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Spider Man No Way Home Review: पहचाने रास्तों पर लौटे स्पाइडरमैन ने फिर जमाया जलवा, बसने लगी एमसीयू की नई दुनिया

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Spider Man No Way Home Review - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
स्पाइडरमैन: नो वे होम
कलाकार
टॉम हॉलैंड , जेंडाया , बेनेडिक्ट कम्बरबैच , जैकब बटालोन और अल्फ्रेड मोलिना
लेखक
क्रिस मैककेना और एरिक सोमर्स
निर्देशक
जॉन वाट्स
निर्माता
केविन फाइगी और एमी पास्कल
थिएटर
16 दिसंबर 2021
रेटिंग
4/5

सिनेमा अब एक उत्सव है। इससे कम पर इसका जादू काम नहीं करेगा। सिनेमा को उत्सव में तब्दील करने का करिश्मा हॉलीवुड ने बीते एक दशक में बखूबी कर दिखाया है। लार्जर दैन लाइफ फिल्में बनाने का वहां दशकों से चला आ रहा शगल अब पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है। ये फिल्में रिलीज होने से पहले ही माहौल बनाती हैं और इस माहौल में फिल्म देखना सिनेमा के हर शौकीन की जरूरत सी बन जाता है। शर्त यही है कि ये जादू ऐसा होना चाहिए जो तीन पीढ़ियों पर एक साथ असर करे। दूरदर्शन पर स्पाइडरमैन देखने वाले और अब पचास के ऊपर या इसके करीब के दर्शकों ने अपने बच्चों को सिनेमाघरों में ले जाकर स्पाइडरमैन दिखाई। ये बच्चे अब घर के कमाऊ पूत बन चुके हैं और अपने बच्चों को थ्रीडी वाला स्पाइडरमैन दिखाने ले जा रहे हैं। मार्वेल की नई फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ इन तीनों पीढ़ियों को एक साथ साधती है और अपना करिश्मा दिखाने में कामयाब रहती है। बड़े परदे के इस हफ्ते के उत्सव में अतीत की तमाम यादें फिर से लौट आई हैं। खलनायक आ गए हैं, लेकिन क्या पुराने नायक यानी पुराने स्पाइडरमैन भी फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ में लौट रहे हैं, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। और, यकीन मानिए आप निराश नहीं होंगे।

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Spider Man No Way Home Review - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ की कहानी वहीं से खुलनी शुरू होती है, जहां ये तीन साल पहले फिल्म ‘स्पाइडरमैन: फार फ्रॉम होम’ में आकर रुकी थी यानी कि पीटर पार्कर ही स्पाइडरमैन है, ये अब सबको पता है। पीटर पार्कर की दुनिया अब पहले जैसी नहीं रही। उसका दोस्त नेड और करीबी दोस्त एमजे उसके करीब तो हैं लेकिन पीटर को लगता है कि वह खुद अपने आप से दूर हो गया है। वह अपने परिचित एवेंजर डॉक्टर स्ट्रेंज से मिलता है और सब कुछ पहले जैसा कर देने की गुजारिश करता है। इच्छाएं इतिहास बदल देती हैं। यहां भी कुछ ऐसा ही होता है। मंत्रों की शक्तियां सिर्फ क्षैतिज दिशा में काम नहीं करतीं। वह ब्रह्मांड के गोलाकार में फैलती हैं और वे सब वापस लौटना शुरू हो जाते हैं जो ये जानते हैं कि पीटर पार्कर ही स्पाइडरमैन है। और, इसी के चलते लौट आते हैं वे सारे खतरनाक विलेन जिन्हें सैम रैमी ने स्पाइडरमैन का जीवन मुश्किल करने के लिए रचा था।

Spider Man No Way Home Review - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
टॉम हॉलैंड से पहले स्पाइडरमैन का चोला परदे पर पहनने वाले टोबी मैग्वायर और एंड्र्यू गारफील्ड के दौर की फिल्मों ‘स्पाइडरमैन’, ‘स्पाइडमैन 2’, ‘स्पाइडरमैन 3’, ‘द अमेजिंग स्पाइडरमैन’ और ‘द अमेजिंग स्पाइडरमैन 2’ तक की कड़ियां फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ से जोड़ने में इसके निर्देशक जॉन वाट्स पूरी तरह सफल रहे हैं। और, ये करिश्मा ऐसा है कि सुबह 6 बजे इस फिल्म को देखने अपने अपने घरों से सिनेमाघरों तक पहुंचे दर्शक खुद को धन्य मानते हैं। सिनेमा ऐसा ही कौतूहल मांगता है जिसके जानने समझने के लिए दर्शक बेचैन हो जाए। दो हजार रुपये की टिकट और सुबह 6 बजे के शोज, हिंदी सिनेमा के लिए अब भी दूर की कौड़ी है। यहां अब भी निर्माता को बस एक अदद सुपरस्टार की हां की जरूरत है अपनी तिजोरी खोलने के लिए। कहानी पर उसका एतबार नहीं है। लेकिन, फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ जैसी फिल्में ये ढर्रा बदलने वाली हैं। ‘सत्यमेव जयते 2’ और ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ जैसी फिल्मों से हाथ जलाए बैठे निर्माता आने वाले महीनों में अपनी चाल बदलने वाले हैं।

Spider Man No Way Home Review - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
खैर, फिलहाल बात करते हैं फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ की। बीती स्पाइडरमैन फिल्मों के खलनायकों को फिर से परदे पर नई तकनीक के साथ देखना विस्मयकारी है। ये यादों को कारोबार में बदलने का मार्वेल का नया मंत्र भी है। और, इसमें फिल्म को सबसे ज्यादा मदद मिलती है इसके स्पेशल इफेक्ट्स और संगीत से। मॉरो की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की जान है। उनका कैमरा इतनी सहजता से धरती, आकाश और पाताल में घूमता है कि दर्शक को कहानी से अपना संबंध बनाते देर नहीं लगती है। जैफ्री फोर्ड ने फिल्म का संपादन भी खासा चुस्त रखा है। लेकिन, फिल्म की असल जान है माइकल जियाक्चिनो का संगीत। सिनेमाघरों में लाइव ऑर्केस्ट्रा जैसी अनुभूति देने वाला माइकल का ये संगीत फिल्म के भावों के आरोह और अवरोह में बहुत सही साझीदार बनकर सामने आता है।

Spider Man No Way Home Review - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ तकनीकी रूप से तो बेहद शानदार फिल्म है ही, इसमें टॉम हॉलैंड भी अपने करियर के उत्कर्ष पर नजर आते हैं। वह समय के साथ अपने भावों को बेहतर तरीके से प्रकट करने के मास्टर होते जा रहे हैं। एमजे के रोल में जेंडाया के साथ उनकी परदे पर जोड़ी सिनेमा के बीते दशक की बेहतरीन जोड़ियों में शुमार है। दोस्ती का नया दम ये फिल्म नेड के जरिये दिखाती है। प्रेम, त्याग, मित्रता, आकांक्षाएं, इच्छाएं सब यहां उफान पर हैं। लेकिन, इन सारे भावों को एक धागे में पिरोने वाली सबसे बड़ी बात है अपनी जिम्मेदारी को समझना। भारतीय समाज के अधिकतर विभागों और वर्गों में ये भावना तेजी से गायब होती दिख रही है और तभी ऐसी कोई बात जब तार्किक तरीके से बड़े परदे पर दिखती है तो लोग वाह वाह कर उठते हैं।
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Spider Man No Way Home Review - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ जैसी फिल्में बताती हैं कि सिनेमा के दर्शक ही चाहें तो नया निर्माण कर सकते हैं। दिक्कत बस ये है कि सुबह 6 बजे सिनेमाघरों के बाहर लाइन लगाने वाले दर्शकों में से अधिकतर स्पाइडरमैन जैसी जिम्मेदारी कम ही समझते हैं। दुनिया बदलने के लिए जुमलों का सहारा लेने वाले डॉक्टर स्ट्रेंज का सच के साथ रहने वाले स्पाइडरमैन से सामना ही फिल्म की कामयाबी का असली मंत्र है। यही समय का बदलाव है और यही आने वाले कल का संकेत भी। फिल्म के क्लाइमेक्स के अलावा एंड क्रेडिट और पोस्ट क्रेडिट दृश्यों में मार्वेल के प्रशंसकों के लिए मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स की नई कहानियों के दिलचस्प संकेत हैं। और, ये फिल्म देखने का मजा भी आखिर में दूना कर देते हैं।

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