सोशल मीडिया पर राधिका आप्टे को लेकर एक मजाक खूब चलता है। और, ये है नेटफिल्क्स पर हर दूसरी वेब सीरीज में उनकी मौजूदगी को लेकर। राधिका आप्टे को ओटीटी और दूसरे डिजिटल चैनलों पर इतना ज्यादा देखा जा चुका है कि लोगों को राधिका आप्टे को अब और देखने की इच्छा ही कम होती जा रही है। राधिका के लिए ये खतरे की घंटी है। इसकी साफ आवाज सुनी जा सकती है उनकी फिल्म बॉम्बेरिया में।
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radhika apte
बॉम्बेरिया वैसे तो अरसे से अटकी फिल्म है और राधिका आप्टे की ताजा शोहरत के चलते ही अब जाकर रिलीज हो पाई है। लेकिन, ज्यादा दिक्कत इस फिल्म के साथ ये है कि फिल्म तो राधिका आप्टे के नाम पर ही दर्शकों को खींचकर सिनेमाघरों तक लाती है लेकिन सिनेमाघरों में आने के बाद दर्शक राधिका आप्टे के नाम पर खुद को ठगा महसूस करता है।
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एक बड़े अभिनेता का पब्लिक रिलेशन देखने वाली लड़की मुंबई की आपाधापी भरी जिंदगी में एक ऐसे मकड़जाल में उलझ जाती है जिसकी शुरूआत मोबाइल चोरी की एक घटना से होती है। फिल्म की शुरूआत बम बना रहे एक शख्स से होती है, वह क्या कर रहा है उसको समझने के लिए शुरू में ही इतना जोर आ जाता है कि बाकी फिल्म की कहानी थोड़ी ही देर में बोझिल लगने लगती है। हीरों की डिलीवरी करने वाले अंगड़िया कभी पहचान में नहीं आते। यहां ये दूर से पहचान में आने वाले गुलाबी रंग का स्कूटर लिए घूमता है। दोनों टकराते हैं और कहानी कभी सुपरहीरो बनने की चाहत रखने वाले अभिनेता से भिड़ती है, कभी दारूबाज सुपरस्टार से रगड़ती है और कभी जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट पा रहे नेता से झगड़ती है।
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Radhika Apte
कुंदन शाह की जाने भी दो यारों बनने की कोशिश करती बॉम्बेरिया पुरानी चेज फिल्मों चोर मचाए शोर या विक्टोरिया नं. 203 के करीब भी नहीं पहुंच पाती। पहली बार कोई फिल्म बना रहीं पिया बनर्जी को लगा होगा कि राधिका आप्टे के साथ सिद्धांत कपूर, अक्षय ओबेरॉय, रवि किशन और आदिल हुसैन जैसे सितारे जुटाकर वह मामला जमा लेगीं लेकिन फिल्म जमाने के लिए पहली जरूरत होती है जमी जमाई कहानी की। वही यहां नहीं है।
राधिका आप्टे को देखकर लगता है कि जैसे वह पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान किसी दूसरी फिल्म के सेट पर पहुंचने की जल्दी में हैं। राधिका ने पिछले साल घूल और लस्ट स्टोरीज में अच्छा काम किया, इस साल भी उनसे खुद को बेहतर करने की उम्मीद है पर बॉम्बेरिया इस उम्मीद पर खरी नहीं उतरती। आदिल हुसैन जैसे उम्दा कलाकार को फिल्म में बहुत ही कमजोर किरदार दिया गया है। सिद्धांत कपूर और अक्षय ओबेरॉय पासिंग मार्क्स जैसी ऐक्टिंग भी नहीं कर पाते। फिल्म न देखें तो ही बेहतर है। अमर उजाला डॉट कॉम के रिव्यू में इस फिल्म को मिलता है सिर्फ एक स्टार।