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Prem Keetanu Movie Review: न रोमांस जमा, न कॉमेडी ने हंसाया; जानिए क्यों निराश करती है वीर पहाड़िया की फिल्म

सार

Prem Keetanu Review: वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ दोस्ती और प्यार के बीच उलझी एक हल्की-फुल्की प्रेम कहानी है। जानें कैसी है फिल्म?
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प्रेम कीटाणु रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
प्रेम कीटाणु
कलाकार
वीर पहाड़िया , आफिया सैयद , अपारशक्ति खुराना , निखिल विजय और राकेश बेदी
लेखक
दीपक किंगरानी और गिरीश ए.डी.
निर्देशक
अपूर्व सिंह कार्की
निर्माता
गौरव वर्मा
रिलीज डेट
2 अक्टूबर 2026
रेटिंग
1.5/5

विस्तार
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‘प्रेम कीटाणु’ में दोस्ती के रास्ते प्यार तक पहुंचने की कोशिश की गई है। फिल्म में आज के युवाओं की अपनी उलझनें हैं, करियर को लेकर परेशानी हैं और रिश्तों को लेकर अलग-अलग सोच भी है। कहानी हल्के-फुल्के अंदाज में आगे बढ़ती है। लेकिन क्या वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की जोड़ी उस प्यार को पर्दे पर महसूस करा पाती है, जिस पर पूरी कहानी टिकी है? पढ़िए फिल्म का रिव्यू...
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प्रेम कीटाणु - फोटो : यूट्यूब
कहानी
फिल्म की शुरुआत सुहानी (आफिया सैयद) के एक मजेदार हादसे से होती है। वह अपने पिता को गले लगाने जाती है, लेकिन गलती से विशाल (वीर पहाड़िया) को गले लगा लेती है। छोटी-सी नोकझोंक के बाद दोनों एक-दूसरे को श्राप देते हैं कि अब चार साल तक सिंगल रहेंगे।

कुछ समय बाद एक शादी में दोनों की फिर मुलाकात होती है। इस बार विशाल को एहसास होता है कि वह सुहानी को पसंद करने लगा है। कहानी में पेच तब आता है, जब सुहानी के ऑफिस में उसके साथ काम करने वाला रंजीत (अपारशक्ति खुराना) भी उसे पसंद करता है।

विशाल की अपनी जिंदगी भी कुछ खास सेट नहीं है। नौकरी की तलाश के बीच वह अमेरिका जाकर आगे पढ़ाई करना चाहता है। इसके लिए उसे पैसे जुटाने हैं। दूसरी तरफ रंजीत की नौकरी अच्छी है और वह सुहानी के सामने ज्यादा व्यवस्थित नजर आता है।

सुहानी ने भी अपने होने वाले पार्टनर को लेकर एक चेकलिस्ट बना रखी है। ऐसे में विशाल, रंजीत और सुहानी के बीच रिश्तों की यह उलझन कहानी को आगे बढ़ाती है। इस सफर में विशाल का दोस्त मगन (निखिल विजय) भी उसके साथ है।

फिल्म 'प्रेम कीटाणु' - फोटो : सोशल मीडिया
अभिनय
वीर पहाड़िया:
फिल्म की सबसे बड़ी दिक्कत वीर हैं। विशाल के किरदार में न प्यार की बेचैनी दिखती है, न कॉमेडी का असर। कई बार लगता है कि विशाल को प्यार हो चुका है, बस वीर के एक्सप्रेशन तक खबर नहीं पहुंची।

वीर 31 साल के हैं और कॉलेज स्टूडेंट बने हैं। उम्र यहां समस्या नहीं है। आमिर खान ने 44 की उम्र में ‘3 इडियट्स’ में कॉलेज स्टूडेंट का किरदार निभाया था। अपने लुक और बॉडी लैंग्वेज से उन्होंने इसे विश्वसनीय बनाया था। वीर यहां वह सहजता नहीं ला पाते। खासकर रोमांटिक और इमोशनल सीन में एक्सप्रेशन कई बार निराश करते हैं।

आफिया सैयद: निर्माता साजिद नाडियाडवाला की भांजी आफिया सैयद इस फिल्म से हिंदी फिल्मों में डेब्यू कर रही हैं। आफिया का काम ठीक-ठाक है। हालांकि, वीर के साथ उनकी केमिस्ट्री भी वह असर नहीं छोड़ती, जिसकी इस प्रेम कहानी को जरूरत थी।

अपारशक्ति खुराना: रंजीत के किरदार में अपारशक्ति अच्छे लगते हैं। उनका कॉरपोरेट लुक और बॉडी लैंग्वेज किरदार पर जमती है। वह न तो जरूरत से ज्यादा कुछ करते हैं... न किरदार को खींचते हैं।

निखिल विजय: अपने पंचों से निखिल भी यहां ध्यान खींचते हैं। मगन के किरदार में उनके कई डायलॉग और रिएक्शन अच्छे बैठते हैं। कुछ जगह तो वह वीर से भी ज्यादा इम्प्रेसिव लगते हैं।

राकेश बेदी: अपने अनुभव के मुताबिक सुहानी के पिता के किरदार में राकेश बेदी ठीक लगते हैं। खासकर आखिर में उनके हिस्से आए लंबे संवाद को उन्होंने संभाल लिया है।

प्रेम कीटाणु - फोटो : यूट्यूब
निर्देशन, स्क्रीनप्ले और राइटिंग
‘प्रेम कीटाणु’ 2024 की मलयालम सुपरहिट ‘प्रेमलू’ का हिंदी एडेप्टेशन है। ओरिजिनल फिल्म को उसकी मासूमियत, मस्ती और किरदारों की सहजता के लिए खूब पसंद किया गया था। हिंदी फिल्म में कहानी और किरदारों में बदलाव किए गए हैं।

अपूर्व सिंह कार्की के पुराने काम देखकर ‘प्रेम कीटाणु’ से उम्मीद होना स्वाभाविक है। ‘एस्पिरेंट्स’ में दोस्ती और प्यार वाली बातें बहुत नैचुरल लगी थीं। ‘सास बहू अचार प्राइवेट लिमिटेड’ में भी रिश्ते दिल के करीब लगे।

यहां वैसा कुछ खास महसूस नहीं होता। फिल्म में सीन बहुत हैं, पर याद रहने वाले कम। कई जगह तो लगता है कि सीन खत्म हुआ और बस कहानी आगे बढ़ाने के लिए अगला सीन आ गया।

सात गाने हैं और कई बार लगता है कि कहानी से ज्यादा गाने जल्दी में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

स्क्रीनप्ले में कई जगह सीन बस कहानी आगे बढ़ाने का काम करते हैं। उनमें वह शरारत और मजा नहीं आता, जिसकी ऐसी प्रेम कहानी से उम्मीद होती है।

राइटिंग में अच्छे मौके थे, खासकर विशाल-सुहानी की दोस्ती, प्यार और रंजीत वाले ट्रैक में। फिल्म उन मौकों को पूरी तरह भुना नहीं पाती।
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प्रेम कीटाणु - फोटो : यूट्यूब
देखें या नहीं?
  • अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं, तो इसे छोड़ सकते हैं।
  • कहानी में नया कुछ नहीं है और प्रेम कहानी में वह असर भी नहीं है, जिसके लिए पूरी फिल्म बनाई गई है।
  • वीर पहाड़िया का अभिनय और कमजोर केमिस्ट्री फिल्म को और फीका कर देती है।
  • कुछ पंच और गाने हैं, पर उनके लिए पूरी फिल्म झेलने की जरूरत नहीं लगती।
  • कुल मिलाकर, ‘प्रेम कीटाणु’ देखने से ज्यादा इसे मिस करना आसान है।

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