कहीं पौराणिक तो कहीं वैज्ञानिक है कहानी
कहानी शुरू होती है मोहिनी (यामी गौतम) नाम की लड़की से जो अवस्थी परिवार की बहू बनकर आती है। इस शादी से घर के सभी लोग काफी खुश हैं। मगर यह ‘नई नवेली’ बहू अपने साथ लाई है कई रहस्य जिससे परिवार अंजान है।
मोहिनी के आने के बाद घर में सब कुछ शुभ हो रहा है। मगर कहानी में यू-टर्न तब आता है जब घर में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिसके बाद परिवार के एक सदस्य को मोहिनी की असली पहचान पर शक होने लगता है। इस शक से एक सदियों पुराना राज खुलता है।
यह सब कुछ जाकर जुड़ता है पौराणिक कथाओं और दैवीय शक्तियों से, इसके बाद परिवार के आम से घरेलू झगड़े एक जादुई यात्रा पर निकल जाते हैं।
कैसी थी अभिनय की पहली रसोई
यामी गौतम- फिल्म ‘नई नवेली’ पूरी तरह से यागी के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में मुख्य किरदार मोहिनी बहुत महत्व रखता है। इसे यामी गौतम ने जिस खूबसूरती से निभाया है वह देखने लायक है। जब वह नई दुल्हन बनकर घर में आती हैं तो उनमें नजाकत दिखती है। इसके बाद जब वही बहू घूंघट के आड़ से तीखी नजरें दिखाती है तो अपने आप आपको डरावना अनुभव होता है।
एक दो जगह ओवर ड्रामेटिक सीक्वेंस छोड़ दिया जाए तो यामी ने एक्शन सीन भी ठीक-ठाक दिए गए हैं। मगर अभिनय के साथ दूसरी सबसे बड़ी खूबी है उनकी आवाज। फिल्म में कई जगह डायलॉग को हाई पिच चाहिए था और यामी ने उसी तरीके से यह दर्शकों तक पहुंचाया है।
सपोर्टिंग कास्ट - फिल्म में इस नई नवेली दुल्हन का दूल्हा है ‘राजा’। इस किरदार को आदिनाथ एम कोठारे ने निभाया है। वह इस रोल में काफी फिट नजर आए हैं। बाकी स्टार कास्ट में सुनीता राजवार, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी, अनुराग ठाकुर, प्रतीक पचौरी और सोनल झा के अभिनय ने इस फिल्म को परफेक्ट बनाने में काफी योगदान दिया। इस हॉरर कॉमेडी फिल्म में कॉमेडी वाला हिस्सा सर्पोटिंग कास्ट की वजह से ही मजबूत बन सका।
क्या निर्देशन में भी नंबर वन रही फिल्म?
फिल्म का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। इस फिल्म की पटकथा उन्होंने दिव्या निधि शर्मा और हिमांशु शर्मा के साथ मिलकर लिखी है। यह फिल्म कलाकारों से ज्यादा निर्देशक और लेखकों के लिए काफी मुश्किल लगती है। क्योंकि किसी पौराणिक विषय से संबंधित फिल्म बनाना आजकल निर्देशकों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
इसके बाद भी बालाजी ने जिस तरह से सदियों पुरानी कहानी को सीख की आंच में पकाया है वह तारीफ के काबिल है। आपको कहीं भी यह क्रिंज महसूस नहीं होती। हां कुछ जगहों पर यह लगता है कि कुछ सीन की जरुरत नहीं थी।
‘नई नवेली’ में कहां दिखी खोट?
यामी गौतम अभिनीत यह फिल्म दर्शकों को बांध कर रखती है। मगर कई जगह सब कुछ अच्छा होने के बाद भी चूक लगती है। जिस तरह कोई भी बहू परफेक्ट नहीं होती, कोई फिल्म भी पूरी तरह कभी परफेक्ट नहीं होती। इसी तरह इस फिल्म में भी खामियां हैं। आइए निकालते हैं मेरठ की बहू मोहिनी की बुराईयां...
‘नई नवेली’ की मुंह दिखाई करें या नहीं?
आगामी दिनों में छुट्टियां आ रही हैं, परिवार के साथ मूवी प्लान करने के लिए इससे अच्छा विकल्प नहीं मिल सकता। पूरी फिल्म में ऐसा कोई सीन या डायलॉग नहीं है, जहां बड़ों से नजरें चुरानी पड़ें और बच्चों के कान बंद करने पड़ें। इसके साथ फिल्म में बीच-बीच में कई शिक्षाप्रद बातें बताई गई हैं। इस फिल्म को सिनेमाघर में एक बाद देखना तो बनता ही है।