-निर्माताः सलमा खान/सलमान खान
-निर्देशकः कबीर खान
-सितारेः सलमान खान, सोहेल खान, जूजू, जीशान अयूब, ओम पुरी, मातिन रे तंगु, शाहरुख खान
रेटिंग- **
कॉम्पेक्ट फ्लोरोसेंट लाइट उर्फ सीएफएल बल्ब के जमाने में ट्यूबलाइट यानी 2017 में 1962 की कहानी। यह ट्यूबलाइट नाम के अनुरूप शुरू से अंत तक लपक-झपक करती है। आप कहते रहते हैं, जल जा... जल जा... जल जा... परंतु वह पूरी तरह रोशन नहीं होती।
हल्के रोशनीदार मनोरंजन में आप खुश हो सकते हैं कि ट्यूबलाइट पर सलमान खान ब्रांड चिपका है तो फिल्म से काम चला लें। वर्ना इसे देखने की ठोस वजह नहीं है। बजरंगी भाईजान में सशक्त कहानी लाने वाले निर्देशक कबीर खान यहां कमाल नहीं करते। मैदान-ए- जंग में इमोशन जगाना उनकी खूबी है, परंतु वह जादू यहां गायब है।
कबीर जादू दिखाने के लिए शाहरुख खान को लाए हैं लेकिन वह फीके रहे। वह फिल्म में टीवी धारावाहिक में गेस्ट अपीयरेंस करने वाले ऐक्टर जैसे दिखे हैं। हां, ओम पुरी को देख कर जरूर खुशी मिलती है। जीशान अयूब छोटे-छोटे मौकों पर तेवर दिखाते हैं।
जूजू कम मौकों के बावजूद उपस्थित हैं। बालक मातिन भी ठीक हैं लेकिन सलमान के जिन कंधों पर दारोमदार था, उन्हें डायरेक्टर ने कमजोर कर दिया। ट्यूबलाइट नहीं जली। सलमान को रिलीज के बाद एहसास होगा कि कबीर ने चीटिंग की क्योंकि दर्शकों को यही लगता है। यह वह सलमान नहीं, जो सुपरस्टार है।