बदलते भारत की ऐसी तस्वीर
बीते दो तीन दशक में भारत तेजी से बदला है। मंदिर मुद्दे से होते हुए और मंडल की मार झेलते हुए युवाओं का तबका अब घर परिवार वाला हो चुका है। उनके बच्चों को अब पड़ी भी नहीं है कि सरकारी नौकरी में कितना आरक्षण है, कितनी पढ़ाई पीसीएस, आईएएस के लिए करनी होती है और राजनीति के दलदल में समाज कहां तक धंस चुका है। इस नई पीढ़ी के लिए भारत एक तेजी से उभरता देश है। दुनिया की आर्थिक ताकत बनने के मुहाने पर खड़ा है। ऐसे में ‘महारानी’ जैसी वेब सीरीज लोगों को आसपास की गंदगी में लाकर एकदम से पटकती है और ये बताती है कि देखो कि क्या वाकई दाग अब भी अच्छे हैं। कहानियां राजनीति पर और भी कही जाती रहेंगी लेकिन ‘महारानी’ के दूसरे सीजन ने जिस तरह अपने पिछले सीजन की केंचुल उतारकर नई स्फूर्ति की गति पकड़ी है, वह दर्शनीय है।
रानी भारती का और बढ़ा रुआब
रानी भारती को अब तक सब जान ही चुके हैं। भीम भारती को भी सब पहचानते हैं। कहानी के सिरे बिहार के जिस राजनीतिक परिवार से जाकर जानबूझकर या अनजाने में जुड़ते हैं, उसके संयोग पर ना भी जाएं तो ये तो सच है ही कि यही परिवार अब फिर से बिहार में सत्ता का साझीदार है। सत्ता अब साझेदारियों से ही चलती है। अकेले अपने बूते देश का नेतृत्व कर सकने वाले नेहरू से लेकर इंदिरा और बाजपेयी तक सब समय के लूप में लोप हो चुके हैं। यहां मामला रानी भारती का है। पहले अपने गंवईपन की वजह से ताने सुनती रही। पति के जेल जाने पर उसके भाग्य जागे। उसे अपनी भीतरी ताकत का भान हुआ तो लोगों को भी इस बात का ज्ञान हुआ कि जागी हुई महिलाएं क्या कुछ नहीं कर सकतीं। यही वेब सीरीज ‘महारानी’ का तत्व ज्ञान भी है। तमाशा इस बार वहां से खुलता है जहां रानी भारती खुद अपनों के निशाने पर है औऱ चौसर में दांव पर लगा है देश का एक पूरा राज्य।
पहले सीजन से बेहतर दूसरा सीजन
वेब सीरीज ‘महारानी’ के दूसरे सीजन ने उस श्राप से भी मुक्ति पाई है जो अक्सर वेब सीरीज के दूसरे सीजन के कांधे आ बैठता है। किसी कामयाब सीरीज का दूसरा सीजन बनाना सबसे मुश्किल काम रहा है। यहां पसंघा सुभाष कपूर के पलड़े में इसलिए है क्योंकि सीरीज का पहला सीजन कमजोर निकलने के बावजूद ओटीटी ने इसके दूसरे सीजन को हरी झंडी दी और सुभाष कपूर ने इस मौके को बेकार नहीं जाने दिया। पहले सीजन से कहीं बेहतर बने इसके दूसरे सीजन में पहले सीन से ही रानी भारती निशाने पर हैं। सूबे की सरकार चलानी है। घर में तीन बच्चे हैं और जेल से हर पल उसके खिलाफ साजिशें रची जा रही हैं।
'महारानी' वेब सीरीज में हुमा कुरैशी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हुमा कुरैशी के हुनर का दमखम
हुमा कुरैशी के अभिनय की असली तासीर देखनी हो तो वेब सीरीज ‘महारानी’ का दूसरा सीजन जरूर देखिए। पहले सीजन में शायद उन्हें भी ज्यादा कुछ किरदार के बारे में समझ आया नहीं। वह अपने किरदार से मिलते जुलते असल जिंदगी के किरदार को परदे पर दिखाने की ही कोशिश तब करती रहीं थी। लेकिन, इस बार उनको मैदान समझ आ चुका है। ये भी समझ आ चुका है कि कहां कोई लंगड़ी मारने को तैयार बैठा है और कहां उनका गला दबोच कर बीच की लाइन तक पहुंचने से पहले उनकी सांस तोड़ देने की तैयारी है। लेकिन, इस बार ‘हु तू तू’ का ये खेल पलट चुका है। अमित सियाल के लिए तो खैर इस तरह के किरदार अब बाएं हाथ का खेल हो चुके हैं और वह इस गेटअप मे जमते भी हैं। हां, सोहम शाह के किरदार को लेकर जो झटका सीरीज बनाने वालों ने एकाएक दिया, वह थोड़ा खटक जाता है।
देखें कि न देखें
वेब सीरीज ‘महारानी’ के दूसरे सीजन के औसतन 50 मिनट के 10 एपीसोड देखने के लिए आपको अपने जीवन के आठ घंटे लगाने हैं। बिंच वॉच के लिए सीरीज का भौगोलिक विस्तार थोड़ा कमजोर है। निर्देशक रवींद्र गौतम की इकलौती चूक यहां कहानी के लिए उपयुक्त वातावरण न रच पाना है। कहानी के सारे किरदारों को अगर जूम आउट करके देखें तो इनके आसपास की दुनिया काफी खाली सी लगती है। संपादन थोड़ा चुस्त करके हर एपीसोड 40 मिनट के करीब हो सकता है। इस क्रम में सीरीज के पिछली बार से बेहतर संगीत रचने के लिए मंगेश धाकड़े की तारीफ बनती है। अनूप सिंह के कैमरे ने भी माहौल को अच्छे से पकड़ा है। सियासी कहानियों के षडयंत्र पसंद करने वालों के लिए वेब सीरीज ‘महारानी’ इस हफ्ते का अच्छा मनोरंजन है।