एक्टिंग
2013 में रिलीज हुई ‘मैन ऑफ स्टील’ और 2016 में आई ‘बैटमैन वर्सेज सुपरमैन’ में सुपरमैन की भूमिका हेनरी केविल ने निभाई थी। इस बार सुपरमैन के काॅस्ट्यूम में नजर आए हैं अमेरिकन एक्टर डेविड कोरेन्सवेट। उनका लुक ठीक-ठाक है। आप यकीन करते हैं कि वो सुपरमैन हैं पर जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है आपको अपने सुपरहीरो को बार-बार हारते और पिटता देख खीझ आने लगती है। सुपरमैन की गर्लफ्रेंड लुईस के रोल में राचेल ब्रोसनाहन का काम अच्छा है। डेविड के साथ उनकी जोड़ी जमती है।
विलेन के तौर पर यहां आप निकोलस हॉल्ट को बाल्ड लुक में देखेंगे। ये वो ही हैं जो ‘एक्स मैन’ सीरीज में हैंक्स/बीस्ट के रोल में नजर आते हैं। उनका काम तो ठीक है पर उनका किरदार ठीक से गढ़ा नहीं गया। पूरी फिल्म में अगर किसी ने बेहतरीन एक्टिंग की है तो वो है सुपरमैन का सुपरडॉग क्रिप्टो। यह किरदार पूरी तरह से विजुअली तैयार किया गया है पर यही पूरी फिल्म में अपनी हरकतों से आपके चेहरे पर मुस्कान लेकर आएगा। बाकी सभी साथी कलाकाराें ने अपना काम ठीक-ठाक किया है।
डायरेक्शन
काफी हैरानी होती है यह देखकर कि जेम्स गन वही डायरेक्टर हैं जो इससे पहले ‘गार्डियंस ऑफ गैलेक्सी’ समेत मार्वल की ‘थॉर’ और ‘स्पाइडर मैन: हाेमकमिंग’ जैसी फिल्मों से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने यहां जो सबसे बड़ी गलती की है वो ये है कि वो तय ही नहीं कर पाए कि यह फिल्म वो बच्चों के लिए बना रहे हैं या बड़ों के लिए। फिल्म का प्लॉट और कई कैरेक्टर्स बच्चों की फिल्मों जैसे लगते हैं।
वहीं एक प्लाॅट राजनीतिक षड्यंत्र का है जो बड़ों के हिसाब से है। इसके अलावा फिल्म की कहानी बेहद सीधी है, इसमें एक सीन छोड़कर कोई ऐसा सीन नहीं है जो आपमें जोश भरता है। यकीन मानिए इससे ज्यादा जोश इंडियन ऑडियंस में बाहुबली, रॉकी और पुष्पा जैसे किरदाराें को देखकर भर जाता है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी उतना यादगार नहीं है। वैसे हॉलीवुड की कोई भी फिल्म हो VFX आपको निराश नहीं करते। वैसा ही इस फिल्म में भी है।