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फिल्म समीक्षा: प्रेम रतन धन पायो नहीं प्रेम में धन लुटवायो

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निर्माताः राजश्री फिल्म्स प्रोडक्शंस
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निर्देशकः सूरज एस. बड़जात्या
सितारेः सलमान खान, सोनम कपूर, नील नितिन मुकेश, अनुपम खेर, अरमान कोहली, स्वरा
रेटिंग **

अगर आपको लगता है कि दीपावली पर ठीक-ठाक खर्च करने के बाद कुछ धन बचा रह गया है, तो उसे महंगाई के इन दिनों में सहेज कर रखें। फिल्म की शुरुआत में ही आपको एक किरदार समझा देता है कि पैसे बचाइए ताकि दाल तो खरीदी जा सके। कुछ और नहीं तो दाल-रोटी पर गुजारा कर लेंगे। निर्देशक सूरज बड़जात्या की फिल्म इस यथार्थवादी शुरुआती दृश्य के साथ ही एक फंताजी जैसी दुनिया में चली जाती है जिसका नाम है प्रीतमपुर।

यहां है राजकुमार विजय सिंह (सलमान खान), उसका भाई अजय सिंह (नील नितिन मुकेश) और दो सौतेली बहनें हैं चंद्रिका-राधिका। भाई-बहन संपत्ति की वजह से विजय से नाराज हैं और चार दिन बाद उसका राज्याभिषेक होने वाला है। इससे पहले कि विजय गद्दीनशीन हो, उसे मारने का षड्यंत्र रचा जाता है, मगर वह सिर्फ गंभीर रूप से घायल हो कर रह जाता है।
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उधर, अयोध्या में विजय का हमशक्ल है प्रेम दिलवाला

उधर, अयोध्या में विजय का हमशक्ल है प्रेम दिलवाला। वह दिल्ली में उपहार नाम का एनजीओ चलाने वाली राजकुमारी मैथिली (सोनम कपूर) पर फिदा है। जब उसे पता चलता है  कि मैथिली विजय के राज्याभिषेक में जाने वाली है तो वह भी वहां जाने का प्रोग्राम बना लेता है। मैथिली और विजय की पांच महीने पहले सगाई हो चुकी है

मैथिली परेशान है कि विजय सिर्फ अपने मन की करता है, उसके दिल को नहीं समझता। गंभीर रूप से घायल विजय के विश्वासपात्रों को जब प्रेम मिलता है तो वह दुश्मनों की चाल नाकाम करने के लिए उसे राजकुमार के रूप में सबके सामने पेश करते हैं। दुश्मन हैरान होते जाते हैं और मैथिली बदले हुए राजकुमार को देख कर उसके प्रेम में पड़ती जाती है। क्या होगा आगे...?

पुरानी फिल्मों की चमक यहां नजर नहीं आती

सूरज बड़जात्या ने फिल्म को पारिवारिक मूल्यों का तड़का लगाकर दीवाली मनाई है। लेकिन आप पाते हैं कि ये मूल्य अपनी चमक के साथ यहां नजर नहीं आते। पूरा ड्रामा फिल्मी और नकली मालूम पड़ता है। कुछ चीजें सूरज की फिल्म में ही संभव मालूम पड़ती हैं। जैसे, विजय की बहनें खाना बनाने से लेकर कपड़े धोने तक के काम अपने हाथों से करती हैं और बताया जाता है कि वह किराये के मकान में रहती हैं। मगर उनका घर किसी विशाल बंगले से कम नहीं मालूम पड़ता।

इसी तरह प्रेम जहां-तहां गीत गाने लगता है, मगर फिल्म का गीत-संगीत सुनने वालों को नहीं बांधता। फ्लेवर्ड चीजों के जमाने में प्रेम गुजिया-नमकीन के पैकेट गिफ्ट से प्यार का इजहार करना चाहता है। वह इतना सरल और विरक्त है कि प्रेमिका उससे संकेतों में कहती  है कि प्यार में इतना अच्छा बनने की भी जरूरत नहीं! कठपुतली नाच के बहाने दोनों के बीच प्रेम दिखाने की होशिश हास्यास्पद मालूम पड़ती है।
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स्मार्टफोन रखने वाला राजकुमार घोड़ा-गाड़ी पर!

स्मार्ट फोन इस्तेमाल करने वाला राजकुमार घोड़ा गाड़ी में चलता है! फुटबॉल के नाम पर होने वाला एक खेल बहन के दिल में भाई के लिए प्यार जगा देता है। कई बातें यहां गले नहीं उतरती और अतार्किक मालूम पड़ती है।

सलमान खान यहां डबल रोल में हैं लेकिन वह कतई एंटरटेन नहीं करते। सच्चाई यह है कि उनके अंदाज वाला न तो प्यार यहां है, न कॉमडी और न ही ऐक्शन। अतः उनके फैन्स को भी फिल्म देख कर प्रेम में धन लुटवायो जैसा एहसास हो तो आश्चर्य की बात नहीं।
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