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Jurassic World Dominion Review: इंसानी लालच से संकट में आई धरती की दास्तां, एक शानदार सीरीज का भावनात्मक समापन

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जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन
कलाकार
क्रिस प्रैट , ब्राइस डलास हॉवर्ड , लॉरा डर्न , जेफ गोल्डब्लम और सैम नील आदि।
लेखक
डेरेक कोनोली और कॉलिन ट्रेवोरो
निर्देशक
कॉलिन ट्रेवोरो
निर्माता
फ्रैंक मार्शल और पैट्रिक क्राउली
रिलीज
10 जून 2022
रेटिंग
2.5/5

अपने माता पिता की गोद में बैठकर पहली बार बड़े परदे पर 1993 में रिलीज हुई फिल्म ‘जुरासिक पार्क’ देखने वाले बच्चे इस फ्रेंचाइजी की छठी और आखिरी फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ के रिलीज होते होते जवान हो चुके हैं। दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। सिनेमा बनाने का अंदाज बदल चुका है। तकनीक के विकास के चलते अब परदे पर हर फिल्म को एक नया कौतुक चाहिए। दर्शक अब सिनेमा हॉल में बैठकर विस्मित होना चाहता है। आईमैक्स सिनेमाघरों में थ्रीडी में फिल्में देखना युवा पीढ़ी का पसंदीदा शगल है और स्टीवन स्पीलबर्ग अब भी बदलते मिजाज के साथ बदलता सिनेमा बनाने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखे हुए हैं। फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ एक तरह से देखा जाए तो इस सीरीज की फिल्मों का उपसंहार है। एक ऐसी गाथा का उपसंहार जिसकी प्रस्तावना ने दुनिया भर के लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था। फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ इस कसौटी पर अपने प्रशंसकों को कोई नया कौतुक तो नहीं दिखाती है लेकिन हां एक शानदार फ्रेंचाइजी की एक भावनात्मक मंजिल जरूर बन जाती है।

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जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहानी डीएनए में नए फेरबदल की
फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ का डीएनए वही है कि विज्ञान एक अच्छा नौकर है लेकिन एक खराब मालिक। विज्ञान की संभावनाओं को अपने मुनाफे के लिए इस्तेमाल करने वाला एक लालची कारोबारी है। एक ऐसी महिला वैज्ञानिक का अतीत एक बच्ची के रूप में वर्तमान तक आ गया है जिसने अपने डीएनए की संरचना में खुद ही बदलाव करके बिना किसी पुरुष संसर्ग के मां बनने में कामयाबी हासिल कर ली थी। यह इंसानी प्रयोग डायनासोर पर किए गए उस प्रयोग का ट्रायल था जिसमें एक डायनासोर बिना किसी नर के सहयोग के खुद ही मां बनने में सक्षम हुई। बदलते दौर में महिला सशक्तिकरण की बदली परिभाषाओं के बीच ये एक नई टिप्पणी भी है और एक ऐसी संभावना जो सामाजिक दायरे पर सीधे चोट करती है। और, साथ में है खेती को हथियार बनाकर दुनिया पर राज करने की मंशा रखने वाली एक कंपनी। उसने डीएनए संरचना में बदलाव करके विनाशकारी और विशालकाय टिड्डे बना रखे हैं जो कंपनी के बीजों वाली खेती छोड़ बाकी सब कुछ चट कर जाने के लिए बनाए गए हैं।

जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्रस्तावना से उपसंहार तक
29 साल पहले ‘जुरासिक पार्क’ पर जब ‘अमर उजाला’ के फिल्म परिशिष्ट ‘रंगायन’ के लिए मैंने पहला लेख लिखा था तो पाठकों को इसे लेकर ढेरों प्रतिक्रियाएं पत्रों के माध्यम से आई थीं। तब व्हाट्सएप नहीं था, ईमेल का प्रयोग भी सीमित था और सोशल मीडिया जैसी कोई चीज भविष्य में आएगी, ‘जुरासिक पार्क’ बनाने वालों तक को नहीं पता था। सीरीज की पिछली फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड फालेन किंगडम’ में इस दुनिया के सारी संभावनाएं ध्वस्त हुईं और अब फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ में अप्रत्याशित रूप से इंसान और डायनासोर साथ साथ रह रहे हैं। जीवन का संघर्ष जारी है। ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ की थ्योरी फिर से लागू हो रही है और इस उथल पुथल के बीच इंसानों का इंसानों से और डायनासोरों का डायनासोरों से संघर्ष भी जारी है। धरती पर अब तक हुए सबसे विशालकाय डायनासोर और सबसे खतरनाक डायनासोर सब यहां मौजूद हैं।

जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तकनीक के विकास में खोया कौतुक
फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ को देखने का आनंद यही है कि इसके विजुअल इफेक्ट्स अब तक के बेहतरीन हैं। परदे पर दैत्याकार डायनासोरों को आपस में भिड़ते देखना दर्शकों को भाता है। पानी के ऊपर शिकार की तलाश में मुंह बाए डायनासोर और पानी की सतह के ठीक नीचे सांस साधे इंसान की तस्वीर फिल्म के इंसान बनाम जानवर के संघर्ष की सच्ची तस्वीर है। लेकिन, ये सब दर्शकों को नया नहीं लगता। कॉलिन ट्रेवोरो निर्देशित फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ की सबसे बड़ी कमजोरी है इसमें कौतुक जैसी कोई ऐसी कलाकारी का ना होना जो इस पूरी सीरीज को लगातार देखते रहे दर्शकों को चौंका दे। ये अच्छा ही है कि इस सीरीज का समापन एक संतुलित और सारगर्भित फिल्म के साथ हो रहा है। मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स भी इन दिनों इसी संघर्ष से गुजर रहा है। उसे भी अपनी कहानियों को समावेशी बनाना पड़ रहा है।

जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सितारों की दमदार कलाकारी
अतीत से अपनी कड़ी जोड़ती फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ की ऊर्जा क्रिस प्रैट हैं। वह पिछली फिल्म में डायनासोर को प्रशिक्षित करते दिखे थे। उनका ये रिश्ता इस फिल्म में भावनाओं की कसौटी पर कसा जा रहा है। ब्राइस डलास हॉवर्ड के साथ मिलकर वह उस बच्ची के अभिभावक बने हैं जो धरती पर बिना पुरुष डीएनए के पैदा हुई है। लालची वैज्ञानिकों का शिकार बन चुकी इस किशोरी के हैरान परेशान अभिभावकों के रूप में और फिर अगवा होने के बाद इस किशोरी को बचाने के लिए जद्दोजहद में जुटे क्रिस प्रैट और ब्राइस ने फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ को रफ्तार दी है। फिल्म को ठहराव देने का काम किया है इस सीरीज के नामचीन सितारों लॉरा डर्न, जेफ गोल्डब्लम और सैम नील ने। तीनों को वापस एक साथ परदे पर देखना अतीत की सुखद यादों को दर्शकों के सामने ले आता है। तीनों ने अपना काम भी बहुत प्रभावशाली तरीके से किया है।
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जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
देखें कि ना देखें
फिल्म ‘जुरासिक वर्ल्ड डोमीनियन’ उन दर्शकों को ही भाएगी जो इसकी कहानी का लगातार पिछली पांच फिल्मों से अनुसरण करते रहे हैं। फिल्म की कहानी में कई दोहराव है और स्पेशल इफेक्ट्स और सिनेमैटोग्राफी में खास कुछ नया नहीं है। फिल्म बोर तो नहीं करती है लेकिन कुछ ऐसा नया भी परदे पर नहीं लाती है जिसे देख मुंह से निकल जाए, ‘वाह’!
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