इंडियन 2 (हिंदुस्तानी 2) रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तमिल सिनेमा को पीछे ले जाती फिल्म
हिंदी सिनेमा के दर्शक दुनिया के इकलौते ऐसे दर्शक हैं जिनके ज्ञान के आगे बड़े से बड़ा फिल्मी पंडित पानी मांगता है। वह हिंदी सिनेमा तो खैर अपनी मातृभाषा से प्रेम के चलते देखते ही हैं। तेलुगु सिनेमा को वे दिल दे चुके हैं। मलयालम सिनेमा उनकी नई नई बनी माशूका है। कन्नड़ में भी धमाकेदार सिनेमा बनता है, उन्हें यश समझा चुके हैं। हॉलीवुड सिनेमा इन दर्शकों की ‘डेली डाइट’ का हिस्सा है। बस मामला फंसता है तमिल सिनेमा पर आकर। इसे भी वे खूब समझते और इसके बारे में चर्चा करते हैं, बस फिल्मकारों की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक विजय सेतुपति, विजय और कमल हासन के तमिल सिनेमा के भ्रमजाल में वे फंस नहीं पाए हैं।
इंडियन 2 (हिंदुस्तानी 2) रिव्यू
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कमल हासन ने खुद खराब की अपनी ब्रांडिंग
गलती इसमें सबसे ज्यादा कमल हासन की है। अपनी ‘मुंबई एक्सप्रेस’, ‘दशावतारम’, और ‘विश्वरूपम’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपने ब्रांड का हिंदीभाषी राज्यों में पलीता लगा रखा है। पिछली फिल्म ‘विक्रम’ को सफलता मिली तो बीरबल की खिचड़ी की तरह बनती आ रही फिल्म ‘इंडियन 2’ पर काम तेज हुआ। इसके निर्देशक शंकर या एस शंकर जो भी अपना नाम वह अब लिखते हों, ‘2.0’ के बाद से अपना तेज और अपनी आभा दोनों खो चुके हैं। तभी तो उन्हें हिंदी सिनेमा में मंच पर एटली की जरूरत पड़ी होगी। फिल्म ‘इंडियन 2’ पर एटली की फिल्म ‘जवान’ का असर दिखता है, हालांकि है इसका ठीक उलट। मुंबई के कार्यक्रम के दौरान एटली ने भरी सभा में माना भी था कि ‘इंडियन 2’ की कहानी शंकर ने उनसे तब साझा की थी जब वह शंकर के सहायक हुआ करते थे। पता नहीं कमल हासन ने ‘जवान’ देखी कि नहीं, क्योंकि अगर देखी होती तो ‘इंडियन 2’ तक वह और शंकर, दोनों शायद ही आते।
इंडियन 2 (हिंदुस्तानी 2) रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘इंडियन’ का ये गाना जरूर देखिए
जिनकी उम्र 50 के अरसे परते हैं, वे सब ‘टेलीफोन धुन में हंसने वाली, मेलबर्न मछली मचलने वाली’ गाने पर थिरक चुके हैं। ए आर रहमान का वह स्वर्णिम दौर था। मनीषा कोइराला बिल्कुल मटकी में बिलोए गए मट्ठे की नैनू जैसी खूबसूरत हुआ करती थीं। कमल हासन पर भी लोग दिल से फिदा थे। ये गाना आप जरूर देखिए। अगर आपने ‘इंडियन 2’ देख ली है, तब तो जरूर ही देखिए। अच्छा लगेगा। उस फिल्म से लेकर अब तक तीन दशक होने को हैं। न देश बदला है, न भारतीय सिनेमा का चलन। सेनापति ने ‘इंडियन’ में खूब भ्रष्टाचारी मारे। लोगों ने भारतीय युद्ध कौशल की उस अद्भुत कला का आनंद भी लिया। लेकिन, अब इसकी सीक्वल में? बहुत धैर्य चाहिए इस फिल्म को पूरा देख पाने के लिए।
इंडियन 2 (हिंदुस्तानी 2) रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
काश! कुछ तो होता तीन घंटे बिताने को..
बहुत कम होता है ऐसा कि दर्शक कोई फिल्म देखने जाएं और उसमें तारीफ करने के लिए सिर्फ एक दो चीजें ही मिलें। जैसे कि फिल्म ‘इंडियन 2’ में दो चार एक्शन सीन्स, गुलशन ग्रोवर का विजय मलाया वाला गेटअप, सिद्धार्थ का सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वाला अवतार और यहां वहां दिखीं रकुलप्रीत के अलावा बाकी कुछ बात करने को ही नहीं हैं। कहानी बहुत पकाऊ है। निर्देशन में जान नहीं है। पटकथा इतनी गोल गोल घूमती रहती है कि दर्शक भी चक्कर खा सकते हैं। मेकअप बहुत ही ज्यादा दयनीय है। खासतौर से कमल हासन का प्रोस्थेटिक मेकअप! अनिरुद्ध शंकर का संगीत फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है।