फिल्म 'मर्दानी 3' रिव्यू
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
अभिनय
रानी मुखर्जी (ACP शिवानी रॉय): यह फिल्म रानी की ही फिल्म है। उनका अभिनय बहुत मजबूत है। चाहे जांच का तनाव हो, गुस्से वाले सीन हों या पूरी स्थिति की गंभीरता हर जगह रानी का कंट्रोल और स्क्रीन-प्रेजेंस साफ दिखता है। उन्होंने एक पुलिस ऑफिसर की थकान, जज्बा और गुस्सा, सबको बिना ओवरएक्टिंग के दिखाया है।
मल्लिका प्रसाद (अम्मा): इस बार विलेन का किरदार यानी अम्मा फिल्म की जान है। मल्लिका प्रसाद का काम बहुत प्रभावी है। वह शांत भी दिखती हैं, खतरनाक भी और उनकी मौजूदगी से ही कई सीन भारी लगते हैं। रानी और मल्लिका के बीच की टक्कर फिल्म को और ऊंचा ले जाती है।
जानकी बोड़ीवाला (फातिमा): ‘शैतान’, ‘वश’ और ‘छेल्लो दिवस’ से पहचान बनाने वाली जानकी बोड़ीवाला इस फिल्म में भी अहम रोल में नजर आती हैं। वह शिवानी की टीम का हिस्सा होती हैं और अपने सीन में सहज दिखती हैं। उनके किरदार में एक हल्की-सी कॉम्प्लेक्सिटी भी है, जो उन्हें बाकी टीम से थोड़ा अलग बनाती है। उनका रोल सीधा-सादा नहीं है और फिल्म में उनका योगदान ध्यान खींचता है।
अन्य कलाकार: प्रजेश कश्यप फिल्म में रामानुजन के रूप में दिखते हैं और उनका अंदाज प्रभावी है। जिस भी सीन में आते हैं, उनकी मौजूदगी मजबूत महसूस होती है। उन्होंने विलेन के किरदार को सादगी और दमदार अंदाज के साथ निभाया है। बाकी सभी किरदार अपने हिस्से का काम ठीक तरह से निभाते हैं। कहीं भी यह नहीं लगता कि कोई भूमिका ज्यादा चढ़ी हुई है।
फिल्म 'मर्दानी 3' रिव्यू
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निर्देशन
'मर्दानी 3' का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है। उनका डायरेक्शन सीधा और कंट्रोल में है। वे कहानी को भटकने नहीं देते और फिल्म की रफ्तार ठीक बनी रहती है। केस की गंभीरता भी बिना जरूरत का ड्रामा बढ़ाए दिखाई गई है, जिससे फिल्म असर छोड़ती है। अभिराज पहले 'बैंड बाजा बारात', 'गुंडे', 'सुल्तान', 'जब तक है जान' और 'टाइगर 3' जैसी फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे हैं। 'मर्दानी 3' उनकी पहली बड़ी डायरेक्टेड फिल्म है।
फिल्म 'मर्दानी 3' रिव्यू
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तकनीकी पहलू
बैकग्राउंड स्कोर कहानी की टेंशन बढ़ाता है। कैमरा वर्क जगहों और माहौल को वास्तविकता के करीब रखता है। एडिटिंग अच्छी है, फिल्म खिंचती नहीं। एक्शन कम है लेकिन असरदार है, ज्यादा दिखावा नहीं है।
कमजोरियां
कहानी का ढांचा पहले की दोनों फिल्मों जैसा लग सकता है। कुछ मोड़ आसानी से समझ में आ जाते हैं और इंटरवल से पहले वाला हिस्सा थोड़ा अनुमान लगाने लायक लगता है। सस्पेंस के कुछ हिस्से उतने चौंकाने वाले नहीं हैं जितनी उम्मीद होती है। इमोशनल सीन्स जल्दी निपटा दिए गए महसूस होते हैं, थोड़ी और गहराई होती तो असर ज्यादा होता।
फिल्म 'मर्दानी 3' रिव्यू
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देखें या न देखें?
अगर आप रानी मुखर्जी का दमदार अभिनय देखना चाहते हैं, साथ ही गंभीर और सच्चाई से भरी क्राइम कहानियां पसंद करते हैं और ऐसी फिल्में देखते हैं, जिनमें ड्रामा से ज्यादा केस की पकड़ मजबूत हो, तो 'मर्दानी 3' आपके लिए जरूर देखने लायक है।