Ranabaali Movie Review in Hindi: विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना करियर की फिल्म ‘रणबाली’ रिलीज हो चुकी है। फिल्म में कपल शादी के बाद पहली बार साथ काम करते नजर आ रहा है। जानिए कैसी है इसकी कहानी?
विजय देवरकोंडा की फिल्मोग्राफी में एक और ऐसी फिल्म जुड़ गई है, जिससे उम्मीदें तो काफी थीं, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकल पाया। निर्देशक राहुल सांकृत्यान की फिल्म ‘रणबाली’ इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय, अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार और अपने लोगों के लिए लड़ने वाले एक योद्धा की कहानी लेकर आई है।
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फिल्म का विषय दमदार है, इसका कैनवास भी बड़ा है और कलाकारों ने मेहनत भी की है। इसके बावजूद कमजोर पटकथा, दोहराव भरे दृश्य और किरदारों की अधूरी पड़ताल फिल्म के प्रभाव को कम कर देती है।
‘रणबाली’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि जिस कहानी में दर्शकों के भीतर गुस्सा, पीड़ा और विद्रोह पैदा करने की क्षमता है, वह कई मौकों पर उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ने में नाकाम रहती है। कई सीन ओवर ड्रामेटिक हो जाते हैं और दर्शक इतना दुख बर्दाश्त नहीं कर पाते।
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रणबाली मूवी रिव्यू
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
फिल्म की कहानी 1876 से 1878 के बीच मद्रास में पड़े भीषण अकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। उस दौर में ब्रिटिश शासन की नीतियों और अनाज के निर्यात ने आम लोगों की मुश्किलों को और बढ़ाया था। भूख, शोषण और अंग्रेजों के अत्याचार से जूझते लोगों के बीच रणबाली (विजय देवरकोंडा) नाम का एक योद्धा उभरता है, जो अपनी जमीन और अपने लोगों की रक्षा के लिए सत्ता से टकराने का फैसला करता है।
वहीं, ब्रिटिश अधिकारी सर थियोडोर हेक्टर (अर्नाेल्ड वोस्लू) रणबाली के इस संघर्ष का प्रमुख विरोधी है। वह क्रूर है और जिद्दी भी।
कहानी में रणबाली की निजी जिंदगी और भावनात्मक पक्ष भी जोड़ा गया है, जहां सबसे अहम किरदार जयम्मा (रश्मिका मंदाना) का है। कुल मिलकार फिल्म इतिहास, लोककथाओं, प्रेम और विद्रोह को एक साथ पिरोने की कोशिश करती है। एक हद तक यह सब सही भी लगता है पर कई पहलुओं को जोड़ने के चक्कर में कहानी की रफ्तार बहुत धीमी हो जाती है और अति भावनात्मक जगाने के चक्कर में यह अपनी गहराई भी खो देती है।
रणबाली मूवी रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
अभिनय
विजय देवरकोंडा ने रणबाली के किरदार के लिए अपने लुक, हाव-भाव और संवाद अदायगी पर मेहनत की है। उनका प्रयास पर्दे पर दिखाई भी देता है। कुछ एक्शन और भावनात्मक दृश्यों में वह प्रभाव छोड़ते हैं। हालांकि, किरदार की लिखावट कमजोर होने के कारण उनका अभिनय हर बार अपेक्षित असर पैदा नहीं कर पाता।
रश्मिका मंदाना फिल्म के मजबूत पक्षों में शामिल हैं। जयम्मा के रूप में वह अपने किरदार में सहजता और गर्माहट लेकर आती हैं। विजय देवरकोंडा के साथ उनकी केमिस्ट्री अच्छी लगती है और जहां फिल्म अंग्रेजों के अत्याचार और विद्रोह के दृश्यों में लगातार गंभीर बनी रहती है, वहीं दोनों कलाकारों के बीच के निजी पल कुछ राहत देते हैं। रश्मिका ने भी कोशिश तो भरपूर की है पर पटकथा ने उन्हें भी उतनी गुंजाइश नहीं दी कि उनका किरदार कहानी में निर्णायक प्रभाव छोड़ सके।
अर्नोल्ड वोस्लू ब्रिटिश अधिकारी के रूप में प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उनका व्यक्तित्व विरोधी किरदार के अनुकूल है, लेकिन पटकथा उनके चरित्र को केवल खतरनाक दिखाने से आगे नहीं ले जा पाती। ईश्वरी राव और अन्य सहायक कलाकार भी अपनी भूमिकाओं में ठीक हैं, मगर उनके किरदारों को पर्याप्त विस्तार नहीं मिलता।
रणबाली मूवी रिव्यू
- फोटो : X
निर्देशन
राहुल सांकृत्यान का निर्देशन फिल्म के पहले भाग में तो पकड़ बनाकर रखता है। शुरुआत में फिल्म अपनी दुनिया और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि स्थापित करने में समय लेती है। शुरुआती हिस्से में कहानी की गति कुछ असहज लगती है, लेकिन जैसे-जैसे ब्रिटिश अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव बढ़ता है, फिल्म में दिलचस्पी पैदा होने लगती है।
अंग्रेजों के गांव में पहुंचने, स्थानीय लोगों पर अत्याचार और इंटरवल से पहले के एक्शन दृश्यों में कहानी का प्रभाव बेहतर नजर आता है। दर्शकों को उम्मीद होने लगती है कि आगे ‘रणबाली’ का संघर्ष और अधिक रोमांचक होगा।
दिक्कत दूसरे हाफ में आती है। कहानी बार-बार शोषण, प्रतिरोध और बदले के उन्हीं बिंदुओं पर लौटती है। कई दृश्य ऐसे लगते हैं, जिन्हें कम समय में ज्यादा प्रभावशाली ढंग से दिखाया जा सकता था।
कुछ मोड़ भी पहले से अनुमानित लगते हैं, जिससे कहानी का रोमांच कम हो जाता है। दूसरे हाफ में कुछ दृश्यों को छोटा किया जाता, तो कहानी का प्रवाह बेहतर हो सकता था। वहीं अजय-अतुल का संगीत फिल्म के मिजाज के अनुरूप है और कुछ गाने ध्यान खींचते हैं।
देखें या नहीं?
‘रणबाली’ एक ऐसे ऐतिहासिक विषय को उठाती है, जिस पर मुख्यधारा की फिल्मों में और विस्तार से काम किया जा सकता है। लेकिन इस विचार को असरदार सिनेमा में बदलने के लिए मजबूत पटकथा, यादगार किरदार और भावनाओं को स्वाभाविक ढंग से उभारने की जरूरत थी।
अगर आप विजय देवरकोंडा के प्रशंसक हैं या ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा देखना पसंद करते हैं, तो फिल्म में आपके लिए कुछ आकर्षक पल हैं। लेकिन अगर आप एक चुस्त कहानी, दमदार भावनात्मक प्रभाव और लगातार रोमांच की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो ‘रणबाली’ आपको निराश कर सकती है।