गुलशन देवैया के साथ वासन बाला ने पेडलर्स में काम किया था। यहां गुलशन की मौजूदगी ने फिल्म में दो फूल खिलाए हैं। दो फूल एक माली के चक्कर में फिल्म में तमाशा खूब होता है। और तमाशे की डोरियां जिसके हाथ में है, उस अभिमन्यु दसानी ने करियर की पहली फिल्म से जता दिया कि स्टार किड होना उनके लिए कोई तश्तरी में मिला प्रसाद नहीं है। अपना जन्म वह चुन नहीं सकते थे। लेकिन अपना कर्म उन्होंने बखूबी चुना है। ब्रूस ली और जैकी चैक के इस भक्त का जै बजरंग बली टाइप अंदाज हिट है।
राधिका मदान के लिए वासन बाला ने ट्रेलर में री इंट्रोड्यूसिंग क्यों लिखा था, ये फिल्म देखने के बाद साबित होता है। टीवी से बड़े परदे की छलांग में जो पटाखा बीच में फुस्स हो गया था, उसने धमाका इस फिल्म ने किया है। वासन बाला ने अनुराग कश्यप स्कूल में सिनेमा पढ़ा है। इस स्कूल में अभिनेता हो या तकनीशियन घिसाई इतनी होती है इंसान हीरा जैसा दमक कर निकलता है। वासन का नंबर अब नगीना बनने का है। मर्द को दर्द नहीं होता उनके संघर्ष का इनाम है।
वासन को फिल्म को अपने हिसाब से बनाने में जय पटेल के कैमरे की बहुत मदद मिली है। जय का कैमरा फिल्म में किसी किरदार की तरह घूमता है और जहां वह अटकता भी है, वहां प्रेमा सहगल की एडिटिंग मामला संभाल लेती है। फिल्म में म्यूजिक का स्कोप ज्यादा है नहीं, म्यूजिक अच्छा होता भी तो फिल्म देख रहे दर्शकों का फोकस खिसका सकता था। होली की मस्ती में फिल्म बिल्कुल आलू के करारे पापड़ों जैसी लगती है। अदाकारी और निर्देशक के रंग-गुलाल भी बिल्कुल सही बिखरे हैं। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली रिव्यू में फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता है को मिलते हैं साढ़े तीन स्टार।
मूवी रिव्यू: मर्द को दर्द नहीं होता
कलाकार: अभिमन्यु दसानी, राधिका मदान, गुलशन देवैया, महेश मांजरेकर।
निर्देशक: वासन बाला
बैनर: आरएसवीपी मूवीज
रेटिंग: ***1/2