विद्युत जामवाल की पहचान उनके एक्शन से है। ‘कमांडो’ जैसी फिल्मों में वह अपने स्टंट से अलग पहचान बना चुके हैं। अब वह हॉलीवुड पहुंचे हैं। उनकी फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ मशहूर वीडियो गेम फ्रेंचाइजी पर आधारित है।
इस फिल्म को लेकर भारतीय दर्शकों की दिलचस्पी की एक बड़ी वजह विद्युत हैं। वह धालसिम के किरदार में नजर आते हैं, जो गेम के चर्चित लड़ाकों में से एक है। लेकिन फिल्म देखने के बाद पहला सवाल यही उठता है कि क्या विद्युत को अपनी प्रतिभा दिखाने का पर्याप्त मौका मिला है? इसका जवाब निराश करता है। हालांकि, फिल्म का आकलन सिर्फ विद्युत के रोल से नहीं किया जा सकता। यह भी देखना जरूरी है कि गेम की दुनिया को पर्दे पर उतारने की कोशिश कितनी सफल रही है
स्ट्रीट फाइटर मूवी रिव्यू
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पहले जानिए, क्या है ‘स्ट्रीट फाइटर’?
‘स्ट्रीट फाइटर’ जापानी कंपनी कैपकॉम की मशहूर वीडियो गेम फ्रेंचाइजी है। इसकी शुरुआत 1987 में हुई थी। 1991 में आए ‘स्ट्रीट फाइटर II’ ने इसे दुनिया भर में पहचान दिलाई। गेम में अलग-अलग देशों के लड़ाके मुकाबला करते हैं। हर किरदार का अपना अंदाज और हमला करने का अलग तरीका है। फिल्म इसी दुनिया को असली कलाकारों के साथ पर्दे पर लाती है। कहानी रयू और केन के पुराने रिश्ते, वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट और उसके पीछे चल रही साजिश के इर्द-गिर्द घूमती है।
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कहानी
फिल्म स्ट्रीट फाइटर की कहानी साल 1993 में शुरू होती है। रयू (एंड्रयू कोजी) और केन मास्टर्स (नोआ सेंटीनियो) मार्शल आर्ट के माहिर योद्धा हैं, लेकिन वक्त के साथ दोनों की राहें अलग हो जाती हैं। छह साल बाद चुन-ली (कैलिना लियांग) दोनों को एक बार फिर वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए बुलाती है। इस टूर्नामेंट में दुनिया भर के लड़ाके अपनी ताकत और हुनर दिखाने के लिए उतरते हैं। लेकिन मुकाबले के पीछे छिपी साजिश और पुराने जख्म रयू और केन को एक मुश्किल लड़ाई में धकेल देते हैं। अब दोनों को न सिर्फ अपने प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना है, बल्कि अपने अतीत से जुड़े सवालों के जवाब भी तलाशने हैं।
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फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी वीडियो गेम जैसी दुनिया है। किरदारों के कपड़े... उनका लुक और लड़ने का अंदाज गेम की याद दिलाते हैं। हर लड़ाके की अपनी शैली है, जिससे मुकाबलों में विविधता आती है। फिल्म के कुछ फाइट सीन खास तौर पर ध्यान खींचते हैं। हंसी-मजाक भी फिल्म का हिस्सा है। कुछ हल्के-फुल्के सीन एक्शन के बीच मनोरंजन देते हैं। गेम के फैन्स के लिए परिचित किरदारों को बड़े पर्दे पर देखना भी आकर्षण है। फिल्म इन किरदारों के लुक और उनकी पहचान को बनाए रखने की कोशिश करती है।
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फिल्म में कहां रह गई कमी?
टूर्नामेंट पर नहीं टिकती कहानी: फिल्म की कहानी वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट के इर्द-गिर्द है, लेकिन आगे चलकर फोकस कई दूसरी बातों पर चला जाता है। रयू और केन का रिश्ता, चुन-ली का बदला और बाइसन की साजिश के बीच मुकाबले पीछे छूट जाते हैं। कुछ फाइट्स भी जल्दी खत्म हो जाती हैं। ऐसे में जिन लड़ाकों को आमने-सामने देखने का इंतजार रहता है, उन्हें उतना समय नहीं मिल पाता।
किरदार ज्यादा, समय कम: फिल्म में कई जाने-पहचाने किरदार हैं, लेकिन हर किसी को अपनी छाप छोड़ने का मौका नहीं मिलता। कुछ किरदार आते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। उनकी कहानी और मकसद भी ठीक से सामने नहीं आ पाते।
किरदारों से जुड़ नहीं पाते दर्शक: रयू और केन के बीच पुराना रिश्ता है, लेकिन उनके बीच आई दूरियों को और अच्छे से दिखाया जा सकता था। चुन-ली के बदले की कहानी भी पूरी तरह असर नहीं छोड़ पाती। इससे किरदारों की कहानी में दिलचस्पी बनाए रखना मुश्किल होता है।
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गेम में मशहूर धालसिम, फिल्म में विद्युत की बस झलक
‘स्ट्रीट फाइटर’ गेम में धालसिम भारत का चर्चित लड़ाका है। योग में माहिर धालसिम अपने हाथ-पैर असाधारण रूप से लंबे कर सकता है और आग से हमला करता है। उसका लड़ने का अंदाज उसे बाकी किरदारों से अलग बनाता है।
ऐसे किरदार में विद्युत जामवाल को देखना दिलचस्प था। वह अपने एक्शन के लिए जाने जाते हैं,...लेकिन फिल्म में उन्हें अपनी ताकत दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिलता।
फिल्म में विद्युत की मौजूदगी करीब तीन मिनट की लगती है। शुरुआत में एक छोटी-सी झलक, फिर केन के साथ करीब दो मिनट की फाइट और आखिर में कार सीन्स में कुछ सेकंड। केन के साथ मुकाबले में उनका एक्शन दिखता है, लेकिन धालसिम के किरदार को समझने का मौका नहीं मिलता। उसकी बैकग्राउंड या कहानी में उसकी भूमिका भी सामने नहीं आती।
सवाल विद्युत के एक्शन का नहीं, उन्हें दिए गए रोल का है। गेम में अहम पहचान रखने वाले धालसिम को फिल्म में इतना कम समय क्यों मिला? विद्युत के प्रशंसक उन्हें पर्दे पर देखने के लिए उत्साहित होंगे, लेकिन उनकी यह छोटी-सी मौजूदगी उन्हें निराश कर सकती है। इतने छोटे रोल के आधार पर विद्युत के अभिनय को आंकना भी ठीक नहीं होगा।
स्ट्रीट फाइटर
- फोटो : सोशल मीडिया
दूसरे कलाकारों का काम कैसा है?
एंड्रयू कोजी रयू के किरदार में गंभीर नजर आते हैं, जबकि नोआ सेंटीनियो केन के रूप में बेफिक्र और आत्मविश्वास से भरे दिखते हैं। दोनों का अंदाज अलग है, जो फिल्म में कुछ अच्छे पल लेकर आता है। कैलिना लियांग ने चुन-ली का किरदार निभाया है। डेविड डास्टमालचियन एम. बाइसन और रोमन रेंस अकुमा के रोल में हैं। वहीं, जेसन मोमोआ ब्लांका के किरदार में नजर आते हैं। फिल्म में कई बड़े कलाकार हैं, लेकिन सभी को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिलता। कुछ किरदारों को देखकर लगता है कि उन्हें और समय दिया जाता, तो वे ज्यादा असर छोड़ सकते थे।
निर्देशन: किरदार ज्यादा, मुकाबले कम
निर्देशक किताओ सकुराई ने गेम की रंगीन दुनिया और उसके अलग-अलग किरदारों को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। किरदारों के लुक और कॉस्ट्यूम अच्छे हैं, लेकिन कहानी में इतने सारे किरदार होने से फिल्म उलझ जाती है। फिल्म में लड़ाकों के बीच मुकाबलों को ज्यादा जगह मिलनी चाहिए थी। इसके बजाय कहानी दूसरी बातों में उलझ जाती है। कुछ फाइट्स जल्दी खत्म हो जाती हैं और कई किरदारों को भी ज्यादा समय नहीं मिलता। कहानी थोड़ी सीधी और चुस्त होती, तो फिल्म ज्यादा मनोरंजक बन सकती थी।
स्ट्रीट फाइटर
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सिनेमैटोग्राफी और VFX: गेम जैसी रंगीन दुनिया
फिल्म में गेम की रंगीन दुनिया और लड़ाकों की खास शक्तियां पर्दे पर अच्छी लगती हैं। कॉस्ट्यूम और एनीमेशन वाले हिस्से भी ध्यान खींचते हैं। फाइट सीन्स में कैमरे के अलग-अलग एंगल इस्तेमाल किए गए हैं... लेकिन कुछ जगह तेज कट्स और क्लोज-अप के कारण मुकाबले को ठीक से देख पाना मुश्किल होता है। वीएफएक्स से गेम के खास हमलों को दिखाने की कोशिश अच्छी है, लेकिन तकनीकी चमक कहानी की कमी को पूरा नहीं कर पाती।
स्ट्रीट फाइटर का ट्रेलर रिलीज
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देखें या नहीं?
‘स्ट्रीट फाइटर’ में एक्शन और मनोरंजन दोनों हैं, लेकिन फिल्म पूरी तरह बांध नहीं पाती। गेम के पुराने प्रशंसकों को अपने पसंदीदा किरदार पर्दे पर देखकर अच्छा लग सकता है। लेकिन विद्युत जामवाल के लिए फिल्म देखने जा रहे हैं, तो निराशा हो सकती है। धालसिम के रूप में उन्हें बहुत कम समय मिला है। कुल मिलाकर, फिल्म में कुछ अच्छे पल हैं, लेकिन यह ऐसी फिल्म नहीं बन पाती, जिसे देखने के बाद लंबे समय तक याद रखा जाए।