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'स्पेक्टर' समीक्षाः 'संस्कारी' होकर भी देखने लायक है यह नया बॉण्ड

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निर्माताः माइकल जी विल्सन, बार्बरा ब्रोकली
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निर्देशकः सैम मेंडेस
सितारेः डेनियल क्रेग, राल्फ फ्लेंस, बेन विशा, नाओमी हैरिस, मोनिका बेलुची, क्रिस्टोफ वॉल्ट्ज, डेव बतिस्ता और एंड्र्यू स्कॉट
रेटिंग ***1/5

भारत में रिलीज से पहले जेम्स बॉण्ड अपने कारनामों से नहीं बल्कि अपने संस्कारी होने की वजह से चर्चाओं में था। ट्विटर और फेसबुक पर बॉण्ड बियर की जगह गौमूत्र पीते और आलोक नाथ से आशीर्वाद लेकर ही गोली चलाते हुए संस्कारी बन चुका था।

जब आप बॉण्ड सीरिज की 24वीं फिल्म स्पेक्टर देखेंगे तो पाएंगे कि बॉण्ड वाकई संस्कारी है। किस करने की उसकी कोशिशों को भारतीय सेंसर ने सफल नहीं होने दिया। किस के अलावा बॉण्ड वही सब कुछ करता है जो बॉण्ड सीरिज की फिल्मों की पहचान हैं।
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चूंकि पिछली तीन फिल्मों में डेनिलय क्रेग ही बॉण्ड का किरदार निभा रहे हैं इसलिए दर्शक उन्हें आसानी से अपने साथ कनेक्ट कर लेते हैं। सांस रोक देने वाले हेलीकॉप्टर के एक फाइट सीन के साथ शुरू हुई यह फिल्म फिर आपको दम नहीं लेनी देती। फिल्म की लंबाई थोड़ी ज्यादा है लेकिन लंबी हिंदी फिल्म देखने के आदी दर्शकों को वह खटकती नहीं है।

हमेशा की ही तरह बॉण्ड के इस फिल्म में उसके दुश्मन आतंकी तो हैं ही खुद उसके डिपार्टमेंट उसके खिलाफ साजिशें रचता है। हां हमेशा की ही तरह उसके सहयोगी भी हैं जो उससे हमेशा नाखुश होते हुए भी मौके पर उसकी मदद करते रहते हैं।

बॉण्ड गुपचुप तरीके से अपने मिशन को अंजाम देता रहता है। फिल्म के शुरुआती फाइट सीन में बॉण्ड जिस आतंकी को मारता है उसे उस आतंकी के पास एक खास किस्म की अंगूठी मिलती है। अगूंठी की तफ्तीश के बाद उसे पता चलता है, स्पेक्टर का। स्पेक्टर दरअसल एक आतंकी संगठन होता है। स्पेक्टर का मतलब Special Executive for Counter-intelligence, Terrorism, Revenge and Extortion है। इसका काम दुनिया भर में दहशत फैलाना है।

एक्‍शन थोड़ा कम है, चलेगा?

बॉण्ड इस संस्‍था की एक मीटिंग में गुपचुप पहुंचकर उनकी बातचीत को सुनता है। इस संस्‍था का चीफ बॉण्ड का पूर्व परिचित है। वह अतीत में भी बॉण्ड को परेशान करता रहा है। यहीं से पूरी फिल्म एक-दूसरे का पीछा करते हुए बीतती है।

बॉण्ड की इस फिल्म में उसकी पिछली फिल्म की तुलना में एक्‍शन डोज थोड़ा कम है लेकिन बॉण्ड की यह फिल्म बॉण्ड के कारनामों और उसके प्रजेंस ऑफ माइंड से दर्शकों का बांधकर रखती है। बॉण्ड के इस सफर में उसे उसकी नई प्रेमिका डा. स्वान (ली सीडॉक्स) मिलती है।

बॉण्ड की यह प्रेमिका दरअसल उस आतंकी संगठन के एक पूर्व सदस्य की बेटी होती है जिसके खिलाफ बॉण्ड अपना मिशन चला रहा होता है। बॉण्ड की शॉर्गिद बनकर उसके लिए जासूसी करने वाली लड़कियां आमतौर पर उसकी प्रेमिका बन जाती हैं। ऐसा इस फिल्म में भी होता है। बॉण्ड के साथ उसके रोमांटिक दृश्य अच्छे हैं जो भारत के दर्शकों के ‌‌लिए सेंसर की मेहरबानी की वजह से अधूरे लगते हैं।

हिंदी फिल्मों की तरह करीब ढाई घंटे लंबी यह फिल्म बॉण्ड की स्टाईल से तो आपका मन मोहती ही है सुंदर लोकेशन भी इस फिल्म को भव्य बनाते हैं। गिरती इमारतें और उसको देखकर बदहवाश चेहरा लिए भागते हुए लोग जैसे दृश्य फिल्म में नहीं है। इसकी जगह भव्य दृश्यों का तरजीह दी गई है।

फिर बॉण्ड की गाड़ी और बॉण्ड की घड़ियां तो हैं ही। इस फिल्म में बॉण्ड कई जगह हेलिकॉप्टर को सड़कों पर उतारकर कार की तरह चलाते नजर आए हैं। हो सकता है कि जल्द ही 'बॉलीवुड के बॉण्ड' ऐसा करते नजर आएं।

कम बोलना वाले बॉण्ड का सेंस ऑफ हयूमर भी आपको आकर्षित करता है। फिल्म देखते ही देखते आप पाते हैं कि उसकी प्रेमिका की ही तरह आप भी बॉण्ड की अदाओं और उसके कूलनेस पर लट्टू हैं।
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अभिनय तो सबका उम्दा

बॉण्ड की तुलना बाकी‌ फिल्मों से नहीं बल्कि उसकी खुद की पिछली फिल्मों से होती है। इस अंतर में जाएं तो आप पाएंगे कि इस फिल्म का क्लाइमेक्स बॉण्ड की पिछली फिल्मों से थोड़ा कमजोर लगेगा। चेजिंग के दृश्य भी कम हैं।

बॉण्ड सीरिज की ‌पिछली तीन फिल्मों से बॉण्ड बन रहे हैं डेनियल क्रेग वाकई ‌थोड़े उम्रदराज नजर आते हैं। उम्र के साथ उन्होंने अपनी अदाएं भी बदली हैं। बॉण्ड अब ज्यादा काम दिमाग से निपटाने की कोशिश करता है।

सैम मेंडेस की इस फिल्म में एक्टिंग के लिहाज से सब अपनी जगह फिट हैं। डेनियल क्रेग तो शानदार हैं हीं राल्फ फ्लेंस, बेन विशा, नाओमी हैरिस, मोनिका बेलुची, क्रिस्टोफ वॉल्ट्ज, डेव बतिस्ता और एंड्र्यू स्कॉट जैसे कलाकारों ने भी सटीक अभिनय किया है।

फिल्म के मुख्य विलेन को न मारकर यह फिल्म आसानी से सीक्वल का रास्ता खोलकर रखती है। बॉण्ड का मिशन 00 खत्म किया जा चुका है। हो सकता है कि आने वाली फिल्मों में इस मिशन को कुछ नया नाम मिले। हालांकि इस फिल्म में बॉण्ड के दुश्मन थोड़े कमजोर हैं।
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