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करले प्यार करलेः अक्ल बादाम खाने से नहीं आती

Fri, 17 Jan 2014 02:21 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
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नया हीरो एक बार में सब कुछ दिखा देना चाहता है। डांस, एक्शन, इमोशन और बदन। नए जमाने की नई हीरोइन को भी कोई परहेज नहीं है। सो टक्कर बराबरी की है।
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अच्छा रहता अगर डायरेक्टर ने भी समझा होता कि अपनी पहली फिल्म में स्क्रिप्ट पर जम कर काम किया जाए। निर्माता-निर्देशक सुनील दर्शन ने अपने बेटे शिव को बॉक्स ऑफिस पर उतारा है।

बॉलीवुड फिल्मों के सारे तड़के यहां लगे हैं। ऐसे में अगर आप यह न देखें कि पर्दे पर किसका चेहरा है, इस मसाला फिल्म का मजा ले सकते हैं।
 
'करले प्यार करले' निर्देशक यान सैम्युअल की फ्रेंच फिल्म 'लव मी, इफ यू डेयर' (2003) से प्रेरित है। जहां नायक और नायिका एक-दूसरे को सदा कुछ नया, अनोखा और अनूठा कर गुजरने का चैलेंज करते हैं।
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जिंदगी उनके लिए खेल से कम नहीं। कबीर सयाल (शिव दर्शन) और प्रीत सिहोटा (हसलीन कौर) की जिंदगी ऐसे ही चलती है।
 
वे बचपन के दोस्त हैं, मगर इसलिए एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं कि जब भी मिलते हैं कुछ गड़बड़ ही होता है। बड़े होने पर उनकी मुलाकात कॉलेज में होती है तो दोस्ती आगे बढ़ती है।

लेकिन हमेशा की तरह यहां भी कॉलेज की बेस्ट गर्ल पर दावा करने वाला एक खलनायक है...! इस तरह से कहानी नए ट्विस्ट एंड टर्न लेती है।
 
कुल मिला कर फिल्म प्रभावित नहीं करती। न हीरो और न हीरोइन। शिव नए हैं और उनमें बहुत कच्चापन है। इन दिनों नए हीरो जिस तैयारी से पर्दे पर आते हैं, वह देखते हुए शिव को बहुत मेहनत करनी होगी।

जहां तक हसलीन का सवाल है, उन्होंने ऐक्टिंग के साथ यह भी दिखाया कि कहानी की डिमांड हो तो वह क्या नहीं कर सकतीं। उनकी पिंक बिकनी और ग्रीन स्विमसूट गवाह हैं।
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फिल्म का तकनीकी पक्ष मजबूत है। इसमें निर्माण की भव्यता है। ओ डार्लिंग तू धुआंधार है और आई जो तेरी याद तन्हाई में जैसे गीत यहां हैं। इस फिल्म से ज्यादातर नए और युवा कलाकार जुड़े हैं।

फिल्म में एक संवाद है, 'अक्ल बदाम खाने से नहीं आती ठोकर खाने से आती है।' उम्मीद करें की निर्माता, निर्देशक, ऐक्टर और बाकी टीम आगे संभल जाएगी।


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