एक जमाना था जब गरम धरम देश के दुश्मनों को चुन-चुन कर मारते थे, फिर देशप्रेमी अफसर के रूप में सनी देओल ने सैकड़ों दुश्मनों को ठिकाने लगाया। अब अक्षय कुमार ने उनकी जगह ले ली है।
कभी ‘खिलाड़ी कुमार’ कहे जाने वाले अक्षय आजकल ‘सिपाही कुमार’ हो चले हैं। ‘बेबी’ उनकी प्रतिभा की नई झांकी है। भावशून्य चेहरे वाला एक ऐसा अफसर जो बिल्कुल सीधे चलते हुए दुश्मन का भुर्ता बना देता है। सैन्य मिशन वाली फिल्मों में अब पाकिस्तान सीधे निशाने पर है।
यह संयोग ही है कि जिस आतंकी संगठन जमात-उद-दावा पर पाकिस्तान ने गुरुवार को प्रतिबंध लगाया, उसके प्रमुख आतंकी हाफिज सईद को आधार बना कर ‘बेबी’ में मुख्य खलनायक मोहम्मद रहमान को रचा गया है। पाकिस्तानी ऐक्टर रशीद नाज ने फिल्म में यह भूमिका निभाई है।
कई देशों में सीक्रेट मिशन को अंजाम देती है फिल्म ‘बेबी’
‘बेबी’ कश्मीर में किसी जगह रह रहे रहमान के भारत विरोधी कारनामों को दिखाने के साथ एक बड़े आतंकी बिलाल (केके मेनन) को मुंबई पुलिस से छुड़ा लेने का घटनाक्रम रचते हुए दिखाती है। बिलाल मारा जाता है और रहमान को अक्षय और उनके साथी सऊदी अरब से ‘उठा’ लाते हैं।
इस कहानी में कुछ धागे अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में घुस कर आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के मिशन से भी प्रेरित हैं। ‘बेबी’ के सदस्य इसी मिशन के अंदाज में नेपाल में घुसते हैं और आतंकियों की मदद करने वाले एक बिजनेसमैन को उठा कर भारत लाते हैं। फिर सऊदी अरब जाकर बिलाल और रहमान के विरुद्ध कार्रवाई करते हैं।
बेबी में देसी जेम्स बॉन्ड लग रहे अक्षय कुमार
कुछ जगहों पर अक्षय आपको ‘देसी जेम्स बॉन्ड’ जैसे लगते हैं। मगर यह बॉन्ड शादीशुदा और दो बच्चों का पिता है। वह हसीनाओं की तरफ आंख उठा कर भी नहीं देखता।
असल में भारत द्वारा पाकिस्तान में छुपे मोस्ट वांटेड अपराधियों को फिल्म के हीरो द्वारा हैरतअंगेज ढंग से उठा लाने की कहानियों का सिलसिला पिछले साल ‘डी-डे’ से शुरू हुआ। जिसकी कहानी में पाकिस्तान से दाऊद को लाया गया था। जबकि देश में विस्फोटों को अंजाम देने वाले आतंकी मिशनों को ऐन मौके पर बेकार कर देने का प्लॉट ‘हॉलीडे’ में था।
बड़े बजट की फिल्म है 'बेबी'
‘बेबी’ इन्हीं दोनों को नन्हें कदमों पर आगे बढ़ाता हुआ प्रयास है। जिसकी स्क्रिप्ट में थोड़ी कसावट है, मगर नयापन और ताजगी नहीं। फिल्म की मेकिंग में लगा धन पर्दे पर दिखता है।
फिल्म में नीरज पांडे का निर्देशन कसा हुआ है, लेकिन कई दृश्यों को बहुत लंबा खींचा गया है और वे थ्रिल पैदा करने के बजाय उबाते हैं। फिल्म में रोमांस-डांस-कॉमेडी के नाम पर कुछ भी नहीं है।