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Movie Review: 'डैडी' में छाए रहे अर्जुन रामपाल

Fri, 08 Sep 2017 01:09 PM IST
रवि बुले
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अर्जुन रामपाल
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-इसमें संदेह नहीं कि अंडरवर्ड की क्राइम फिल्मों से डैडी थोड़ी अलग है। मुंबई में माफिया डॉन से नेता बने अरुण गवली की बायोपिक सीधी लकीर जैसी है, जिसमें निर्देशक अशीम अहलूवालिया ने सिनेमाई लटकों-झटकों से बचने की कोशिश की। इससे एंटरटेनमेंट के लिए बनाई फिल्म और डॉक्युमेंट्री के बीच की दूरियां कहीं-कहीं खत्म होने लगती है।
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तब एहसास होता है कि यहां ज्यादातर वही बातें हैं जो पहले से पता हैं। कुछ नई बातें आतीं तो ईमानदार फिल्म हो सकती थी। फिल्म मिस लवली (2012) के लिए चर्चित निर्देशक ने डैडी को ज्यादा से ज्यादा रीयल लोकेशनों पर शूट किया और गवली को ‘हीरो’ नहीं बनाया। मगर उसका दर्द जरूर उभारा है कि जनता ने भले उसे लीडर बना दिया परंतु राजनीति के लिए वह अब भी अंडरवर्ल्ड डॉन है।

अर्जुन रामपाल
फिल्म की समस्या यह है कि पर्दे पर अंडरवर्ल्ड की दुनिया इतनी दिख-बिक चुकी है कि कई किरदार, दृश्य, कहानियां खुद को दोहराते मालूम पड़ते है। आतंकी दाउद इब्राहिम यहां मकसूद नाम से है और फरहान अख्तर इस रोल में बिल्कुल नहीं जमे। फिल्म में 1970-80 के दशक में गवली के मुंबई के बंद होते कपड़ा मिलों के बीच अचानक डॉन की तरह उभरने की कहानी में कई खाली स्थान हैं, जो सवालों की तरह आते हैं।

के के दिन काटने वाले गवली की जिंदगी में अचानक बदलाव आते हैं। धन उगाही, जुए और हत्याओं के बीच वह अपने दोस्तों बाबू और रामा के साथ गैंग बना कर उभरता है। और आप समझ नहीं पाते हैं कि इस सबके पीछे कौन है? गवली की कहानी घटनाओं को केंद्र में रखती है, ऐसे में बायोपिक क्रमिक ढंग से नहीं उभरती।
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अर्जुन रामपाल
फिल्म के पहले हिस्से में गवली जहां डॉन के रूप में उभरता है वहीं दूसरे में उसका पारिवारिक/राजनीतिक जीवन केंद्र में है। मुस्लिम लड़की जुबैदा (ऐश्वर्या) से विवाह के साथ उसकी ऐसी छवि सामने आती है, जिसमें वह मुश्किल दौर से गुजरने वाले दोनों धर्मों के लोगों की मदद करता है। यहां में कव्वाली है तो गणेश आरती भी। पूरी फिल्म वन मैन शो जैसी है। अर्जुन रामपाल छाए हैं। गवली जैसा दिखने-बोलने, चलने, उठने-बैठने में उन्होंने कसर बाकी नहीं रखी।

संवादों में ठेठ मराठी टच है। अर्जुन ने इस रोल को निभाने में कड़ी मेहनत की है और निःसंदेह यह उनके करिअर की सर्वश्रेष्ठ भूमिका है। वह अभिनय का लोहा मनवाते हैं। निशिकांत कामत इंस्पेक्टर की भूमिका में जमे हैं। कहानी की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए फिल्म में मराठी ऐक्टरों को ज्यादा जगह दी गई है। इसके बावजूद फिल्म को बॉलीवुड की अंडरवर्ल्ड फिल्मों में गॉडफादर वाली जगह नहीं दे सकते। डैडी अर्जुन की अदाकारी और गैंगस्टर फिल्मों के शौकीनों के लिए है।
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