी जबरदस्त झोल हैं। फिल्म का हीरो जब जेल में जाता है तो वह अपने हीरो वाले ही ड्रेस रहता है और हर सीन में उसकी ड्रेस बदल भी जाती हैं और जेल किसी एंगल से भी जेल नहीं लगता। जेल में रोमी त्यागी, जेलर से इस तरह से पेश आता जैसे वह किसी मामूली से कांस्टेबल पर अपना रौब झाड़ रहा हो। कोर्ट में पेशी के दौरान रोमी त्यागी को पुलिस इंस्पेकर भागने में क्यों मदद करता है, यह बात भी स्पष्ट नहीं होती। भागते वक्त पुलिस उससे 10 कदम की ही दूरी पर पीछा करती है और उसे पकड़ नहीं पाती। फिल्म में ऐसे बहुत सारे दृश्य है, जो दर्शक की बुद्धिमत्ता का इम्तिहान लेते रहते हैं।
फिल्म 'तौबा तेरा जलवा' देखकर लगता है कि अमीषा पटेल ने इस फिल्म की शूटिंग तब की होगी, जब फिल्म 'गदर 2' की रिलीज की दूर दूर तक कोई चर्चा नहीं थी। अगर इस फिल्म का ऑफर उन्हें 'गदर 2' के बाद आया होता तो शायद वह ये फिल्म नहीं करती। एक कलाकार की प्रतिभा का सही आकलन तब होता है जब वह अच्छे निर्देशक के साथ काम करता है। फिल्म में उन्होंने लैला खान का किरदार निभाया है। लेकिन वह अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह से न्याय नहीं कर पाई। रोमी त्यागी की भूमिका जतिन खुराना ने निभाई है। संवादों की की गहराई और सीन की सिचुएशन वह समझ ही नहीं पाए। रिंकू कुमारी की भूमिका में एंजेला क्रिस्लिनजकी का काम सराहनीय रहा। प्रोफेसर सैयद की भूमिका में राजेश शर्मा ने वैसा ही अभिनय कर दिया है, जैसा वह हर फिल्मों में करते आए हैं। हां, जेलर की भूमिका में अनिल रस्तोगी ने अपना अच्छा प्रभाव छोड़ा है, भले ही इनकी भूमिका छोटी है, लेकिन जब वह स्क्रीन पर नजर आते है, तो वह सीन पूरी तरह से उनका ही लगता है। पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में नीरज सूद ने भी अपनी तरफ से पूरी मेहनत करने की कोशिश की है। एक औसत से कमतर फिल्म की सिनेमाटोग्राफी, संकलन, संगीत और बैकग्राउंड स्कोर भी औसत से नीचे ही है।