पूरे गाने में कहीं सर्कस का कोई जानवर नहीं है जबकि तबतक मेनका गांधी की सियासत में एंट्री नहीं हुई थी और न ही जानवरों से काम कराने पर सिनेमा से लेकर सर्कस तक कोई पाबंदी लगी थी और, तब सर्कसों में डांस नंबर भी नहीं हुआ करते थे। दिशा पटानी ने जैसे कपड़े पहने हैं, वैसे कपड़े तो तब हिंदी सिनेमा की वैंप्स भी नहीं पहनती थीं। मेरा नाम जोकर इससे छह साल बाद रिलीज हुई और उसी से सर्कस का थोड़ा बहुत ज्ञान अगर सलमान की ये फिल्म बनाने वाले ले लेते तो मामला इतना नकली नहीं लगता।
गीतकार इरशाद कामिल की गिनती हिंदी सिनेमा के अच्छे गीतकारों में होती रही है। उनके गानों का जब वी मेट फिल्म देखते देखते जवां हुई पीढ़ी को फिल्म तमाशा तक इंतजार रहा है, लेकिन स्लो मोशन? ये कुमार जैसी गीतकारों से कंपटीशन करने की उन्हें क्यों सूझी ये तो वह ही जानें, लेकिन ऐसे गानों के साथ इरशाद कामिल का नाम देख निराशा होती है।
फिल्म भारत के गाने स्लो मोशन के साथ कलाकारों के तौर पर विशाल, शेखर, नकश अजीज और श्रेया घोषाल के नाम हैं और संगीतकार का नाम है ही नहीं, बस म्यूजिक अरेंजर और निर्माता के तौर पर मेघदीप बोस का नाम है। सलमान खान कभी अपनी फिल्मों पर खुद जमकर मेहनत किया करते थे लेकिन एक पीरियड फिल्म के लिए किसी खास कालखंड का इतना बेतुका गाना उनकी फिल्म में भी देखने को मिलेगा, उनके पक्के प्रशंसकों को भी यकीन नहीं हो रहा।
यहां सुने गाना