निर्माता-निर्देशकः संजय पटेल
सितारेः राहुल भट्ट, तिलोत्तमा शोम, जयेश मोरे
रेटिंगः **
'यूनियन लीडर' मजदूर एकता जिंदाबाद जैसा नारा नहीं लगाती, लेकिन जान के खतरे वाले उद्योगों में श्रमिकों की स्थिति और लापरवाह-स्वार्थी-धनलोलुप फैक्ट्री मालिकों की तस्वीर सामने लाती है। लंबे समय से सिनेमा की नजर इधर नहीं गई थी। इस इंडो-कनाडाई प्रोजेक्ट में कुछ बातों को संवेदना से छुआ गया है। श्रमिकों के अधिकारों की बात की गई है। निर्देशक संजय पटेल की यह पहली फिल्म कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में सराही गई।
'यूनियन लीडर' में अहमदाबाद की एक केमिकल फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर क्रोमियम सल्फेट के प्रभाव में अपने फेफड़े गंवा रहे हैं। पांच मजदूर कैंसर के शिकार होकर मौत के मुंह में जा चुके हैं, लेकिन फैक्ट्री मालिक को परवाह नहीं। श्रमिक नेता को मालिक ने अपनी तरफ मिला रखा है। हकीकत समझ आने पर मजदूर नई यूनियन बनाते हैं, जिसकी बागडोर जय (राहुल भट्ट) को दी जाती है। मजदूरों की आवाज बुलंद होते ही मालिक फैक्ट्री बंद करने का फैसला करता है। अब मजदूरों का क्या होगा, क्योंकि जो मिल रहा था, वे उससे भी हाथ धो बैठे हैं!