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यह पढ़कर फिल्म देखने जाइए वर्ना मिलेगा 'बाबाजी का ठुल्लू!'

Fri, 23 Jan 2015 02:36 PM IST
रवि बुले/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
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कॉमेडी फिल्म 'डॉली की डोली' शुरू तो ठीक अंदाज में होती है लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ती है पटरी से उतरती जाती है। एक लड़की डॉली लड़कों को अपने हुस्न के जादू में फंसा कर उनसे शादी करती है और रात बीतते-बीतते ससुराल का सारा माल समेट पर चंपत हो जाती है।
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इस काम में भाड़े के पिता, मां, भाई और दादी उसका साथ देते हैं। लेकिन वह ऐसा क्यों करती है? इस सवाल का जवाब जब मिलता है तो आप सबसे ज्यादा निराश होते हैं।

डॉली (सोनम कपूर) यूं तो कई दूल्हों को बेवकूफ बनाती है परंतु आप पाते हैं कि दो, हरियाणवी सोनू (राजकुमार राव) और पंजाबी मनजोत (वरुण शर्मा) उसकी तलाश में हैं। इनके साथ एक पुलिस इंस्पेक्टर रॉबिन (पुलकित सम्राट) भी डॉली को खोज रहा है। फिल्म आपको पहले हिस्से में बांधे रखती है।
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'डॉली की डोली' में चौंका देते हैं अभिनेता राजकुमार राव

फिल्म के पहले हिस्से में कुछ अच्छे कॉमिक सीन हैं और राजकुमार राव ने अपने गंभीर चोले से बाहर निकल कर बढ़िया अभिनय किया है। फैशन मुझपे खत्म... गाने में भी राव अपने डांस से चौंकाते हैं। इसी हिस्से में अचर्ना पूरन सिंह और उनके लाड़ले की भूमिका में वरुण शर्मा के सीन भी मजेदार हैं और आपको हंसी आती है। इसके बाद कहानी का रुख एकदम बदल जाता है और वह कॉमेडी नहीं रह जाती।

फिल्म अचानक पिछली घटनाओं को तार्किक क्रम में रखने की कोशिश करती है और हास्य गायब हो जाता है। डॉली अचानक ‘एक्सप्रेस’ से ‘पैसेंजर’ बन जाती है। प्रेम में हारी-हताश युवती बन जाती है। राज खुलता है कि वह प्रेमी के साथ घर से फरार होने निकली थी, मगर वह नहीं आया। तब डॉली ने घर लौटने के बजाय युवकों को प्यार में फंसा कर उन्हें लूटने का प्रोगाम बनाया।
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कई जगह चौंकाते हैं फिल्म के संवाद

फिल्म के लेखक-निर्देशक यहां अंततः परंपरागत राह पर चलते हैं और हीरोइन को ‘सताई हुई’ दिखाते हैं। परंतु इस सताई हुई को दर्शकों की सद्भावना नहीं मिलती क्योंकि बात गले नहीं उतरती।

फिल्म में आप तब चौंकते हैं जब साफ-सुथरी बातों के बीच नायिका एकाएक ‘मैं वैसी बहू नहीं हूं जो सिर्फ पति को दूध दूंगी, मैं तो सबको दूध दूंगी’ जैसा संवाद बोलती है।

सोनम के लिए यह फिल्म खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका थी और शुरुआत भी अच्छी थी। पर अंत थोड़ा निराश करती है। फिल्म के मेकिंग अच्छी है, मगर गीत-संगीत बेअसर है। वहीं पूरे फिल्म में चलता गाना बाबाजी का ठुल्लू भी चौंकाता है।
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