‘क्यूबिकल्स सीजन 3’: एक कंफर्ट सीरीज
क्यूबिकल यानी नए जमाने के दफ्तरों में काम करने वालों के लिए बने छोटे छोटे दड़बे जैसी जगहें। इन दड़बों में काम करने वालों की ये कहानी दो सीजन में अपने रंग पहले ही जमा चुकी है। पीयूष अब तक खुद को कॉरपोरेट जगत में फिट करने और एक कर्मचारी के रूप में आई मुश्किलों से निपटने के प्रयास में है। इस सीजन में पीयूष प्रजापति की अपने साथियों के साथ हुई जद्दोजहद को दर्शाया गया है। मोटिवेशनल किताबों और पॉडकास्ट से प्रेरणा लेकर एक कामयाब टीम लीडर बनने की ये कोशिशें दर्शकों में सकारात्मकता जगाती है। ये एक ऐसी दुनिया की कहानी जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं हालांकि जाना अधिकतर ऐसी ही किसी दुनिया में चाहते हैं। पीयूष की मुश्किलें हर संघर्षशील इंसान की मुश्किलें हैं और यही वह सबसे बड़ी वजह है जो दर्शकों को इस सीरीज से जोड़े रखती है।
खुद को खोजने की कहानी
पीयूष के कॉरपोरेट संघर्ष की इस कहानी में निर्देशक दिव्यांशु मल्होत्रा ने सीरीज के लेखकों के साथ मिलकर कहानी का ताना बाना ऐसा गढ़ा है कि यूं लगता है कि सारे किरदार कुछ देखे देखे से हैं। हर सीन में किसी ना किसी लेखक का संदर्भ दिलचस्पी जाता है। खुद को बदल कर और सफलता के लिए साम, दाम, दण्ड, भेद, हर तरीका आजमाने के साथ साथ काम में निपुणता हासिल करना और खुद को बेहतर साबित करने का जो 21वीं सदी का संघर्ष है, वह भावनाएं जगाता है। निर्देशन और लेखन टीम की जीत इसमें भी है कि ये सीरीज बहुत ज्ञान देने की बजाय जो कुछ भी कहना चाहती है, उसके लिए बहुत सहज तरीके से दृश्यावलियों पिरोती चलती है।
चौहान का फिर हुआ अभिषेक
‘क्यूबिकल्स सीजन 3’ में पीयूष का किरदार निभा रहे अभिनेता अभिषेक चौहान की अभिनय कुशलता यही है कि वे दर्शकों को इस किरदार की समस्याओं से सीधे और पहले एपिसोड से ही जोड़ लेते हैं। एक मुश्किल हल होती है और दस नई उसके सामने मुंह फाड़े खड़ी मिलती है। अंतर्मन में चल रहा संवाद एक कॉरपोरेट सेटअप में पनपते मानसिक तनाव को बखूबी दिखाता है। गौतम बत्रा के किरदार में अभिनेता बद्री चव्हाण का काम भी प्रभावी है। तनावपूर्ण स्थिति में ये एक ऐसा किरदार है जिसे देख-सुन कर थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन मुस्कुराहट तो आती है। सुनैना चौहान के रोल में आयुषी गुप्ता पूरी तरीके से एक कॉरपोरेट वुमन नजर आ रही हैं। निकेतन शर्मा ने नवीन शेट्टी के किरदार को बखूबी निभाया है। केतकी कुलकर्णी, शिवांकित परिहार और खुशबू बैद के सीन गुदगुदाते हैं।
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