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The Book of Boba Fett Review: स्टार वार्स महागाथा की नई कहानी में खटकी ये कमी, पहले एपीसोड में पड़ा नई पौध का बीज

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द बुक ऑफ बोबा फेट - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
द बुक ऑफ बोबा फेट
कलाकार
टेमुएरा मॉरिसन और मिंग ना वेन
लेखक
जॉन फैवरू
निर्देशक
रॉबर्ट रॉड्रिग्ज
निर्माता
लूकस फिल्म्स और गोलेम क्रिएश्न्स
रेटिंग
2.5/5

जॉर्ज लूकस की रची महागाथा ‘स्टार वॉर्स’ के किरदारों, उनकी कहानियों और उनके क्षेपकों के बारे में जानकारी रखना भी हॉलीवुड सिनेमा के दर्शकों को खूब भाता रहा है। मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स से पहले की इस महागाथा में नए रंग तब पड़े जब डिज्नी ने ‘स्टार वार्स’ बनाने वाली कंपनी लूकस फिल्मस को खरीद लिया। अब इस महागाथा के क्षेपक बन रहे हैं। ये उपकथाएं उन किरदारों की हैं जिन्हें दर्शकों ने ‘स्टार वॉर्स’ की फिल्मों में तो देखा लेकिन जिनका आगा पीछा जानने को भी वे बैचेन रहे। डिज्नी ने यही किस्सा मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स के किरदारों लोकी, वांडा, विजन, हॉकआई आदि के साथ भी शुरू कर रखा है। स्टार वॉर्स सागा में ‘द मैंडोलेरियन’ के बाद अब बारी ‘बोबा फेट’ की है। इस किरदार की अलग से बनी सात एपीसोड की क्षेपक कथा का पहला एपीसोड रिलीज हो चुका है।

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द बुक ऑफ बोबा फेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जैसा कि हर क्षेपक कथा में होता है, उसकी समय सारिणी जानना बहुत जरूरी होता है कि ये कहानी किस कालखंड में घट रही है। आमतौर पर ये कहानियां ईंटों के मकानों के दरके पलस्तर से झांकती ईंटों के बीच उग आए बरगद जैसी होती हैं। इनकी टहनियां अपनी अलग दिशा को लटकना चाहती हैं, ठीक वैसे ही जैसे ‘मैंडेलोरियन’ के साथ चलती बोबा फेट की कहानी दरअसल ‘रिटर्न ऑफ जेडाई’ की घटनाओं के बाद की बुनावट लिए हैं। मॉरिसन बोबा फेट का किरदार करते पहले पहल ‘मैंडेलोरियन’ के दूसरे सीजन में दिखे और साल भर से बस महीना भर ज्यादा लगा और उनकी अपनी सीरीज दर्शकों के सामने हैं। साथ में मिंग ना वेन भी हैं।

द बुक ऑफ बोबा फेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘स्टार वॉर्स’ की महागाथा को करीब से देखते रहे दर्शकों को याद होगा कि बोबा फेट का किरदार सबसे पहले ‘स्टार वॉर्स एपीसोड II अटैक ऑफ द क्लोन्स’ में दिखता है। वेब सीरीज ‘द बुक ऑफ बोबा फेट’ में फिल्म के उस हिस्से का इस्तेमाल किया भी गया है। सीरीज का पहला एपीसोड कोई खास रोमांच या उत्तेजना तो दर्शकों के मन में नहीं जगाता लेकिन इस पहले एपीसोड से इस बात की झलक जरूर मिलती है कि मॉरिसन को इस सीरीज में एक किरदार के अलग अलग हाव भाव प्रदर्शित करने का मौका मिलने वाला है। कहानी अपराध की है लेकिन जरायम की दुनिया में जिंदगी पाने वाला ये किरदार दहशत से नहीं बल्कि इज्जत के साथ अपना राज फैलाना चाहता है। रास्ता आसान नहीं है। उसके साथ है, उसकी सबसे खासमखास सिपहसालार।

द बुक ऑफ बोबा फेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘द बुक ऑफ बोबा फेट’ देखना ‘स्टार वॉर्स’ का पाठ्यक्रम की तरह अनुसरण करते रहे दर्शकों के लिए एक नया अध्याय पढ़ने जैसा है लेकिन इस पाठशाला की सबसे कमजोर कड़ी इसका हेडमास्टर यानी कि इसका निर्देशक ही है। इस पूरी सीरीज की संरचना करने वाले जॉन फेवरू ने इसका पहला एपीसोड हो सकता है जानबूझकर ही ऐसा लिखा हो कि लोगों को आगे पीछे का सारा नक्शा एक बार में ही समझ आ जाए लेकिन ये सिर्फ उनके साथ होगा जो सीरीज की कहानियां शुरू से समझते आए हैं। इस सीरीज की कहानी  में अब घुसने की कोशिश करने वालों को वेब सीरीज ‘द बुक ऑफ बोबा फेट’ का सिरा पकड़ने में दिक्कत हो सकती है।
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द बुक ऑफ बोबा फेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तकनीकी तौर पर भी देखा जाए तो अगर कोरोना संक्रमण काल की चुनौतियां न होतीं तो शायद वेब सीरीज ‘द बुक ऑफ बोबा फेट’ और बेहतर बन सकती थी। नवंबर 2020 में शुरू हुई सीरीज का पहला एपीसोड दिसंबर 2021 के आखिरी दिनों में रिलीज भी हो गया। यानी कि ये पूरी की पूरी सीरीज कोरोना संक्रमण काल में ही बनती रही है। पहले एपीसोड के लिहाज से इसे थोड़ा और आकर्षक और दर्शकों पर पकड़ बनाने वाला होना चाहिए था। जिस तरह फिल्म ‘इटर्नल्स’, ‘शांगची एंड द लेजेंड और द टेन रिंग्स’ और ‘स्पाइडरमैन नो वे होम’ बनाने वालों ने कहानियों, इनके किरदारों और इनके करिश्मे में आउटडोर लोकेशंस की मदद ली है, वैसा कुछ वेब सीरीज ‘द बुक ऑफ बोबा फेट’ में होता नहीं दिखता। कहानी पूरी तरह स्टूडियो की चहारदीवारी में स्पेशल इफेक्ट्स की मदद से रची गई है और ये सीरीज देखते समय खटकता भी है।
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