हसमुख नाम की ये सीरीज पूरी देखने का मन लगातार करता है लेकिन हर एपीसोड के बाद ये भी लगता है कि मामला कुछ कायदे से जमा नहीं और आखिरी एपीसोड तक आते आते पूरा रायता बिखर जाता है। वह इसलिए क्योंकि कहानी का दही ही नहीं जम पाता है ठीक से। वीर दास पूरी सीरीज में आयुष्मान खुराना की कॉपी करते दिखते हैं। कहानी विधु विनोद चोपड़ा की पहली फीचर फिल्म खामोश की तरह आगे बढ़ती है। बीच बीच में कहीं चाची अपने भतीजे पर दांव लगाने में फिसलती दिखती है तो कहीं चैनल मालिक की लार अपनी सेक्रेट्री पर बार बार टपकती दिखती है। खदेरन जैसे कलाकार को सुपरस्टार बना देने वाले टीवी प्रोड्यूसर का दर्द भी यहां झलकता है और एक दरोगा के अपने इलाके की बोली पकड़ लेने का अभिनय भी यहां महकता है।
वीर दास की सीरीज हसमुख ठीक वैसी ही अरदास है जिसकी लौ तमाम पुजारी बार बार कपूर डालकर इसलिए बढ़ाते रहते हैं कि चढ़ावा चढ़ता रहे। अच्छे मोड़ पर कहानी को खत्म करने की चाहत तो यहां है लेकिन सीरीज तब भटक जाती है जब हसमुख सोशल और पॉलीटिकल कमेंट करने के चक्कर में कभी वकीलों को सामूहिक रूप से गरियाता है तो कभी केजरीवाल, मोदी, मायावती से होते हुए नोटबंदी का एलान करने वाले को कन्फ्यूज इंसान बता देता है। हसमुख राइटिंग और एक्टिंग दोनों लिहाज से वीर दास की एक कमजोर सीरीज है। देखने वाली बात यहां ये है कि हसमुख के हाथों जो पहली जान जाती है, वह कत्ल नहीं है। अचानक से हाथ में आई चाकू चल जाने से गुलाटी का गला कटता है। 302 और 304 का यही फर्क है। एक्टिंग के लिए भी वीरदास ने बोली का जो लहजा पकड़ा वह कतई सहारनपुर का नहीं है। सहारनपुर का लहजा क्या है वह इनामुल हक ने क्लाइमेक्स में बोल कर बताया है।
रणवीर शौरी भी जिम्मी द मेकर के रूप में असर छोड़ने में कामयाब रहे। उनके कुछ सीन वाकई असर छोड़ जाते हैं, जैसे भट्ठी में गुलाटी की खोपड़ी पीछे फेंकना या फिर चैनल की एग्जक्यूटिव से उनकी इश्क मोहब्बत के सीन। नीलकंठ त्रिपाठी वाला सीन भी अच्छा है। इनके अलावा अमृता बागची, शांतनु घटक और रजा मुराद ने भी बढ़िया काम किया है। सुहैल नैयर का कैरेक्टर थोड़ा बेटर लिखा जा सकता था। रवि किशन अब सांसद बन चुके हैं तो ऐसे लिजलिजे किरदार करने से उन्हें परहेज करना चाहिए। उनके भीतर एक कमाल का अभिनेता है, लेकिन अब शायद कोई कालजयी किरदार करने की भूख उनमें बची नहीं है तो बस वह आई एम ए डिस्को डांसर पर ठुमके लगाकर ही खुश हो जाते हैं।